Bare Act
The Madhya Pradesh Nagariya Kshetron Ke Bhoomihin Vyakti (Pattadhriti Adhikaron Ka Pradan Kiya Jana) Adhiniyam, 1984
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ
- (1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम "मध्यप्रदेश नगरीय क्षेत्रों के भूमिहीन व्यक्ति (पट्टाधृति अधिकारों का प्रदान किया जाना) अधिनियम, 1984" है।
- (2) इसका विस्तार मध्यप्रदेश राज्य के नगरीय क्षेत्रों तथा उसके पांच किलोमीटर क्षेत्र पर होगा।
- (3) (क) यह प्रथमत : जिला मुख्यालयों तथा उन नगरों में, जिनकी आबादी गत जनगणना के अनुसार एक लाख से अधिक है, प्रवृत्त होगा। (ख) यह किसी अन्य नगर में ऐसी तारीख से प्रवृत्त होगा, जिसे राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा नियत करे।
2. परिभाषाएं
इस अधिनियम में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो- (क) "प्राधिकृत अधिकारी" से अभिप्रेत है जिले का कोई उपखंड अधिकारी या कोई अन्य सहायक कलेक्टर या डिप्टी कलेक्टर, जिसे कलेक्टर आदेश द्वारा ऐसे क्षेत्रों में, जो कि उसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं, प्राधिकृत अधिकारी की शक्तियों का प्रयोग करने के लिए विशेष रूप से प्राधिकृत करे; (ख) "निवास गृह" से अभिप्रेत है एक मंजिली झोपड़ी या एक मंजिली अधिरचना, किन्तु उसके अन्तर्गत सरकार या किसी स्थानीय या कानूनी अधिकरण के स्वामित्व का कोई भवन नहीं आएगा ; (ग) विलोपित ; (घ) "भूमिहीन व्यक्ति" से अभिप्रेत है कोई ऐसा व्यक्ति जो किसी नगरीय क्षेत्र में, जहाँ वह वास्तविक रूप से निवास कर रहा है, कोई मकान या भूमि या तो वह अपने स्वयं के नाम पर या अपने कुटुम्ब के किसी सदस्य के नाम से स्वामित्व में नहीं रखता हो; स्पष्टीकरण - इस खंड के प्रयोजन के लिए "कुटुम्ब" के अन्तर्गत आते हैं पति-पत्नी, अवयस्क पुत्र, अविवाहित पुत्री या रक्त पर आधारित कोई नातेदार, जो भूमिहीन व्यक्ति पर पूर्णतः आश्रित हो। (घ-1) "अधिभोग रखना" से अभिप्रेत है नगरीय क्षेत्र में की, राज्य सरकार, स्थानीय निकाय या विकास प्राधिकरण की भूमि का निवास के प्रयोजनों के लिए अधिभोग में रखा जाना; (घ-2) ****** (घ-3) "नगरीय क्षेत्र" से अभिप्रेत है ऐसा क्षेत्र जो मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1956 (क्रमांक 23 सन् 1956) के अधीन गठित नगरपालिक निगम या मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 (क्रमांक 37 सन् 1961) के अधीन गठित नगर पालिका परिषद् या नगर पंचायत की सीमाओं के भीतर समाविष्ट है या ऐसा क्षेत्र, जो उनकी सीमाओं से पांच किलोमीटर की दूरी के भीतर स्थित है और नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 (क्रमांक 23 सन् 1973) की धारा 64 के अधीन गठित वर्तमान में विघटित विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण का क्षेत्र और नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 (क्रमांक 23 सन् 1973) की धारा 13 के अधीन तैयार की गई विकास योजना के अनुसार योजना क्षेत्र; (घ-4) "सरकारी भूमि" से अभिप्रेत है किसी नगरीय क्षेत्र में स्थित सरकार के राजस्व विभाग की ऐसी रिक्त भूमि जो किसी भी अन्य सरकारी विभाग की विशेष प्रयोजनों के लिए आवंटित नहीं की गई हो;
3. भूमि का व्यवस्थापन
- (1) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, किसी भूमि के संबंध में, जो [31 दिसम्बर, 2007] [31 मई, 1998] को किसी भूमिहीन व्यक्ति द्वारा किसी नगरीय क्षेत्र में अधिभोग में रखी जाती है, उपधारा
