Bare Act
The MP Dakaiti &
0. Preamble
मध्य प्रदेश डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम, 1981 [क्रमाांक 36 सि ् 1981]
विषय-स ू ची अध्याय -एक प्रारम्भभक
1. सांक्षक्षप्त िाम तथा विस्तार
(1) इम अधिनियम का सक्षक्षस िाम मध्य प्रदेश डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत अधिनियय, 1981 है । (2) इसका विस्तार सभपूणि मध्य प्रदेश पर है ।
2. पररभाषाएां
इस अधिनियम में, जब तक सन्दभि से अन्यथा अपेक्षक्षत ि हो— (क) “सांर्हता'' से अलभप्रेत है दण्ड प्रक्रकया सांर्हता, 1973 (1974 का स० 2); (ि) क्रकसी डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र के सभबन्ि में ''डाकू'' से अलभप्रेत है कोई ऐसा व्यम्तत जो कोई ऐसा अपराि, जो भारतीय दण्ड सांर्हता, 1860 (1860 का सां० 45) की िारा 395 के अिीि दण्डिीय है, या कोई विनिर्दिष्ट अपराि करता है या म्जसिे कोई ऐसा अपराि क्रकया है या यथाम्स्थनत कोई ऐसा व्यम्तत म्जस पर क्रकसी ऐसे अपराि के क्रकये जािे का अलभयोग िगाया गया है; ‘‘डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्ि’‘ से अलभप्रेत है कोई ऐसा क्षेत्र म्जसे िारा 3 के अिीि डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र घोवषत क्रकया गया है; (ग-ग) “व्यपहरण” के अन्तगित अपहरण आता है,; (घ) ‘‘विशेष न्यायािय” से अलभप्रेत है िारा 6 के अिीि गर्ठत विशेष न्यायािय; (ड.) ''विशेष न्यायािीश” से अलभप्रेत है क्रकसी विशेष न्यायािय की अध्यक्षता करिे क लिये िारा 6 की उपिारा (2) के अिीि नियुतत क्रकया गया कोई न्यायािीश; (च) “विनिर्दिष्ट अपराि” से अलभप्रेत है-- (एक) अिुसूची में विनिर्दिष्ट कोई अपराि जो िारा 3 के अिीि घोवषत क्षेब क सभबन्ि में क्रकया गया हो जो डकैती या व्यपहरण क्रकये जािे का भागरूप हो या उससे उद् भूत होता हो या उससे सांसतत हो; (दो) कोई ऐसा अपराि म्जसके लिये इस अधिनियम की िारा 9, 11 और 12 के अिीि दण्ड का उपबन्ि क्रकया गया है; (तीि) भारतीय दण्ड सांर्हता, 1860 (180 का सां. 45) की िारा 212, 216 21 क, 311 347 392 393 394,395,396,397,398,399,402 तथा 412 के अिीि दण्डिीय कोई अपराि जो िारा 3 अिीि घोवषत क्रकये गये क्रकसी क्षेत्र के सभबन्ि में सन्दभि में क्रकया गया हो; और उसके अन्तगित उपिण्ड (एक), (दो) और (तीि) में विनिर्दिष्ट अपरािों में से क्रकसी अपराि का दुष्प्रेरण या ऐसे क्रकसी अपराि के क्रकये जािे का प्रयत्ि आता है; (छ) उि शब्दों तथा अलभव्यम्ततयों के, जो इस अधिनियम में प्रयोग में िाई गई है क्रकन्तु पररभावषत िहीां की गई है और जो सांर्हता में पररभावषत की गई है, िही अथि होंगे जो उिके लिए सांर्हता में या यथाम्स्थनत भारतीय दण्ड सांर्हता, 1860 (1860 का सां० 45) में र्दये गये हैं ।
3. डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र की घोषणा
