The Code of Criminal Procedure (Madhya Pradesh Amendment) Act, 2022
The Code of Criminal Procedure (Madhya Pradesh Amendment) Act, 2022
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ
१. (१) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम दण्ड विधि (मध्यप्रदेश संशोधन) अधिनियम, २०१९ है. (२) यह राजपत्र में इसके प्रकाशन का तारीख से प्रवृत्त होगा.
2. मध्यप्रदेश राज्य को लागू हुए रूप में केन्द्रीय अधिनियम, १९७४ का संख्यांक २ का संशोधन
२. मध्यप्रदेश राज्य को लागू हुए रूप में दण्ड प्रक्रिया संहिता, १९७३ (१९७४ का २) (जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के नाम से निर्दिष्ट है) को इसमें इसके पश्चात् उपबंधित रीति में संशोधित किया जाए.
3. धारा १२६ का संशोधन
३. मूल अधिनियम की धारा १२६ में, उपधारा (१) में, खण्ड (ग) में, पूर्ण विराम के स्थान पर, अल्प विराम स्थापित किया जाए और तत्पश्चात् निम्नलिखित खण्ड जोड़े जाएं, अर्थात् :—
"(घ) जहां धारा १२५ की उपधारा (१) के खण्ड (ग) में निर्दिष्ट ऐसा व्यक्ति या उसकी धर्मज या अधर्मज संतान सामान्यतः निवास करता है/ निवास करती है,
(ङ) जहां धारा १२५ की उपधारा (१) के खण्ड (घ) में निर्दिष्ट ऐसा व्यक्ति या उसके पिता या माता सामान्यतः निवास करता है/निवास करते हैं,
(च) जहां धारा १२५ की उपधारा (१) के खण्ड (ङ) में निर्दिष्ट ऐसा व्यक्ति या उसके पितामह या मातामह सामान्यतः निवास करता है/ निवास करते हैं.".
4. धारा २७३ का संशोधन
४. मूल अधिनियम की धारा २७३ में,—
(एक) पार्श्व शीर्षक के स्थान पर, निम्नलिखित पार्श्व शीर्षक स्थापित किया जाए, अर्थात् :—
''विचारण या अन्य कार्यवाही में साक्ष्य का लिया जाना'';
(दो) प्रारंभिक पैराग्राफ को उपधारा (१) के रूप में क्रमांकित किया जाए तथा इस प्रकार क्रमांकित उपधारा (१) के प्रारंभिक पैराग्राफ के स्थान पर, निम्नलिखित पैराग्राफ स्थापित किया जाए, अर्थात् :—
''(१) अभिव्यक्त रूप में जैसा उपबंधित है के सिवाय, विचारण या अन्य कार्यवाही के अनुक्रम में लिया गया सब साक्ष्य, साक्षी की वैयक्तिक उपस्थिति में या श्रव्य-दृश्य इलेक्ट्रॉनिक साधनों के माध्यम से और अभियुक्त की वैयक्तिक उपस्थिति में, या श्रव्य-दृश्य इलेक्ट्रॉनिक साधनों के माध्यम से या, जब उसे वैयक्तिक हाजिरी से अभिमुक्त कर दिया गया है तब उसके अधिवक्ता की उपस्थिति में अभिलिखित किया जाएगा.'';
(तीन) उपधारा (१) के पश्चात्, निम्नलिखित नई उपधारा जोड़ी जाए, अर्थात् :—
''(२) उपधारा (१) में निर्दिष्ट साक्ष्य, उच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर विरचित नियमों और दिशानिर्देशों के अनुसार अभिलिखित किए जाएंगे.''.
5. धारा २७८ का संशोधन
५. मूल अधिनियम की धारा २७८ में, उपधारा (१) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा स्थापित की जाए, अर्थात् :—
''(१) जैसे-जैसे प्रत्येक साक्षी का साक्ष्य जो धारा २७५ या धारा २७६ के अधीन लिया जाए, पूरा होता जाता है, वैसे-वैसे वह, यदि अभियुक्त हाजिर हो तो उसकी उपस्थिति में, या यदि वह अधिवक्ता द्वारा हाजिर हो तो उसके अधिवक्ता की उपस्थिति में, या जब अभियुक्त की उपस्थिति धारा २७३ के अधीन श्रव्य-दृश्य इलेक्ट्रॉनिक साधनों के माध्यम से हो, तो साक्षी को पढ़कर सुनाया जाएगा और यदि आवश्यक हो तो शुद्ध किया जाएगा.''.
6. धारा २८१ का संशोधन
६. मूल अधिनियम की धारा २८१ में,—
(एक) उपधारा (२) में, शब्द ''जब कभी अभियुक्त की परीक्षा महानगर मजिस्ट्रेट से भिन्न किसी मजिस्ट्रेट या सेशन न्यायालय द्वारा की जाती है'' के स्थान पर, शब्द ''जब कभी अभियुक्त की परीक्षा उसकी वैयक्तिक उपस्थिति में या श्रव्य-दृश्य इलेक्ट्रॉनिक साधनों के माध्यम से उसकी उपस्थिति में महानगर मजिस्ट्रेट से भिन्न किसी मजिस्ट्रेट या सेशन न्यायालय द्वारा की जाती है'' स्थापित किए जाएं;
(दो) उपधारा (५) में, पूर्ण विराम के स्थान पर, कोलन स्थापित किया जाए और तत्पश्चात् निम्नलिखित परन्तुक जोड़ा जाए, अर्थात् :—
''परन्तु यदि अभियुक्त की परीक्षा श्रव्य-दृश्य इलेक्ट्रॉनिक साधनों के माध्यम से की जाती है तो अभियुक्त के हस्ताक्षर की आवश्यकता नहीं होगी.''.
