section 3
भूमि का व्यवस्थापन
The Madhya Pradesh Nagariya Kshetron Ke Bhoomihin Vyakti (Pattadhriti Adhikaron Ka Pradan Kiya Jana) Adhiniyam, 1984General19846 sections
Statutory text
- (1) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, किसी भूमि के संबंध में, जो [31 दिसम्बर, 2007] [31 मई, 1998] को किसी भूमिहीन व्यक्ति द्वारा किसी नगरीय क्षेत्र में अधिभोग में रखी जाती है, उपधारा
- (2) के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए, यह समझा जाएगा कि उक्त तारीख को उसका व्यवस्थापन, उसके पक्ष में पट्टाधृति अधिकारों में हो गया।
- (2) प्राधिकृत अधिकारी, राज्य सरकार द्वारा, समय-समय पर विरचित नियमों या जारी निदेशों के अध्यधीन रहते हुए, या तो भूमिहीन व्यक्ति के वास्तविक अधिभोग में की भूमि का व्यवस्थापन या उसको किसी अन्य भूमि का आबंटन जो पैंतालीस वर्गमीटर से अधिक न हो, उसके पक्ष में पट्टाधृति अधिकारों में कर सकेगा, परन्तु वह 31 दिसम्बर, 2007 के पूर्व से नगरीय क्षेत्र में अपने निवास को साबित करने के लिए निम्नलिखित सबूत पेश करेगा,- (क) सक्षम प्राधिकारी द्वारा उसे जारी किया गया राशन कार्ड; या (ख) यथास्थिति, नगरपालिक निगम, नगरपालिका या नगर पंचायत द्वारा प्राधिकृत समूचित अधिकारी से लिखित में परिसाक्ष्य, यह प्रमाणित करते हुए कि वह 31 दिसम्बर, 2007 के पूर्व से उस क्षेत्र में निवास करता है: परन्तु जहां भूमिहीन व्यक्ति के अधिभोग में पैंतालीस वर्ग मीटर से अधिक भूमि है, वहां भूमि का व्यवस्थापन, नगर पंचायत क्षेत्र में 80 वर्ग मीटर तक, नगरपालिका परिषद् क्षेत्र में 60 वर्ग मीटर तक कर सकेगा ; तथापि किसी नगर पालिक निगम के क्षेत्र में भूमि का व्यवस्थापन 45 वर्ग मीटर भूमि से अधिक नहीं होगा।"
- (3) उपधारा
- (1) के अधीन प्रोद्भूत पट्टाधृति अधिकार, उत्तराधिकार के सिवाय, किसी उप-पट्टे विक्रय, दान बंधक द्वारा या किसी भी अन्य रीति में अंतरणीय होंगे। परन्तु ऐसे पट्टाधृति अधिकारों को किसी निवासगृह के सन्निर्माण या विस्तार के लिए ऋण प्राप्त करने के लिए किसी राष्ट्रीयकृत बैंक या किसी सहकारी सोसायटी या किसी सरकारी उपक्रम के पक्ष में बंधक रखा जा सकेगा।
- (4) यदि कोई भूमिहीन व्यक्ति, जिसे इस अधिनियम के अधीन किसी भूमि के संबंध में पट्टाधृति अधिकारी प्रोद्भूत हो गए हैं, ऐसी भूमि उपधारा
- (3) के उपबंधों के उल्लंघन में अंतरित करता है या उक्त भूमि का निवास प्रयोजन से भिन्न किसी अन्य प्रयोजन के लिए उपयोग करता है तो निम्नलिखित परिणाम होंगे, अर्थात् - (एक) पट्टा ऐसे अन्तरण की तारीख को स्वतः रद्द हो जाएगा; (दो) ऐसा अन्तरण अकृत और शून्य होगा; (तीन) अन्तरिती को ऐसी भूमि के संबंध में कोई पट्टाधृति अधिकार प्रोद्भूत नहीं होंगे; (चार) प्राधिकृत अधिकारी का यह अधिकार होगा कि वह ऐसे व्यक्ति को जो ऐसी भूमि के वास्तविक कब्जे में हो; उससे बेकब्जा कर दे।
- (5) रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का सं 16) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते भी कोई भी ऐसा अधिकारी जो उस अधिनियम के अधीन दस्तावेजों का रजिस्ट्रीकरण करने के लिए सशक्त है, किसी दस्तावेज का रजिस्ट्रीकरण के लिए ग्रहण नहीं करेगा, जिससे उपधारा
- (3) के उपबंधों का उल्लंघन किया जाना तात्पर्यित हो।
- (6) ऐसा भूमिहीन व्यक्ति जिसे उपधारा
- (1) के अधीन पट्टाधृति अधिकार प्रोद्भूत हो गए हैं, ऐसी दर पर तथा ऐसी रीति में जो विहित की जाए, विकास प्रभारों का भुगतान करेगा।
- (7) भूमिहीन व्यक्ति को पट्टाधृति अधिकार प्रदान किये जाने के संबंध में पट्टा विलेख पर उस व्यक्ति का एक नया फोटो चिपकाया जाएगा तथा ऐसे फोटो की एक प्रति भूमि भाटक रजिस्टर में भी चिपकाई जाएगी और जहाँ पट्टाधृति अधिकार पति और पत्नी दोनों के नाम पर संयुक्त रूप से प्रदान किए गए हो, वहाँ दोनों का एक संयुक्त फोटो उपर्युक्त दस्तावेजों पर चिपकाया जाएगा। 13-क. निवास गृहों का हटाया जाना
- (1) राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त गठित समिति विहित प्रक्रिया के अनुसार किसी गंदी बस्ती को हटाने तथा उसका अन्यत्र व्यवस्थापन करने का विनिश्चतय करेगी।
- (2) किसी ऐसे भूमिहीन व्यक्ति का, जिसके अधिभोग में किसी सार्वजनिक पार्क की भूमि है या जिसके अधिभोग में सड़क के किनारे की या सड़क तथा बस्ती के बीच की भूमि है, लोकहित में ऐसे स्थान से हटाया जा सकेगा तथा अन्यत्र पट्टाधृति अधिकार दिए जा सकेंगे।
- (3) निवास गृहों के लिए किसी बस्ती को जहां धारा 3 की उपधारा
- (1) के अधीन भूमिहीन व्यक्तियों का व्यवस्थापन किया गया है, लोकहित में अन्यत्र स्थानांतरण किया जा सकेगा तथा उसके पट्टाधृति अधिकारों को रद्द किया जा सकेगा तथा ऐसे व्यक्ति का अन्यत्र व्यवस्थापन किया जा सकेगा।
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