Bare Act
The Jharkhand Legislative Assembly (Officers Pay and Allowances) Act, 2001
3. यह तुरंत प्रवृत्त होगा।
II. अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का वेतन झारखण्ड विधान-मंडल के अध्यक्ष को प्रतिमाह 3000/-(तीन हजार) रुपये की दर से वेतन का भुगतान किया जाएगा;
2. झारखण्ड विधान-मंडल के उपाध्यक्ष को प्रतिमाह 3000/- (तीन हजार) रुपये की दर से वेतन का भुगतान किया जाएगा;
3. झारखण्ड विधान-मंडल के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन और भत्ते पर देय आयकर का भुगतान राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा।
I. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ
यह अधिनियम झारखण्ड विधान-मंडल (पदाधिकारियों का वेतन और भत्ता) अधिनियम, 2001 कहा जा सकेगा।
III. मोटर कार खरीदने के लिए अध्यक्ष को अग्रिम और सवारी भत्ता का दिया जाना
राज्य सरकार धारा-2 में निर्दिष्ट राज्य विधान-सभा के पदाधिकारियों के उपयोग के लिए समय-समय पर मोटरकारों की खरीद और उपबंध ऐसी शर्तों पर कर सकेगी जो राज्य सरकार नियमों द्वारा अवधारित करे;
2. धारा-2 में निर्दिष्ट राज्य विधान-मंडल का कोई पदाधिकारी ऐसी रियायती दर पर और अन्य शर्तों पर प्रभार का भुगतान करके स्टाफ कार के उपयोग करने का हकदार होगा जो राज्य सरकार समय-समय पर नियमों द्वारा अवधारित करे।
स्पष्टीकरण : इस धारा के प्रयोजनार्थ अभिव्यक्त "स्टाफकार" से अभिप्रेत है सरकारी प्रयोजनों के लिए राज्य सरकार की स्वामित्ववाली और उसके द्वारा अनुरक्षित कोई मोटरगाड़ी।
IV. राज्य विधान-मंडल के पदाधिकारियों को यात्रा और दैनिक भत्ता
धारा-2 में निर्दिष्ट राज्य विधान-मंडल के पदाधिकारी लोक कारबार से दौरा करने पर राज्य के अन्दर 350/- (तीन सौ पचास) रुपये एवं राज्य के बाहर दैनिक भत्ता 500/- (पाँच सौ) रुपये पाने के हकदार होंगे।
V. क्षेत्रीय भत्ता
उक्त अधिनियम की धारा-2 में यथापरिभाषित राज्य विधान-मंडल का कोई पदाधिकारी 4000/-(चार हजार) रुपये क्षेत्रीय भत्ता पाने का हकदार होगा।
VI. सत्कार भत्ता
उक्त अधिनियम की धारा-2 में यथापरिभाषित विधान-सभा का कोई पदाधिकारी निम्न प्रकार से सत्कार भत्ता पाने का हकदार होगा: (क) अध्यक्ष : 1000/-(एक हजार) रुपये प्रतिमाह, (ख) उपाध्यक्ष : 500 (पाँच सौ) रुपये प्रतिमाह।
VII. चिकित्सीय उपचार की सुविधाएँ
धारा-2 में निर्दिष्ट राज्य विधान-मंडल के पदाधिकारी और उनके परिवार के सदस्य निःशुल्क चिकित्सीय परिचर्या और दवाओं की आपूर्ति तथा अस्पतालों में वास-सुविधा के संबंध में ऐसी सुविधाओं और रियायतों के हकदार होंगे, जो राज्य सरकार नियमों द्वारा अवधारित करें।
VIII. अध्यक्ष का आवास
झारखण्ड विधान-मंडल के अध्यक्ष बिना किराया के अपनी पूरी पदावधि तक और उसके ठीक एक महीना बाद तक राँची में तथा राँची के अलावा अन्य ऐसे स्थान में भी, जहां विधान-मंडल का सत्र होता हो, सुसज्जित आवास का उपयोग करने के हकदार होंगे।
2. ऐसे आवास के अनुरक्षण के संबंध में झारखण्ड विधान-मंडल के अध्यक्ष पर व्यक्तिगत रूप से कोई प्रभार नहीं पड़ेगा।
3. इस धारा के अधीन उपबंधित आवास को सुसज्जित और अनुरक्षित करने का खर्च उस पैमाने पर और उन आर्थिक सीमाओं के भीतर होगा जो राज्य सरकार नियम द्वारा निर्धारित करे।
स्पष्टीकरण: इस धारा के प्रयोजनार्थ "आवास" के अन्तर्गत स्टॉफ क्वार्टर और उससे संलग्न अन्य भवन तथा उसके बगीचे भी हैं और आवास से संबंधित "अनुरक्षण" के अन्तर्गत स्थानीय करों एवं अन्य करों के भुगतान तथा विद्युत शक्ति और जल की आपूर्ति भी सम्मिलत है।