यर्द, क्रकसी म्जिे या म्जिों में या उसके क्रकसी भाग या भागों में विनिर्दिष्ट अपरािों की घटिाओां को ध्याि में रिते हुये, या उिके सभबन्ि में पुलिस अधिकारी की ररपोटि या कोई अन्य जािकारी प्राप्त होिे पर, राज्य सरकार यह समझती है क्रक ऐसी पररम्स्थनत उत्पन्ि हो गई है क्रक म्जसमें उस क्षेत्र की, जो ऐसे म्जिे या म्जिों या उिके किसी भाग या भागों के अन्तगित आता है इस अधिनियम के प्रयोजिों के लिये डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र घोवषत क्रकया जाय, तो राज्य सरकार, अधिसूचिा व्दारा, उस म्जिे या उि म्जिों को या उसके क्रकसी भाग या भागों को, जो उस अरर सूचिा में विनिर्दिष्ट क्रकये गये हों ' डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र'' घोवषत कर सकेगी ।
4. प
(1) क्रकसी ऐसे व्यम्तत को, जो क्रकसी विनिर्दिष्ट अपराि के क्रकये जािे के बारे में जािकारी देकर पुलिस की सहायता करता है या जो क्रकसी विनिर्दिष्ट अपराि के क्रकये जािे के बारे में जािकारी देिे या उसके अन्बेषण में पुलिस की सहायता करिे के लिये िगाया जाता है, इस अधिनियम के प्रयोजिों के लिये, भारतीय दण्ड सांर्हता ( 180 का सां० 45) की िारा 21 के अथि के अन्तगित िोक सेिक समझा जायेगा । (2) पुलिस अिीक्षक का इस प्रभाि का प्रमाण-पत्र क्रक उसमें िखणित व्यम्तत ऐसा व्यम्तत है जो उपिारा (1) में विनिर्दिष्ट प्रयोजिों के लिये पुलिस की सहायता करता है, या पुलिस से सहायता करिे के लिये िगाया गया है, उि तथ्यों का निश्चायक साक्ष्य होगा जो उसमें कधथत क्रकये गये है ।
5. जमाित मन्ज
(1) सांर्हता में अन्तविष्ट क्रकसी के होते हुए भी कोई भी न्यायािय क्रकसी डाकू के बारे में धगरपतारी पूि जमाित (एन्टीलसपेटरी) लिये कोई आिेदि ग्रहण िहीां करेगा । (2) सांर्हता में अन्तविष्ट क्रकसी बात के होते हुए भी, क्रकसी डकैत की जमाित के लिये कोई आिेदि उस दशा में मांजूर िहीां क्रकया जायेगा जबक्रक! [.....] उसका विरोि क्रकया गया हैं: परन्तु कोई भी न्यायािय या मम्जस्रेट, क्रकसी ऐसे व्यम्तत का, म्जस पर विनिर्दिष्ट अपराि का अलभयोग िगाया गया है, अन्िेषण के दौराि अलभरक्षा में निरोि एक सौ बीस र्दिों से अधिक की कािािधि के लिये प्राधिकृत िहीां करेगा और ऐसी कािािधि की समाम्प्त पर, उस दशा में जबक्रक सांर्हता की िारा 173 की उपिारा (3) के अिीि पुलिस ररपोटि फाइि ि की गई हो अलभयुतत को, यर्द िह जमाित देिे के लिये तैयार है और जमाित दे देता है; तत्काि छोड़ र्दया जायेगा ।
6. विशेष न्यायाियों का गठि
