The Chhattisgarh Lok Parisar (Bedakhli) Adhiniya, 1974
The Chhattisgarh Lok Parisar (Bedakhli) Adhiniya, 1974
0. Preamble
म.प्र. लोक परिसि (बȯदखली) अधिनियम, 1974 विषय-स ू ची
1. सȲक्षिप्त िाम, विस्ताि तथा प्रािȲभ
(1) इस अधिननयम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदȯश लोक परिसि (बȯदखली) अधिनियम, 1974 हȰ । (2) इसका विस्तार सम्पूणा मध्यप्रदȯश पर हȰ ।
2. परिभाषाएȱ
िारा 11 19 तथा 20 कȪ, जȪ कक ततकाल प्रिृतत हȪिी, छȪड कर यह - - (एक) महाकȫशल िȯत्र मɅ 12 लसतम्बर, शुǾ 1952 कȪ और (दȪ) राज् य कȯ अतय िȯत्रों मɅ 9 जनिरी, सन् 1959 कȪ, प्रिृतत हुआ समझा जाएना ।
3. सिम प्राधिकािी की नियुक्तत
राज्य सरकार राजपत्र मɅ अधिसूचना द्िारा - - (क) ककसी ऐसȯ व्यक्तत कȪ, जȪ सहायक कलȯतटर या डडप्टी कलȯतटर कȯ पद सȯ अननम्न पद का अधिकारी हȪ इस अधिननयम कȯ प्रयȪजनों कȯ ललए सिम प्राधिकारी कȯ Ǿप मɅ ननयुतत कर सकȯ िी; और (ख) इस अधिननयम द्िारा या उसकȯ अिीन सिम अधिकारी कȪ प्रदतत की िई शक्ततयों का प्रयȪि या उस पर अधिरȪवपत ककए िए कतताव्यों का पालन सिम प्राधिकारी द्िारा क्जन स्थानीय सीमाओं कȯ भीतर तथा लȪक पररसर कȯ क्जन प्रििों कȯ संबंि सȯ ककया जाएिा उन स्थानीय सीमाओं कȯ या लȪक पररसर कȯ उन प्रििों कȪ पररननक्चचत कर सकȯ िी ।
4. परिसि बȯदखली कȯ आदȯश कȯ विǽद्ध कारण दशािȯ कȯ ललए सूचिा का जािी ककया जािा
(1) यदद सिम प्राधिकारी की यह राय हȪ कक कȪई व्यक्तत ककसी लȪक पररसर पर अप्राधिकृत अधिभȪि रखȯ हुए हȰ और यह कक उतहɅ बȯदखल ककया जाना चादहए, तȪ सिम प्राधिकारी एक ललखखत सूचना जारी करȯिा क्जसमɅ समस्त संबंधित व्यक्ततयों सȯ यह अपȯिा की जाएिी कक िȯ विननददाष्ट्ट तारीख कȪ इस बात का कारण दलशात करɅ कक बȯदखली का आदȯश तयों न ककया जाए । (2) उपिारा (1) कȯ अिीन जारी की िई सूचना मɅ - - (क) िȯ आिार विननददाष्ट्ट ककए जाएंिȯ, क्जन पर बȯदखली का आदȯश ककए जानȯ का प्रस्ताि ककया िया हȪ, और (ख) समस्त संबंधित व्यक्ततयों सȯ अथात् उन समस्त व्यक्ततयों सȯ, जȪ लȪक पररसर पर अधिभȪि रखȯ हुए हैं या क्जनकȯ संबंि मɅ यह संभािना हȪ कक िȯ लȪक पररसर पर अधिभȪि रखȯ हुए हैं, या जȪ उसमɅ दहत रखनȯ का दािा करतȯ हैं यह अपȯिा की जािȯिी कक िȯ - - (एक) प्रस्तावित आदȯश कȯ विǽƨ कारण यदद कȪई हȪ, सूचना मȯ यथा विननददाष्ट्ट तारीख, जȪ सूचना कȯ जारी ककए जानȯ की तारीख कȯ बाद दस ददन सȯ पूिािती तारीख नहीं हȪिी, कȪ या उसकȯ पूिा दलशात करɅ; और (दȪ) दलशात ककए जानȯ िालȯ कारण कȯ समथान मȯ समस्त साक्ष्य विननददाष्ट्ट