IX. उपाध्यक्ष का निवास
झारखण्ड विधान-मंडल का उपाध्यक्ष किराया दिए बिना निम्नलिखित के उपयोग करने का हकदार होगा:
(क) राँची में अपनी पूरी पदावधि तक और उसके ठीक बाद पन्द्रह दिनों की अवधि तक एक सुसज्जित आवास का उपयोग करने के हकदार होंगे।
(ख) किसी अन्य स्थान पर जहाँ झारखण्ड राज्य के विधान-मंडल का सत्र आयोजित हो, उसके दौरान, और सत्र के पूर्व एक सप्ताह और बाद में एक सप्ताह से अधिक अवधि के लिए एक सुसज्जित निवास अथवा ऐसे निवास के बदले प्रतिमाह एक सौ रुपये की दर से आवास भत्ता देय होंगे।
2. इस धारा के अधीन उपबंधित किसी निवास के अनुरक्षण के संबंध में झारखण्ड विधान-मंडल के उपाध्यक्ष पर व्यक्तिगत रूप से कोई प्रभार नहीं पड़ेगा।
3. इस धारा के अधीन उपबंधित निवास की साज-सज्जा और अनुरक्षण पर ऐसे पैमाने और ऐसी वित्तीय सीमाओं के अधीन खर्च किया जाएगा जो राज्य सरकार नियमों द्वारा अवधारित करे।
स्पष्टीकरण : इस धारा के प्रयोजनार्थ "आवास" के अन्तर्गत स्टॉफ क्वार्टर और उससे संलग्न अन्य भवन तथा उसके बगीचे भी हैं और आवास से संबंधित "अनुरक्षण" के अन्तर्गत स्थानीय करों एवं अन्य करों के भुगतान तथा विद्युतशक्ति और जल की आपूर्ति भी सम्मिलित है।
X. राज्य विधान-मंडल के पदाधिकारियों की नियुक्ति आदि से संबंधित अधिसूचना जो उसके निश्चायक साक्ष्य होगी
जिस तारीख को कोई व्यक्ति धारा-2 में निर्दिष्ट राज्य विधान-मंडल का पदाधिकारी हो जाय या पदा-धिकारी न रह जाय, उसे राजपत्र में प्रकाशित किया जाएगा और ऐसी कोई अधिसूचना इस तथ्य का निश्चायक साक्ष्य होगी कि अधिनियम के प्रयोजनार्थ उस तारीख को राज्य विधान मंडल का पदाधिकारी हुआ या पदाधिकारी नहीं रह गया।
XI. नियम बनाने की शक्ति
राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के प्रयोजनार्थ नियम बना सकेगी।
2. विशिष्ट और पूर्ववर्ती शक्तियों का प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना राज्य सरकार विभिन्न प्रकार के भत्ते को अवधारित करने हेतु नियम बना सकेगी:
(क) उक्त अधिनियम की धारा-2 में उल्लिखित राज्य विधान-मंडल के पदाधिकारियों को मोटरकार खरीदने के लिए अग्रिम तथा सवारी भत्ता का दिया जाना।
(ख) उक्त अधिनियम की धारा-2 में उल्लिखित राज्य विधान-मंडल के पदाधिकारियों को यात्रा और दैनिक भत्ता।
(ग) उक्त अधिनियम की धारा-2 में उल्लिखित राज्य विधान-मंडल के पदाधिकारियों को क्षेत्रीय भत्ता।
(च) उक्त अधिनियम की धारा-2 में उल्लिखित राज्य विधान-मंडल के पदाधिकारियों को सरकार भत्ता।
(ङ) अन्य भत्ते।
3. इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, इसके बनाए जाने के बाद, यथाशीघ्र, राज्य विधान-मंडल के सदन के समक्ष, जब वह 14 दिनों की कुल अवधि के लिए सत्र में हो, जिसमें एक सत्र या दो क्रमवर्ती सत्र समाविष्ट हो, रखा जायगा और यदि जिस सत्र में यह रखा गया हो, उसकी समाप्ति के पूर्व अथवा उसकी ठीक बाद वाले सत्र में, सदन नियम में कोई उपान्तरण करने के लिए सहमत हो अथवा सदन सहमत हो कि नियम नहीं बनाया जाए, तो उसके बाद यथास्थिति, नियम का ऐसे उपान्तरित रूप में ही प्रभाव होगा अथवा उसका कोई प्रभाव नहीं होगा, फिर भी ऐसा कोई उपान्तरण या बातिलीकरण उस नियम के अधीन पहले की गई कोई बात की विधि मान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा।
1(2003). संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ
- (i) यह झारखण्ड विधान-मंडल (पदाधिकारियों का वेतन और भत्ता) (तृतीय संशोधन) अधिनियम, 2003 कहा जा सकेगा।
- (ii) इसका विस्तार सम्पूर्ण झारखण्ड राज्य में होगा।