- (2) के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए, यह समझा जाएगा कि उक्त तारीख को उसका व्यवस्थापन, उसके पक्ष में पट्टाधृति अधिकारों में हो गया।
- (2) प्राधिकृत अधिकारी, राज्य सरकार द्वारा, समय-समय पर विरचित नियमों या जारी निदेशों के अध्यधीन रहते हुए, या तो भूमिहीन व्यक्ति के वास्तविक अधिभोग में की भूमि का व्यवस्थापन या उसको किसी अन्य भूमि का आबंटन जो पैंतालीस वर्गमीटर से अधिक न हो, उसके पक्ष में पट्टाधृति अधिकारों में कर सकेगा, परन्तु वह 31 दिसम्बर, 2007 के पूर्व से नगरीय क्षेत्र में अपने निवास को साबित करने के लिए निम्नलिखित सबूत पेश करेगा,- (क) सक्षम प्राधिकारी द्वारा उसे जारी किया गया राशन कार्ड; या (ख) यथास्थिति, नगरपालिक निगम, नगरपालिका या नगर पंचायत द्वारा प्राधिकृत समूचित अधिकारी से लिखित में परिसाक्ष्य, यह प्रमाणित करते हुए कि वह 31 दिसम्बर, 2007 के पूर्व से उस क्षेत्र में निवास करता है: परन्तु जहां भूमिहीन व्यक्ति के अधिभोग में पैंतालीस वर्ग मीटर से अधिक भूमि है, वहां भूमि का व्यवस्थापन, नगर पंचायत क्षेत्र में 80 वर्ग मीटर तक, नगरपालिका परिषद् क्षेत्र में 60 वर्ग मीटर तक कर सकेगा ; तथापि किसी नगर पालिक निगम के क्षेत्र में भूमि का व्यवस्थापन 45 वर्ग मीटर भूमि से अधिक नहीं होगा।"
- (3) उपधारा
- (1) के अधीन प्रोद्भूत पट्टाधृति अधिकार, उत्तराधिकार के सिवाय, किसी उप-पट्टे विक्रय, दान बंधक द्वारा या किसी भी अन्य रीति में अंतरणीय होंगे। परन्तु ऐसे पट्टाधृति अधिकारों को किसी निवासगृह के सन्निर्माण या विस्तार के लिए ऋण प्राप्त करने के लिए किसी राष्ट्रीयकृत बैंक या किसी सहकारी सोसायटी या किसी सरकारी उपक्रम के पक्ष में बंधक रखा जा सकेगा।
- (4) यदि कोई भूमिहीन व्यक्ति, जिसे इस अधिनियम के अधीन किसी भूमि के संबंध में पट्टाधृति अधिकारी प्रोद्भूत हो गए हैं, ऐसी भूमि उपधारा
- (3) के उपबंधों के उल्लंघन में अंतरित करता है या उक्त भूमि का निवास प्रयोजन से भिन्न किसी अन्य प्रयोजन के लिए उपयोग करता है तो निम्नलिखित परिणाम होंगे, अर्थात् - (एक) पट्टा ऐसे अन्तरण की तारीख को स्वतः रद्द हो जाएगा; (दो) ऐसा अन्तरण अकृत और शून्य होगा; (तीन) अन्तरिती को ऐसी भूमि के संबंध में कोई पट्टाधृति अधिकार प्रोद्भूत नहीं होंगे; (चार) प्राधिकृत अधिकारी का यह अधिकार होगा कि वह ऐसे व्यक्ति को जो ऐसी भूमि के वास्तविक कब्जे में हो; उससे बेकब्जा कर दे।
- (5) रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का सं 16) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते भी कोई भी ऐसा अधिकारी जो उस अधिनियम के अधीन दस्तावेजों का रजिस्ट्रीकरण करने के लिए सशक्त है, किसी दस्तावेज का रजिस्ट्रीकरण के लिए ग्रहण नहीं करेगा, जिससे उपधारा
- (3) के उपबंधों का उल्लंघन किया जाना तात्पर्यित हो।
- (6) ऐसा भूमिहीन व्यक्ति जिसे उपधारा
- (1) के अधीन पट्टाधृति अधिकार प्रोद्भूत हो गए हैं, ऐसी दर पर तथा ऐसी रीति में जो विहित की जाए, विकास प्रभारों का भुगतान करेगा।
- (7) भूमिहीन व्यक्ति को पट्टाधृति अधिकार प्रदान किये जाने के संबंध में पट्टा विलेख पर उस व्यक्ति का एक नया फोटो चिपकाया जाएगा तथा ऐसे फोटो की एक प्रति भूमि भाटक रजिस्टर में भी चिपकाई जाएगी और जहाँ पट्टाधृति अधिकार पति और पत्नी दोनों के नाम पर संयुक्त रूप से प्रदान किए गए हो, वहाँ दोनों का एक संयुक्त फोटो उपर्युक्त दस्तावेजों पर चिपकाया जाएगा। 13-क. निवास गृहों का हटाया जाना
