section 20
विधिमान्यकरण
The Chhattisgarh Lok Parisar (Bedakhli) Adhiniya, 1974किसी न्यायालय के किसी निर्णय, डिक्री या आदेश के होते हुए भी, किसी ऐसी बात या कार्यवाही (जिसमें बनाए गए नियम या किए गए आदेश, जारी की गई सूचनाएं आदिष्ट या की गई बेदखली, निर्धारित की गई नुकसानी, वसूल किए गए किराये या नुकसानी या खर्चे, शुरू की गई कार्यवाहियां सम्मिलित हैं) के संबंध में जो मध्यप्रदेश गवर्नमेंट प्रमाइसिस इविक्शन) एक्ट, 1952 (क्रमांक 16 सन् 1952) (जो इसमें इसके पश्चात् सन् 1952 के अधिनियम के नाम से निर्दिष्ट है) के अधीन की गई हो या जिसका कि उस तरह किया जा सकता तात्पर्यत रहा हो, यह समझा जाएगा कि वह इस तरह विधिमान्य तथा प्रभावी है मानो कि ऐसी बात या कार्यवाही इस अधिनियम के जो कि धारा 1 की उपधारा (3) के अधीन महाकौशल क्षेत्र में 12 सितम्बर, 1952 को तथा अन्य क्षेत्रों में 1 जनवरी, 1959 को प्रवृत हुआ समझा जाएगा तत स्थानी उपबंधों के अधीन की गई थी और तद्नुसार :-
(क) सन् 1952 के अधिनियम के अधीन वसूल किए गए किसी किराये या नुकसानी या खर्चों की वापसी के लिए, उस दशा में जबकि ऐसी वापसी का दावा केवल इस आधार पर किया गया हो कि उक्त अधिनियम असंवैधानिक तथा शून्य घोषित कर दिया गया है। किसी भी न्यायालय में कोई वाद या अन्य विधिक कार्यवाही न तो चलाई जाएगी और न चालू रखी जाएगी; और
(ख) कोई भी न्यायालय सन् 1952 के अधिनियम के अधीन वसूल किए गए किसी किराये या नुकसानी या खर्चों की वापसी का केवल इस आधार पर कि उक्त अधिनियम असंवैधानिक तथा शून्य घोषित कर दिया गया है निदेश देने वाली किसी डिक्री या आदेश को प्रवर्तित नहीं करेगा।
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