- (iii) यह अधिनियम दिनांक 16 सितम्बर, 2002 से प्रवृत्त समझा जायेगा। 2(2003). झारखण्ड अधिनियम, 2001 (अधिनियम संख्या-01, 2001) की धारा-IV का संशोधन
- (1) झारखण्ड विधान-मंडल (पदाधिकारियों का वेतन और भत्ता) अधिनियम 2001 (झारखण्ड अधिनियम 01, 2001) में प्रयुक्त शब्द 'दैनिक भत्ता' के स्थान पर शब्द 'प्रभारी भत्ता' प्रतिस्थापित किये जायेंगे। 3(2003). झारखण्ड अधिनियम, 01, 2001 की धारा-VII का संशोधन झारखण्ड विधान-मंडल (पदाधिकारियों का वेतन और भत्ता) अधिनियम 2001 की धारा-VII में विधान-मंडल के अध्यक्ष/उपाध्यक्ष 'चिकित्सा भत्ता' के रूप में, के पश्चात् शब्द 'प्रतिमाह' समाविष्ट किया जायेगा। 4(2003). निरसन एवं व्यावृत्ति
- (1) झारखण्ड विधान-मंडल (पदाधिकारियों का वेतन और भत्ता) (तृतीय संशोधन) अध्यादेश, 2003 (झारखण्ड अध्यादेश, 03, 2003) के द्वारा निरसित किया जाता है।
- (2) ऐसे निरसन के होते हुए भी उक्त अध्यादेश के द्वारा या के अधीन प्रदत्त किसी शक्ति के प्रयोग में किया गया कोई कार्य या की गयी कोई कार्रवाई इस अधिनियम द्वारा या के अधीन प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में किया गया या की गयी समझी जायेगी, मानो यह अधिनियम उस दिन प्रवृत्त था जिस दिन ऐसा कार्य किया गया था या ऐसी कार्रवाई की गयी थी। 1(2005). संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ
- (i) यह झारखण्ड विधान मंडल (पदाधिकारियों का वेतन एवं भत्ता) (संशोधन) अधिनियम, 2005 कहा जा सकेगा।
- (ii) इसका विस्तार सम्पूर्ण झारखण्ड राज्य में होगा।
- (iii) यह तुरंत प्रवृत्त होगा। 2(2005). झारखण्ड अधिनियम-01 की धारा-IV का संशोधन झारखण्ड विधान मण्डल (पदाधिकारियों का वेतन और भत्ता) अधिनियम, 2001 (झारखण्ड अधिनियम-01, 2001) की धारा IV के द्वितीय पंक्ति में शब्द समूह जोड़े जायेंगे। “हवाई यात्रा एवं जलपोत से यात्रा करने के समय अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के साथ एक सहयात्री की सुविधा अनुमान्य होगी ।” 3(2005). झारखण्ड अधिनियम-2001 (अधिनियम संख्या-01, 2001) की धारा-(V) का संशोधन झारखण्ड विधान मण्डल पदाधिकारीयों का वेतन और भत्ता अधिनियम, 2001 (झारखण्ड अधिनियम-01, 2001) में क्षेत्रीय भत्ता में परिवर्तन कर अध्यक्ष/उपाध्यक्ष के लिए “4000/- (चार हजार) रू०” के स्थान पर “8000/- (आठ हजार) रू०” प्रतिस्थापित किये जायेंगे । 4(2005). झारखण्ड अधिनियम-01, 2001 की धारा-VI कंडिका-'क' एवं 'ख' का संशोधन झारखण्ड विधान मण्डल (पदाधिकारियों का वेतन और भत्ता) अधिनियम, 2001 (झारखण्ड अधिनियम-01, 2001) की धारा-VI की कंडिका-'क' मे अंक “8,000/- (आठ हजार)” रुपये के स्थान पर “11,000/- (ग्यारह हजार)” रुपये एवं धारा-VI की कंडिका-'ख' मे अंक “5,000/- (पाँच सौ)” रुपये के स्थान पर “8,000/- (आठ हजार)” रुपये प्रतिस्थापित किये जायेंगे । 5(2005). झारखण्ड विधान मण्डल पदाधिकारीयों का वेतन और भत्ता अधिनियम, 2001 (झारखण्ड अधिनियम-01, 2001) की धारा-VII में संशोधन झारखण्ड विधान मण्डल पदाधिकारीयों का वेतन और भत्ता अधिनियम, 2001 (झारखण्ड अधिनियम-01, 2001) की धारा-VII में (यथा संशोधित द्वितीय संशोधन अधिनियम, 2002, झारखण्ड अधिनियम-15, 2002) की धारा-VII में “विधान-मण्डल के अध्यक्ष/उपाध्यक्ष को चिकित्सा भत्ता के रूप में “2000/- (दो हजार) रू०” के स्थान पर “3000/- (तीन हजार) रू०” प्रतिस्थापित किया जायेगा ।
Some statutory text is still being prepared for this language version.
PDF: pending for this language.