तारीख कȪ पȯश करɅ । (3) सिम प्राधिकारी उतत सूचना की तामील उसȯ लȪक पररसर कȯ बाहरी दरिाजȯ पर या उसकȯ ककसी अतय सहजदृचय भाि पर लिाकर तथा ऐसी अतय रीनत मɅ भी प्रकालशत जाएिी, जȰसी कक विदहत की जाए, और तदुपरर सूचना कȯ संबंि मɅ यह समझा जाएिा कक उसकी तामील समस्त संबंधित व्यक्ततयों पर सम्यक् Ǿप सȯ कर दी िई हȰ । (4) जहाँ सिम प्राधिकारी यह जानता हȰ या उसकȯ पास यह विचिास करनȯ का कारण हȰ कक कȪई व्यक्तत लȪक पररसर पर अधिभȪि रखȯ हुए हȰ, तȪ उपिारा (3) कȯ उपबतिों पर प्रनतकूल प्रभाि डालȯ बबना, िह उस सूचना की एक प्रनत की तामील ऐसȯ प्रतयȯक व्यक्तत पर डाक द्िारा या उस व्यक्तत कȪ पररदतत करकȯ या ननविदतत करकȯ या ऐसी अतय रीनत मɅ, जȰसी कक विदहत की जाए, करिाएिा ।
5. अप्राधिकृत अधिभोधियों की बȯदखली
(1) िारा 4 की उपिारा (1) कȯ अिीन जारी की िई सूचना मɅ विननददाष्ट्ट तारीख कȪ सिम प्राधिकारी ऐसा समस्त साक्ष्य लȯिा जȪ कक दलशात ककए जानȯ िालȯ कारण कȯ समथान मȯ पȯश ककया जाए । यदद दलशात ककए िए कारण, यदद कȪई हों, पर और ककसी साध्य पर, जȪ पȯश ककया जाए, विचार करनȯ कȯ पचचात् तथा लȪक पररसर कȯ अलभकधथत अप्राधिकृत अधिभȪि कȯ बारȯ मɅ संबंधित व्यक्तत कȯ सुनिाई का युक्ततयुतत अिसर दȯनȯ कȯ पचचात् सिम प्राधिकारी का यह समािान हȪ जाता हȰ कक लȪक पररसर अप्राधिकृत अधिभȪि मɅ हȰ, तȪ सिम प्राधिकारी बȯदखली का आदȯश, उसमɅ अलभललखखत ककए जानȯ िालȯ कारणों सȯ कर सकȯ िा क्जसमɅ यह ननददाष्ट्ट ककया जाएिा कक िह लȪक पररसर उन समस्त व्यक्ततयों द्िारा, जȪ उस लȪक पररसर पर अथिा उसकȯ ककसी भाि पर अधिभȪि रखȯ हुए हैं, ऐसी तारीख कȪ, जȪ उस आदȯश मɅ विननददाष्ट्ट की जाए, खाली कर ददया जाए और िह उस आदȯश की एक प्रनत लȪक पररसर कȯ बाहरी दरिाजȯ पर या उनकȯ ककसी अतय सहजदृचय भाि पर लििाएिा । (2) ऐसȯ व्यक्तत द्िारा, क्जसकȯ विǽƨ उपिारा (1) कȯ अिीन आदȯश पाररत ककया िया हȪ, आिȯदन ककया जानȯ पर, सिम प्राधिकारी उस पररसर कȪ खाली करनȯ कȯ ललए ऐसा समय, जȰसा कक िह ठीक समझȯ, ऐसी शतो कȯ साथ मंजूर कर सकȯ िा क्जतहɅ अधिरȪवपत करना िह उधचत समझȯ । (3) यदद कȪई अतय व्यक्तत बȯदखली कȯ आदȯश का - - (एक) उपिारा (1) मɅ विननददाष्ट्ट तारीख कȯ पूिा, या (दȪ) जहाँ उपिारा (2) कȯ अिीन समय मंजूर ककया िया हȪ, िहाँ ऐसȯ मंजूर ककए िए समय कȯ भीतर, अनुपालन करनȯ सȯ इंकार करता हȰ या उसका अनुपालन नहीं करता हȰ, तȪ सिम प्राधिकारी या कȪई अतय अधिकारी, जȪ सिम प्राधिकारी द्िारा इस संबंि मɅ सम्यक् Ǿप सȯ प्राधिकृत ककया िया हȪ, उस व्यक्तत कȪ लȪक पररसर सȯ बȯदखल कर सकȯ िा और उसका कब्जा लȯ सकȯ िा, तथा उस प्रयȪजन कȯ ललए ऐसȯ बल का प्रयȪि कर सकȯ िा जȰसा कक आिचयक हȪ ।