(1) क्रकसी डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र में क्रकये गये विनिर्दिष्ट अपरािों के शीघ्र विचारण के लिये उपबन्ि करिे के प्रयोजिों के लिये, राज्य सरकार उच्च न्यायािय से परामशि करके, इतिे विशेष न्यायाियों का गठि कर सकेगी म्जतिे क्रक ऐसे डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र या क्षेत्रों में या उसके/उिके सभबन्ि में आिश्यक हो और जो अधिसूचिा में विनिर्दिष्ट क्रकये जायें । (1-क) जहाँ क्रकसी डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र या क्षेत्रों के लिये दो या अधिक विशेष न्यायािय गर्ठत क्रकये गये हों, िहाँ राज्य सरकार, उच्च न्यायािय से परामशि करके, सािारण या विशेष आदेश व्दारा, उिके बीच कायि वितरण का, म्जसके अन्तगित प्रनत- प्रेषण की शम्तत आती है विनियमि कर सकेगा । (2) विशेष न्यायािय एकि न्यायािीश से गर्ठत होगा जो, राज्य सरकार व्दारा अिुरोि क्रकया जािे पर, उच्च न्यायाियों व्दारा नियुतत क्रकया जायेगा । स्पष्टीकरण - इस उपिारा में, शब्द 'नियुतत' का िही अथि होगा जो क्रक उसे सांर्हता की िारा 9 के स्पष्टीकरण में र्दया गया है । (3) कोई व्यम्तत विशेष न्यायािय के न्यायािीश के रूप में नियुतत क्रकये जािे के लिये तब अर्हत िहीां होगा जब तक क्रक िह सांर्हता के अिीि सेिारत सेशि न्यायािीश या अपर सेशि न्यायािीश ि हो । (4) क्रकसी विशेष न्यायािीश के छुट टी पर होिे के कारण उसके अिुपम्स्थत रहिे अथिा रूगणता के कारण या अन्य कारण से अपिे किव्यों का अिुपािि करिे से नििाररत हो जािे की दशा में, सेशि िण्ड में के अपर सेशि न्यायािीशों में से कोई भी एक अपर सेशि न्यायािीश, म्जसे सेशि न्यायािीश व्दारा इस निलमित निर्दिष्ट क्रकया जाय, उस समय तक जब तक क्रक ऐसा विशेष न्यायािीश अपिे किव्यों को पूिग्रिहीत ि कर िे, उस आपवि मामिों को निपटायेगा जो विशेष न्यायािीश के समक्ष आएाँ और इस प्रयोजिों के लिये, इस प्रकार निर्दिष्ट क्रकये गये अपर सेशि न्यायािीश को, इस अधिनियम में अन्तविष्ट क्रकसी बात के ही, विशेष न्यायािीश समझा जािेगा ।
7. विशेष न्यायाियों की अधिकाररता
(1) सांर्हता या तत्समय प्रिृि अन्य विधि में अन्तविष्ट क्रकसी बात के होते हुए भी कोई विनिर्दिष्ट अपराि का विचारण केिि विशेष न्याया- िय व्दारा विचारणीय होगा । (2) क्रकसी विनिर्दिष्ट अपराि का विचारण करिे में, कोई विशेष न्यायािय विनिर्दिष्ट अपराि से लभन्ि क्रकसी ऐसे अपराि का भी विचारण कर सकेगा म्जस अपराि से उस डाकू को उसी विचारण में, सर्हता के अिीि अरोवपत क्रकया जाये, बशते िह अपराि विनिर्दिष्ट अपराि से सभबम्न्ित हो ।
8. विशेष न्यायाियों की प्रक्रक्रया और शम्ततयााँ
(1) बबशेष न्यायािय क्रकसी विनिर्दष्ट अपराि का सांज्ञाि,– (क) क्रकसी ऐसे पररिाद के, म्जससे ऐसा अपराि बिता हो, प्राप्त होिे पर; या (ि) ऐसे तथ्यों की बाबत पुलिस ररपोटि पर; या (ग) पुलिस अधिकारी से लभन्ि क्रकसी व्यम्तत से प्राप्त ऐसे इवििा पर या अपिी स्ियां की ऐसी जािकारी पर की ऐसा अपराि क्रकया गया है; कर सकेगा । (2) विशेष न्यायािय, क्रकसी विनिर्दिष्ट अपराि का विचारण करिे में, उसी प्रक्रक्रया का अिुसरण करेगा जो सेशि मामिों के विचारण के लिये सांर्हता व्दारा उपबम्न्ित की गई है: परन्तु विशेष