- (1) राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त गठित समिति विहित प्रक्रिया के अनुसार किसी गंदी बस्ती को हटाने तथा उसका अन्यत्र व्यवस्थापन करने का विनिश्चतय करेगी।
- (2) किसी ऐसे भूमिहीन व्यक्ति का, जिसके अधिभोग में किसी सार्वजनिक पार्क की भूमि है या जिसके अधिभोग में सड़क के किनारे की या सड़क तथा बस्ती के बीच की भूमि है, लोकहित में ऐसे स्थान से हटाया जा सकेगा तथा अन्यत्र पट्टाधृति अधिकार दिए जा सकेंगे।
- (3) निवास गृहों के लिए किसी बस्ती को जहां धारा 3 की उपधारा
- (1) के अधीन भूमिहीन व्यक्तियों का व्यवस्थापन किया गया है, लोकहित में अन्यत्र स्थानांतरण किया जा सकेगा तथा उसके पट्टाधृति अधिकारों को रद्द किया जा सकेगा तथा ऐसे व्यक्ति का अन्यत्र व्यवस्थापन किया जा सकेगा।
4. कब्जे का वापस दिलाया जाना
- (1) यदि किसी ऐसे भूमिहीन व्यक्ति को, जिसको धारा 3 के अधीन किसी भूमि में पट्टाधृति अधिकार प्रोद्भूत होते हैं, उस भूमि या किसी भाग से, विधि के सम्यक् अनुक्रम में बेकब्जा न करके अन्यथा बेकब्जा कर दिया जाता है तो प्राधिकृत अधिकारी , बेकब्जा किये जाने की तारीख से छह मास के भीतर उक्त भूमिहीन व्यक्ति द्वारा उसके आवेदन किए जाने पर ऐसा कब्जा वापस दिलाएगा।
- (2) यदि [31 दिसम्बर , 2007] [31 मई, 1998] को प्रश्नगत भूमि के अधिभोग के बारे में कोई विवाद उत्पन्न होता है तो वह भूमिहीन व्यक्ति, जो दावा करता है कि उक्त तारीख को वह भूमि उसके अधिभोग में भी, वह विवाद विनिश्चय के लिए प्राधिकृत अधिकारी को विनिर्दिष्ट कर सकेगा। प्राधिकृत अधिकारी का उस पर विनिश्चय अंतिम होगा : परन्तु उपधारा
- (2) के अधीन कोई आदेश, विवाद के पक्षकारों को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दिए बिना पारित नहीं किया जाएगा। 4-क. परीक्षण कलेक्टर किसी भी समय स्वप्रेरणा से या किया हितबद्ध पक्षकार द्वारा किए गए आवेदन पर प्राधिकृत अधिकारी द्वारा पारित किए गए किसी आदेश की वैधता या औचित्य के संबंध में या उसके समक्ष लंबित किसी कार्यवाही की नियमितता के संबंध में अपना समाधान करने के प्रयोजन के लिए किसी भी ऐसे मामले का, जो ऐसे अधिकारी द्वारा निपटाया गया हो, या उसके समक्ष लंबित हो, अभिलेख मंगा सकेगा और उसकी परीक्षा कर सकेगा और उसके संबंध में ऐसा आदेश पारित कर सकेगा, जैसा कि वह ठीक समझे : परन्तु - (एक) कोई भी ऐसा आवेदन ग्रहण नहीं किया जाएगा, यदि वह आदेश की तारीख से तीस दिन के भीतर पेश न किया गया हो; (दो) कोई भी आवेदन पुनरीक्षण में फेरफार नहीं किया जाएगा या उलटा नहीं जाएगा, जब तक कि हितबद्ध पक्षकार पर सूचना की तामील न कर दी गई हो और उसे सुनवाई का अवसर न दे दिया गया हो।
5. शास्तियां
- (1) कोई भी व्यक्ति, जो- (एक) निवास गृह के अधिभोगी को सदोष बेकब्जा करेगा या बेकब्जा करने का प्रयत्न करेगा ; या (दो) किसी निवास गृह के अधिभोगी से किसी भी रीति में भाटक वसूल करेगा या वसूल करने की प्रक्रिया करेगा , या (तीन) कोई जानकारी छिपाएगा या पट्टाधृति अधिकारों को कपटपूर्वक अर्जित करने के आशय से असत्य जानकारी देगा। वह कठोर कारावास से, जो तीन मास से कम का नहीं होगा, किन्तु जो तीन साल तक का हो सकेगा और जुर्माने से पांच सौ रूपये से कम का नहीं होगा, किन्तु जो एक हजार रूपये तक का हो सकेगा, दंडित किया जाएगा।