6. अप्राधिकृत अधिभोधियों द्िािा लोक परिसिों पि छोड़ी िई सȲपक्तत का व्ययि
(1) जहाँ कȪई व्यक्तत ककतहीं लȪक पररसर सȯ िारा 5 कȯ अिीन बȯदखल ककए िए हों, िहाँ सिम प्राधिकारी, उन व्यक्ततयों कȪ, क्जनसȯ कक लȪक पररसरों का कब्जा ललया िया हȰ, चȫदह ददन की सूचना दȯनȯ कȯ पचचात् तथा उस सूचना कȪ कम सȯ कम एक ऐसȯ समाचार-पत्र मɅ, क्जसका कक िह पररिȯत्र मɅ पररचालन हȪ, प्रकालशत करनȯ कȯ पचचात् ऐसȯ पररसरों मɄ बच रही ककसी सम्पक्तत कȪ हटा सकȯ िा या हटिा सकȯ िा या लȪक नीलाम द्िारा उसका व्ययन कर सकȯ िा । (2) जहाँ कȪई सम्पक्तत उपिारा (1) कȯ अिीन बȯच दी िई हȪ, िहाँ उसकȯ विक्रय आिम का, उसमɅ सȯ विक्रय व्ययों की तथा उस रकम की, यदद कȪई हȪ, जȪ कक ककरायȯ कȯ बकाया या नुकसानी या खचों कȯ मƨȯ राज्य सरकार कȪ या ननिलमत प्राधिकारी कȪ शȪध्य हȪ, कटȫती करनȯ कȯ पचचात्, ऐसȯ व्यक्तत या व्यक्ततयों कȪ भुितान कर ददया जाएिा जȪ कक सिम प्राधिकारी कȪ उसȯ प्राप्त करनȯ कȯ हकदार प्रतीत हȪतȯ हों : परततु जहाँ सिम प्राधिकारी इस बारȯ मɅ कक ककस-ककस व्यक्तत या ककन व्यक्ततयों कȪ उस रकम का बाकी भाि दȯय हȰ अथिा इस बारȯ मɅ उसका प्रभारण ककस प्रकार ककया जाए विननचचय करनȯ मɅ असमथा हȪ, िहाँ िह ऐसा वििाद सिम अधिकाररता िालȯ लसविल तयायालय कȪ ननदेलशत कर सकȯ िा और उस पर उस तयायालय का विननचचय अक्ततम हȪिा ।
7. लोक परिसिों कȯ बाबत् ककिायȯ या िुकसािी का भुिताि अपȯक्षित कििȯ की शक्तत
(1) जहाँ ककसी व्यक्तत पर ककतहीं लȪक पररसरों का दȯय ककराया बकाया हȪ, िहाँ सिम प्राधिकारी, आदȯश द्िारा, उस व्यक्तत सȯ यह अपȯिा कर सकȯ िा कक िह उसका भुितान ऐसȯ समय कȯ भीतर तथा ऐसी ककचतों मɅ कर दȯ जȰसȯ कक उस आदȯश मɅ विननददाष्ट्ट हȪ । (2) जहाँ कȪई व्यक्तत ककतहीं लȪक पररसरों पर अप्राधिकृत अधिभȪि रखȯ हुए हȪ या ककसी भी समय उन पर अप्राधिकृत अधिभȪि रखȯ हȪ, िहाँ सिम प्राधिकारी, नुकसानी कȯ ननिारण कȯ ऐसȯ लसƨाततों कȯ, जȰसȯ कक विदहत ककए जाएाँ, ध्यान मɅ रखतȯ हुए ऐसȯ पररसरों कȯ उपयȪि तथा अधिभȪि मƧȯ नुकसानी का ननिारण कर सकȯ िा और आदȯश द्िारा उस व्यक्तत सȯ यह अपȯिा कर सकȯ िा कक िह ऐसȯ समय कȯ भीतर तथा ऐसी ककचतों मɅ, जȰसा कक उस आदȯश मɅ विननददाष्ट्ट हȪ, नुकसानी का भुितांन कर दȯ । (3) उपिारा (1) या उपिारा (2) कȯ अिीन कȪई भी आदȯश ककसी भी व्यक्तत कȯ विǽƨ तब तक नहीं ककया जाएिा जब तक कक उस व्यक्तत कȪ एक ललखखत सूचना उससȯ, ऐसȯ समयं कȯ भीतर जȰसा कक सूचना मɅ विननददाष्ट्ट हȪ, इस संबंि मɅ कारण दशानȯ की कक ऐसा आदȯश तयों न ककया जाए, अपȯिा करतȯ हुए जारी न कर दी िई हȪ और जब तक कक उसकी उन आपक्ततयों पर, यदद कȪई हȪ, तथा ककसी ऐसȯ साध्य पर, क्जसȯ कक िह उनकȯ समथान मɅ पȯश करȯ, सिम प्राधिकारी द्िारा विचार न कर ललया िया हȪ ।