7. धारा २९१ का संशोधन
७. मूल अधिनियम की धारा २९१ में, उपधारा (१) में, शब्द ''अभियुक्त की उपस्थिति में,'' के स्थान पर, शब्द ''अभियुक्त की वैयक्तिक उपस्थिति में या श्रव्य-दृश्य इलेक्ट्रॉनिक साधनों के माध्यम से उसकी उपस्थिति में'' स्थापित किए जाएं.
8. धारा ३०५ का संशोधन
८. मूल अधिनियम की धारा ३०५ में,—
(एक) उपधारा (३) में, शब्द ''प्रतिनिधि की हाजिरी में'' के स्थान पर, शब्द ''प्रतिनिधि की वैयक्तिक उपस्थिति में या श्रव्य-दृश्य इलेक्ट्रॉनिक साधनों के माध्यम से उसकी उपस्थिति में'' स्थापित किए जाएं;
(दो) उपधारा (४) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा स्थापित की जाए, अर्थात् :—
''(४) जहां निगम का कोई प्रतिनिधि या तो वैयक्तिक रूप से या श्रव्य-दृश्य इलेक्ट्रॉनिक साधनों के माध्यम से उपस्थित नहीं होता है, वहां कोई ऐसी अपेक्षा, जो उपधारा (३) में निर्दिष्ट है, लागू नहीं होगी, किन्तु यदि वह श्रव्य-दृश्य इलेक्ट्रॉनिक साधनों के माध्यम से उपस्थित होता है, वहां कोई ऐसी अपेक्षा, जो उपधारा (३) में निर्दिष्ट है, लागू होगी.''.
9. धारा ३१७ का संशोधन
९. मूल अधिनियम की धारा ३१७ में, निम्नलिखित स्पष्टीकरण जोड़ा जाए, अर्थात् :—
''स्पष्टीकरण.—इस धारा के प्रयोजन के लिये ''अभियुक्त की वैयक्तिक हाजिरी'' में श्रव्य-दृश्य इलेक्ट्रॉनिक साधनों के माध्यम से उसकी हाजिरी सम्मिलित होगी.''.
10. धारा ३२० का संशोधन
१०. मूल अधिनियम की धारा ३२० में, उपधारा (२) के नीचे सारणी में,—
(एक) कालम १, २ और ३ में, धारा ३१२ तथा उससे संबंधित प्रविष्टियों के पहले निम्नलिखित धाराएं तथा उनसे संबंधित प्रविष्टियां अन्तःस्थापित की जाएं, अर्थात् :—
१ | २ | ३ ''बलवा | १४७ | वह व्यक्ति, जिसके विरुद्ध अपराध कारित करते समय बल या हिंसा का प्रयोग किया गया है; | | परन्तु अभियुक्त ऐसे अन्य अपराध के लिए आरोपित नहीं किया गया है, जो शमनीय नहीं है. अश्लील कार्य या अश्लील शब्दों का प्रयोग | २९४ | वह व्यक्ति, जिसे क्षोभ कारित करने हेतु अश्लील कार्य किए गए थे या अश्लील शब्दों का प्रयोग किया गया था.'';
(दो) कालम १, २ और ३ में, धारा ४९८ तथा उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित धारा तथा उससे संबंधित प्रविष्टियां अन्तःस्थापित की जाएं, अर्थात् :—
१ | २ | ३ ''किसी स्त्री के पति या पति के नातेदार द्वारा उसके प्रति क्रूरता करना. | ४९८-क | जिस स्त्री के साथ क्रूरता हुई :— | | परन्तु अपराध के शमन के लिए आवेदन के दिनांक से न्यूनतम छह माह की कालावधि व्यपगत हो गई हो और न्यायालय का, यदि यह समाधान हो जाता है कि शमन उस महिला के हित में है, तो वह आवेदन स्वीकार कर सकेगा जबकि कोई भी पक्षकार अनावर्ती कालावधि के भीतर ऐसे आवेदन को वापस नहीं लेता.'';
(तीन) कालम १, २ और ३ में, धारा ५०० तथा उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित धारा तथा उससे संबंधित प्रविष्टियां अन्तःस्थापित की जाएं, अर्थात् :—
१ | २ | ३ ''आपराधिक अभित्रास, यदि धमकी, मृत्यु या घोर उपहति इत्यादि कारित करने की हो. | धारा ५०६ का भाग-दो | वह व्यक्ति, जिसके विरुद्ध आपराधिक अभित्रास का अपराध कारित किया गया था.''.
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