section XI
नियम बनाने की शक्ति
The Jharkhand Legislative Assembly (Officers Pay and Allowances) Act, 2001राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के प्रयोजनार्थ नियम बना सकेगी।
2. विशिष्ट और पूर्ववर्ती शक्तियों का प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना राज्य सरकार विभिन्न प्रकार के भत्ते को अवधारित करने हेतु नियम बना सकेगी:
(क) उक्त अधिनियम की धारा-2 में उल्लिखित राज्य विधान-मंडल के पदाधिकारियों को मोटरकार खरीदने के लिए अग्रिम तथा सवारी भत्ता का दिया जाना।
(ख) उक्त अधिनियम की धारा-2 में उल्लिखित राज्य विधान-मंडल के पदाधिकारियों को यात्रा और दैनिक भत्ता।
(ग) उक्त अधिनियम की धारा-2 में उल्लिखित राज्य विधान-मंडल के पदाधिकारियों को क्षेत्रीय भत्ता।
(च) उक्त अधिनियम की धारा-2 में उल्लिखित राज्य विधान-मंडल के पदाधिकारियों को सरकार भत्ता।
(ङ) अन्य भत्ते।
3. इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, इसके बनाए जाने के बाद, यथाशीघ्र, राज्य विधान-मंडल के सदन के समक्ष, जब वह 14 दिनों की कुल अवधि के लिए सत्र में हो, जिसमें एक सत्र या दो क्रमवर्ती सत्र समाविष्ट हो, रखा जायगा और यदि जिस सत्र में यह रखा गया हो, उसकी समाप्ति के पूर्व अथवा उसकी ठीक बाद वाले सत्र में, सदन नियम में कोई उपान्तरण करने के लिए सहमत हो अथवा सदन सहमत हो कि नियम नहीं बनाया जाए, तो उसके बाद यथास्थिति, नियम का ऐसे उपान्तरित रूप में ही प्रभाव होगा अथवा उसका कोई प्रभाव नहीं होगा, फिर भी ऐसा कोई उपान्तरण या बातिलीकरण उस नियम के अधीन पहले की गई कोई बात की विधि मान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा।
1(2003). संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ
- (i) यह झारखण्ड विधान-मंडल (पदाधिकारियों का वेतन और भत्ता) (तृतीय संशोधन) अधिनियम, 2003 कहा जा सकेगा।
- (ii) इसका विस्तार सम्पूर्ण झारखण्ड राज्य में होगा।
- (iii) यह अधिनियम दिनांक 16 सितम्बर, 2002 से प्रवृत्त समझा जायेगा। 2(2003). झारखण्ड अधिनियम, 2001 (अधिनियम संख्या-01, 2001) की धारा-IV का संशोधन
- (1) झारखण्ड विधान-मंडल (पदाधिकारियों का वेतन और भत्ता) अधिनियम 2001 (झारखण्ड अधिनियम 01, 2001) में प्रयुक्त शब्द 'दैनिक भत्ता' के स्थान पर शब्द 'प्रभारी भत्ता' प्रतिस्थापित किये जायेंगे। 3(2003). झारखण्ड अधिनियम, 01, 2001 की धारा-VII का संशोधन झारखण्ड विधान-मंडल (पदाधिकारियों का वेतन और भत्ता) अधिनियम 2001 की धारा-VII में विधान-मंडल के अध्यक्ष/उपाध्यक्ष 'चिकित्सा भत्ता' के रूप में, के पश्चात् शब्द 'प्रतिमाह' समाविष्ट किया जायेगा। 4(2003). निरसन एवं व्यावृत्ति
- (1) झारखण्ड विधान-मंडल (पदाधिकारियों का वेतन और भत्ता) (तृतीय संशोधन) अध्यादेश, 2003 (झारखण्ड अध्यादेश, 03, 2003) के द्वारा निरसित किया जाता है।
- (2) ऐसे निरसन के होते हुए भी उक्त अध्यादेश के द्वारा या के अधीन प्रदत्त किसी शक्ति के प्रयोग में किया गया कोई कार्य या की गयी कोई कार्रवाई इस अधिनियम द्वारा या के अधीन प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में किया गया या की गयी समझी जायेगी, मानो यह अधिनियम उस दिन प्रवृत्त था जिस दिन ऐसा कार्य किया गया था या ऐसी कार्रवाई की गयी थी। 1(2005). संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ
- (i) यह झारखण्ड विधान मंडल (पदाधिकारियों का वेतन एवं भत्ता) (संशोधन) अधिनियम, 2005 कहा जा सकेगा।
- (ii) इसका विस्तार सम्पूर्ण झारखण्ड राज्य में होगा।
- (iii) यह तुरंत प्रवृत्त होगा। 2(2005). झारखण्ड अधिनियम-01 की धारा-IV का संशोधन झारखण्ड विधान मण्डल (पदाधिकारियों का वेतन और भत्ता) अधिनियम, 2001 (झारखण्ड अधिनियम-01, 2001) की धारा IV के द्वितीय पंक्ति में शब्द समूह जोड़े जायेंगे। “हवाई यात्रा एवं जलपोत से यात्रा करने के समय अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के साथ एक सहयात्री की सुविधा अनुमान्य होगी ।” 3(2005). झारखण्ड अधिनियम-2001 (अधिनियम संख्या-01, 2001) की धारा-(V) का संशोधन झारखण्ड विधान मण्डल पदाधिकारीयों का वेतन और भत्ता अधिनियम, 2001 (झारखण्ड अधिनियम-01, 2001) में क्षेत्रीय भत्ता में परिवर्तन कर अध्यक्ष/उपाध्यक्ष के लिए “4000/- (चार हजार) रू०” के स्थान पर “8000/- (आठ हजार) रू०” प्रतिस्थापित किये जायेंगे । 4(2005). झारखण्ड अधिनियम-01, 2001 की धारा-VI कंडिका-'क' एवं 'ख' का संशोधन झारखण्ड विधान मण्डल (पदाधिकारियों का वेतन और भत्ता) अधिनियम, 2001 (झारखण्ड अधिनियम-01, 2001) की धारा-VI की कंडिका-'क' मे अंक “8,000/- (आठ हजार)” रुपये के स्थान पर “11,000/- (ग्यारह हजार)” रुपये एवं धारा-VI की कंडिका-'ख' मे अंक “5,000/- (पाँच सौ)” रुपये के स्थान पर “8,000/- (आठ हजार)” रुपये प्रतिस्थापित किये जायेंगे । 5(2005). झारखण्ड विधान मण्डल पदाधिकारीयों का वेतन और भत्ता अधिनियम, 2001 (झारखण्ड अधिनियम-01, 2001) की धारा-VII में संशोधन झारखण्ड विधान मण्डल पदाधिकारीयों का वेतन और भत्ता अधिनियम, 2001 (झारखण्ड अधिनियम-01, 2001) की धारा-VII में (यथा संशोधित द्वितीय संशोधन अधिनियम, 2002, झारखण्ड अधिनियम-15, 2002) की धारा-VII में “विधान-मण्डल के अध्यक्ष/उपाध्यक्ष को चिकित्सा भत्ता के रूप में “2000/- (दो हजार) रू०” के स्थान पर “3000/- (तीन हजार) रू०” प्रतिस्थापित किया जायेगा ।
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