8. सिम प्राधिकािी की शक्ततयाȲ
इस अधिननयम कȯ अिीन कȪई िाद करनȯ कȯ ललए सिम प्रधिकारी कȪ ननम् नललखखत बातों कȯ संबंि मɅ िही शक्ततयाँ होंिȯ, जȪ कक ककसी िाद का विचारण करतȯ समय लसविल प्रकक्रया संदहता, 1908 (क्रमांक 5 सन् 1908) कȯ अिीन ककसी लसविल तयायालय मɅ ननदहत हȪती हȰ, अथात् : - (क) ककसी व्यक्तत कȪ समन करना तथा उसकȪ हाक्जर कराना और समय पर उसकी परीिा करना, (ख) दस्तािȯजों कȯ प्रकटीकरण तथा पȯश ककए जानȯ कȯ ललए अपȯिा करना, (ि) कȪई अतय विषय जȪ कक विदहत ककया जाए ।
9. अपील
(1) राज्य सरकार, अलभसूचना द्िारा, ऐसȯ िȯत्रों कȯ संबंि मɅ जȪ अधिसूचना मɅ विननददाष्ट्ट ककए जाएाँ, ककसी ऐसȯ व्यक्तत कȪ, जȪ कलȯतटर कȯ पद सȯ अननम्न पद का अधिकारी हȪ, इस अधिननयम कȯ प्रयȪजन कȯ ललए अपील प्राधिकारी कȯ Ǿप मɅ ननयुतत कर सकȯ िी । (2) सिम प्राधिकारी कȯ प्रतयȯक ऐसȯ आदȯश की, जȪ ककसी लȪक पररसर कȯ संबंि मɅ िारा 5 या 7 कȯ अिीन ककया िया हȪ, अपील उपिारा (1) कȯ अिीन ननयुतत ककए िए अपील प्राधिकारी कȪ हȪिी । (3) उपिारा (1) कȯ अिीन अपील - - (क) िारा 5 कȯ अिीन ककसी आदȯश की अपील की दशा मɅ उस िारा की उपिारा (1) कȯ अिीन आदȯश कȯ प्रकाशन की तारीख सȯ पतरह ददन कȯ भीतर हȪिी; और (ख) िारा 7 कȯ अिीन ककसी आदȯश की अपील की दशा मɅ उस तारीख सȯ, क्जसकȪ िह आदȯश अपीलाथी कȪ संसूधचत ककया जाए, पतरह ददन कȯ भीतर हȪिी : परततु यदद अपील प्राधिकारी का यह समािान हȪ जाए कक आिȯदक समय पर अपील फाइल करनȯ सȯ पयाप्त हȯतुक सȯ ननिाररत हȪ िया था, तȪ िह अपील कȪ पतरह ददन की उतत कालािधि कȯ अिसान कȯ पचचात् भी ग्रहण कर सकȯ िा । (4) जहाँ सिम प्राधिकारी कȯ ककसी आदȯश की अपील की जाए, िहाँ अपील प्राधिकारी उस आदȯश कȯ प्रितान कȪ इतनी कुल कालािधि तक कȯ ललए, जȪ साठ ददन सȯ अधिक की नहीं हȪिी, तथा ऐसी शतो पर, जȰसी कक िह उधचत समझȯ, रȪक सकȯ िा। (5) इस िारा कȯ अिीन प्रतयȯक अपील, अपील प्राधिकारी द्िारा यथासम्भि शीघ्रता कȯ साथ ननपटाई जाएिी । (6) इस िारा कȯ अिीन ककसी अपील कȯ खचे अपील प्राधिकारी कȯ वििȯकािीन हȪिȯ ।
10. आदȯशों की अक्न्तमता