- (2) यदि यह पाया जाए कि ऐसे भूमिहीन व्यक्ति ने जिसे इस अधिनियम के अधीन किसी भूमि के संबंध में पट्टाधृति प्रोद्भूत हो गए है, धारा 3 की उपधारा
- (3) के उपबंधों के उल्लंघन में ऐसी भूमि का विक्रय कर दिया है या उसे अन्यथा अंतरित कर दिया है तो प्राधिकृत अधिकारी , सक्षम न्यायालय के समक्ष एक परिवाद प्रस्तुत कर सकेगा और ऐसा व्यक्ति दोषसिद्धि पर, कारावास से, जो तीन मास तक का हो सकेगा या जुर्माने से जो एक हजार रूपये तक का हो सकेगा या दोनों से दण्डित किया जाएगा।
- (3) यदि कोई व्यक्ति बलपूर्वक, प्रवंचना या धन द्वारा विलुप्त कर के किसी भूमि या निवास गृह के अधिभोगी को बेकब्जा करता है तो प्राधिकृत अधिकारी ऐसे व्यक्ति के विरूद्ध सक्षम न्यायालय के समक्ष एक परिवाद प्रस्तुत कर सकेगा और ऐसा व्यक्ति दोषसिद्धि पर ऐसे कारावास, जो एक वर्ष तक का हो सकेगा या जुर्माने से जो पांच हजार रूपये तक का हो सकेगा या दोनों से दण्डित किया जाएगा। 5-क. अवैध कब्जे का प्रभाव यदि कोई भूमि किसी ऐसे अधिभोगी के कब्जे में नहीं है, जिसे इस अधिनियम के अधीन पट्टाधृति अधिकार दिए गए हैं, किन्तु जो किसी अन्य व्यक्ति के कब्जे में है, यदि ऐसी भूमि का निवास प्रयोजनों के लिए उपयोग किया जाता है, तब ऐसी भूमि के बाजार मूल्य के सवा गुना के बराबर की रकम और यदि ऐसी भूमि का वाणिज्यिक या अन्य अनिवासीय प्रयोजनों के लिए उपयोग किया जाता है, तब ऐसी भूमि के बाजार मूल्य के दो गुना के बराबर की रकम, ऐसे व्यक्ति से वसूल की जाएगी, जिसके वास्तविक कब्जे में वर्तमान में ऐसी भूमि है और ऐसी रकम के भुगतान पर वर्तमान अधिभोगी इस अधिनियम के अधीन ऐसी भूमि पर पट्टाधृति अधिकार प्राप्त करने का हकदार होगा।
6. नियम बनाने की शक्ति
- (1) राज्य सरकार, प्रीमियम तथा भू-भाटक से संबंधित विषयों को सम्मिलित करते हुए इस अधिनियम के समस्त प्रयोजनों या उनमें से किसी प्रयोजन को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी।
- (2) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया कोई भी नियम विधानसभा के पटल पर रखा जाएगा। 2013-1. Short title (Amendment Act, 2013) This Act may be called the Madhya Pradesh Nagariya Kshetron Ke Bhoomihin Vyakti (Pattadhriti Adhikaron Ka Pradan Kiya Jana) Sanshodhan Adhiniyam, 2013. 2013-2. Amendment of Section 3 (Amendment Act, 2013) In Section 3 of the Madhya Pradesh Nagariya Kshetron Ke Bhoomihin Vyakti (Pattadhriti Adhikaron Ka Pradan Kiya Jana) Adhiniyam, 1984 (No. 15 of 1984) (hereinafter referred to as the principal Act),—
- (i) in sub-section (1), for the figures and words “31ˢᵗ day of December, 2007”, the figures and words “31ˢᵗ day of December, 2012” shall be substituted;
- (ii) in sub-section (2), for the figures and words “31ˢᵗ December, 2007” wherever they occur, the figures and words “31ˢᵗ December, 2012” shall be substituted. 2013-3. Amendment of Section 4 (Amendment Act, 2013) In Section 4 of the principal Act, in sub-section (2), for the figures and words “31ˢᵗ December, 2007”, the figures and words “31ˢᵗ December, 2012” shall be substituted 2013-4. Amendment of Section 5 (Amendment Act, 2013) In Section 5 of the principal Act,-