इस अधिननयम मȯ अलभव्यतत Ǿ प सȯ अतयथा उपबंधित कȯ ललखाय, सिम प्राधिकारी या अपील प्राधिकारी द्िारा इस अधिननयम कȯ अिीन ककया िया प्रतयȯक आदȯश अक्ततम हȪिा और उसȯ ककसी मूल िाद, आिȯदन या ननष्ट्कासन कायािाही मɅ प्रचनित नहीं ककया जाएिा तथा इस अधिननयम द्िारा या उसकȯ अिीन प्रदतत की िई ककसी शक्तत कȯ अनुसरण मɅ की िई या की जानȯ िाली ककसी कायािाही कȯ संबंि मɅ ककसी तयायालय या अतय प्राधिकाररयȪ द्िारा कȪई आदȯश नहीं ददया जाएिा ।
11. अपिाि तथा शाक्तत
(1) यदद व्यक्तत, जȪ इस अधिननयम कȯ अिीन ककतहीं लȪक पररसरों सȯ बȯदखल कर ददया िया हȪ, उन पररसरों पर पुन: अधिभȪि रखनȯ कȯ प्राधिकार कȯ बबना उन पर पुन: अधिभȪि रखȯिा, तȪ िह कारािास सȯ क्जसकी अिधि एक िषा तक की हȪ सकȯ िी, या जुमानȯ सȯ, जȪ एक हजार ǽपयȯ तक का हȪ सकȯ िा, या दȪनों सȯ दंडनीय हȪिा । (2) ककसी व्यक्तत कȪ उपिारा (1) कȯ अिीन लसƨदȪष ठहरानȯ िाला कȪई मक्जस्रȯट उस
12. जानकारी अभिप्राप्त करने की शक्ति
यदि सक्षम प्राधिकारी के पास यह विश्वास करने का कारण हो कि कोई व्यक्ति किन्हीं लोक परिसरों पर अप्राधिकृत अधिभोग रखते हुए हो, तो सक्षम प्राधिकारी या उसके द्वारा इस संबंध में प्राधिकृत किया गया कोई अन्य अधिकारी ऐसे व्यक्ति से या किन्हीं अन्य व्यक्तियों से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वे उन लोक परिसरों पर अधिभोग रखने वाले व्यक्तियों के नामों तथा अन्य विशिष्टियों से संबंधित जानकारी दे दें और इस प्रकार अपेक्षित किया गया प्रत्येक व्यक्ति ऐसी जानकारी देने के लिए आबद्ध होगा जो कि उसके कब्जे में हो।
13. वारिसों तथा विधिक प्रतिनिधियों का दायित्व
(1) जहाँ कोई व्यक्ति जिसके कि विरुद्ध किराये का बकाया अवधारित करने के लिए नुकसानी का निर्धारण करने के लिए कोई कार्यवाही की जानी हो या की जा चुकी हो, कार्यवाही की जाने के पूर्व या उसके लंबित रहने के दौरान मर जाए, वहाँ वह कार्यवाही उस व्यक्ति के वारिसों या विधिक प्रतिनिधियों के विरुद्ध की जा सकेगी या यथास्थिति चालू रखी जा सकेगी।
(2) कोई भी ऐसी रकम, जो चाहे किराये के बकाया के रूप में या नुकसानी या खर्चों के रूप में किसी व्यक्ति द्वारा राज्य सरकार को या निर्मित प्राधिकारी को शोध्य हो, उस व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात् उसके वारिसों या विधिक प्रतिनिधियों द्वारा देय होगी, किन्तु उनका दायित्व मृतक की उन आस्तियों के परिणाम तक ही सीमित होगा जो कि उनके हाथ में हो।
14. किराये आदि की भू-राजस्व के बकाया के रूप में वसूली
यदि कोई व्यक्ति धारा 7 की उपधारा (1) के अधीन देय किराये के बकाया का या उस धारा की उपधारा (2) के अधीन देय नुकसानी का या धारा 9 की उपधारा (5) के अधीन राज्य सरकार या निर्मित प्राधिकारी को दिलाए गए खर्चों का या ऐसे किराये नुकसानी या खर्चों के किसी भाग का भुगतान उससे संबंधित आदेश में उसके लिए विनिर्दिष्ट किए गए समय यदि कोई हो के भीतर करने से इंकार करे या उसका भुगतान उस तरह न करे, तो सक्षम अधिकारी शोध्य रकम के लिए कलेक्टर को एक प्रमाण-पत्र जारी कर सकेगा जो उसे भू-राजस्व के बकाया के रूप में वसूल करने के लिए कार्यवाही करेगा।
15. अधिकारिता का वर्जन
किसी भी न्यायालय को यह अधिकारिता नहीं होगी कि वह किसी ऐसे व्यक्ति की, जो किन्हीं लोक परिसरों पर अप्राधिकृत अधिभोग रखे हुए हो बेदखली के संबंध में या धारा 7 की उपधारा (1) के अधीन देय किराये के बकाया की या उस धारा की उपधारा (2) के अधीन देय नुकसानी की या धारा 9 की उपधारा (5) के अधीन राज्य सरकार या निर्मित प्राधिकारी को दिलाए गए खर्जों की या ऐसे किराये, नुकसानी या खर्चों के किसी भाग की वसूली के संबंध में कोई वाद या कार्यवाही ग्रहण करे।
16. सद्भावपूर्वक की गई कार्यवाही का संरक्षण
राज्य सरकार या निर्मित प्राधिकारी या अपील प्राधिकारी या सक्षम प्राधिकारी के या किसी ऐसे अधिकारी के, जो इस अधिनियम के अधीन अधिकारी द्वारा प्राधिकृत हो, के विरुद्ध, किसी भी ऐसी बात के संबंध में, जो इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किन्हीं भी नियमों या किए गए किन्हीं भी आदेशों के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई हो या जिसका कि इस प्रकार सद्भावपूर्वक किया जाना आशयित रहा हो, कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही नहीं होगी।
17. शक्तियों का प्रत्यायोजन
राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा प्रयोक्तव्य कोई भी शक्ति ऐसी शर्तों, यदि कोई हों, जैसी कि अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, के अध्यधीन रहते हुए राज्य सरकार के किसी अधिकारी द्वारा भी प्रयोक्तव्य होगी।
18. नियम बनाने की शक्ति
(1) राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी।
(2) विशिष्टतया तथा पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित समस्त विषयों या उनमें से किसी विषय के लिए उपबंध हो सकें, अर्थात् :-