- (i) in sub-section (1), for the words “and with fine which shall not be less than five hundred rupees but which may extend to one thousand rupees”, the words “and with fine which shall not be less than two thousand rupees but which may extend to ten thousand rupees” shall be substituted;
- (ii) in sub-section (2), for the words “may extend to three months or with fine which may extend to one thousand rupees or with both”, the words “shall not be less than three months but which may extend to three years and with fine which shall not be less than two thousand rupees but which may extend to ten thousand rupees” shall be substituted;
- (iii) in sub-section (3), for the words “may extend to one year or with fine which may extend to five thousand rupees or with both”, the words “shall not be less than three months but which may extend to three years and with fine which shall not be less than two thousand rupees but which may extend to ten thousand rupees” shall be substituted. 2017-1. Short title (Amendment Act, 2017) This Act may be called the Madhya Pradesh Nagariya Kshetron Ke Bhoomihin Vyakti (Pattadhriti Adhikaron Ka Pradan Kiya Jana) Sanshodhan Adhiniyam, 2017. 2017-2. Amendment of Section 3 (Amendment Act, 2017) In Section 3 of the Madhya Pradesh Nagariya Kshetron Ke Bhoomihin Vyakti (Pattadhriti Adhikaron Ka Pradan Kiya Jana) Adhiniyam, 1984 (No. 15 of 1984) (hereinafter reffered to as the principal Act),—
- (i) in sub-section (1), for the figures and words “31st day of December, 2012”, the figures and words “31st day of December, 2014” shall be substituted;
- (ii) in sub-section (2), for the figures and words “31st December, 2012” wherever they occur, the figures and words “31st December, 2014” shall be substituted. 2017-3. Amendment of Section 4 (Amendment Act, 2017) In Section 4 of the principal Act, in sub-section (2), for the figures and words “31st December, 2012” the figures and words “31st December, 2014” shall be substituted. 2023-1. Short title (Amendment Act, 2023) This Act may be called the Madhya Pradesh Nagariya Kshetron Ke Bhoomihin Vyakti (Pattadhriti Adhikaron Ka Pradan Kiya Jana) Sanshodhan Adhiniyam, 2023. 2023-2. Amendment of Section 3 (Amendment Act, 2023) In Section 3 of the Madhya Pradesh Nagariya Kshetron Ke Bhoomihin Vyakti (Pattadhriti Adhikaron Ka Pradan Kiya Jana) Adhiniyam, 1984 (No. 15 of 1984) (hereinafter referred to as the principal Act),—
- (i) in sub-section (1), for the figures and words "31ˢᵗ day of December, 2014", the figures and words "31ˢᵗ day of December, 2020" shall be substituted;
- (ii) in sub-section (2), for the figures and words "31ˢᵗ December, 2014" wherever they occur, the figures and words "31ˢᵗ December, 2020" shall be substituted. 2023-3. Amendment of Section 4 (Amendment Act, 2023) In Section 4 of the principal Act, in sub-section (2), for the figures and words "31ˢᵗ December, 2014", the figures and words "31ˢᵗ December, 2020" shall be substituted.
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