(क) किसी भी ऐसी सूचना का प्रारूप जिसका कि इस अधिनियम के अधीन दिया जाना अपेक्षित या प्राधिकृत किया गया हो, तथा वह रीति जिसमें कि उसकी तामील की जा सकेगी; (ख) इस अधिनियम के अधीन जांचों का किया जाना; (ग) सक्षम प्राधिकारियों को कार्य का वितरण तथा बंटवारा, किसी सक्षम प्राधिकारी के समक्ष लंबित किसी कार्यवाही को अन्य सक्षम प्राधिकारी को हस्तांतरित करने; (घ) लोक परिसरों का कब्जा लेने के संबंध में अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया; (ङ) वह रीति जिसमें प्राधिकृत अधिभोग के लिए नुकसानी का निर्धारण किया जा सकेगा और वे सिद्धांत जो कि ऐसी नुकसानी का निर्धारण करते समय ध्यान में रखे जा सकें; (च) वह रीति जिसमें अपीलें की जा सकेंगी तथा वह प्रक्रिया जो कि अपीलों में अपील प्राधिकारी द्वारा अनुसरित की जाएगी; (छ) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना हो या विहित किया जाए।
(3) इस अधिनियम के अधीन बनाए गए समस्त नियम विधान सभा के पटल पर रखे जाएंगे।
19. निरसन
मध्यप्रदेश गवर्नमेंट प्रमाइसिस (इविक्शन) एक्ट 1952 (क्रमांक 16 सन् 1952) एतद्वारा निरस्त किया जाता है।
20. विधिमान्यकरण
किसी न्यायालय के किसी निर्णय, डिक्री या आदेश के होते हुए भी, किसी ऐसी बात या कार्यवाही (जिसमें बनाए गए नियम या किए गए आदेश, जारी की गई सूचनाएं आदिष्ट या की गई बेदखली, निर्धारित की गई नुकसानी, वसूल किए गए किराये या नुकसानी या खर्चे, शुरू की गई कार्यवाहियां सम्मिलित हैं) के संबंध में जो मध्यप्रदेश गवर्नमेंट प्रमाइसिस इविक्शन) एक्ट, 1952 (क्रमांक 16 सन् 1952) (जो इसमें इसके पश्चात् सन् 1952 के अधिनियम के नाम से निर्दिष्ट है) के अधीन की गई हो या जिसका कि उस तरह किया जा सकता तात्पर्यत रहा हो, यह समझा जाएगा कि वह इस तरह विधिमान्य तथा प्रभावी है मानो कि ऐसी बात या कार्यवाही इस अधिनियम के जो कि धारा 1 की उपधारा (3) के अधीन महाकौशल क्षेत्र में 12 सितम्बर, 1952 को तथा अन्य क्षेत्रों में 1 जनवरी, 1959 को प्रवृत हुआ समझा जाएगा तत स्थानी उपबंधों के अधीन की गई थी और तद्नुसार :-
(क) सन् 1952 के अधिनियम के अधीन वसूल किए गए किसी किराये या नुकसानी या खर्चों की वापसी के लिए, उस दशा में जबकि ऐसी वापसी का दावा केवल इस आधार पर किया गया हो कि उक्त अधिनियम असंवैधानिक तथा शून्य घोषित कर दिया गया है। किसी भी न्यायालय में कोई वाद या अन्य विधिक कार्यवाही न तो चलाई जाएगी और न चालू रखी जाएगी; और
(ख) कोई भी न्यायालय सन् 1952 के अधिनियम के अधीन वसूल किए गए किसी किराये या नुकसानी या खर्चों की वापसी का केवल इस आधार पर कि उक्त अधिनियम असंवैधानिक तथा शून्य घोषित कर दिया गया है निदेश देने वाली किसी डिक्री या आदेश को प्रवर्तित नहीं करेगा।
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