न्यायािय, जहाँ कहीां भी आिश्यक हो, सांर्हता की िारा 207 के अिीि मम्जस्रेट के कृत्यों का पािि करेगा, और मामिे का विचारण करिे के लिये इम प्रकार अग्रसर होगा मािो क्रक िह मामिा सांर्हता के उपबन्िों के अिीि सेशि न्यायािय को विचारण के लिये सुपुदि क्रकया गया हो । (3) इस अधिनियम में अलभव्यतत रूप से जैसा उपबम्न्ित है, उसके लसिाय, साक्ष्य अधिनियम 1872 (1872 का सां.1) और सांर्हता के उपबन्ि, जहाँ तक क्रक िे इस अधिनियम के उपबन्िों से असांगत ि हों, विशेष न्यायािय के समक्ष कई कायििार्हयों को िागू होंगे, और सांर्हता के उतत उपबन्िों के प्रयोजिों के लिये विशेष न्यायािय को सेशि न्यायािय समझा जायगा और विशेष न्यायिय के समक्ष अलभयोजि का सांचािि करेिे िािे व्यम्तत को िोक अलभयोजक समझा जायेगा । (4) विशेष न्यायािय, क्रकसी ऐसे व्यम्तत का, म्जसके सभबन्ि में यह सांदेह हो क्रक िह क्रकसी विनिर्दिष्ट अपराि से प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत: सभबम्न्ित रहा है या उसमें सांसधगित रहा है, साक्ष्य आलभप्राप्त करिे की दृम्ष्ट से, ऐसे व्यम्तत को इस शति पर क्षमा प्रदाि कर सकेगा क्रक िह उस अपराि के तथा प्रत्येक ऐसे अन्य व्यम्तत के, जो उस अपराि के क्रकये जािे में चाहे कताि के रूप में या दुष्प्रेरक के रूप मे सभपृतत हो, सभबन्ि में उि समस्त पररम्स्थनतयों का, जो उसकी जािकार में हों, पूणि और सत्य प्रकट ि कर दे, और इस. प्रकार प्रदाि की गई क्रकसी क्षमा के सभबन्ि में, सर्हता की िारा 308 के प्रयोजिों के लिये, यह समझा जायगा क्रक बह उसकी िारा 307 के अिीि प्रदाि की गई है । (5) विशेष न्यायािय, उसके व्दारा लसद्िदोष ठहराये गये क्रकसी अलभयुतत व्यम्तत पर कोई ऐसा दण्डादेश पाररत कर सकेगा जो उस अपराि के, म्जसके लिये ऐसे व्यम्तत को लसद्िदोष ठहराया गया है, दण्ड के लिये विधि व्दारा प्राधिकृत है ।
9. िोक सेिक के विरुद्ि अपरािों के लिये दण्ड
कोई डाकू, जो एक से अधिक व्यम्ततयो की हत्या करता है, या क्रकसी िोक सेिक के शरीर [या सभपवि] के विरुद्ि या उसके कुटुभब के क्रकसी सदस्य के शरीर सर सभपवि के विरुद्ि कोई विनिर्दिष्ट अपराि करता है, िह; (क) यर्द ऐसा अपराि भारतीय दण्ड सांर्हता (1860 का सां. 45) के अिीि मृत्यु दण् ड या आजीिि कारािास से दण्डिीय है, उसी दण्ड से दांडडत क्रकया जायगा जो उस अपराि के लिये भारतीय दण्ड सांर्हता (1860 का 45) में उपबम्न्िि है; (ि) अन्य मामिों में कारािास से, जो दस िषि तक का हो सकेगा, और जुमाििे से दम्ण्डत क्रकया जायेगा । स्पष्टीकरण - इस िारा और िारा 10 के प्रयोजिों के लिये, क्रकसी िोक सेिक के कुटुभब के सदस्य से अलभप्रेत है, उसके माता-वपता, उसकी पत्िी या उसका पनत, उसके पुत्र तथा पुबत्रया,पौत्र तथा पौबत्रया और प्रपौत्र तथा प्रपौबत्रया और उिके पनत या उिकी पम्त्ियों और उसके अन्तगित कोई ऐसा व्यम्तत भी आयेगा जो उस पर आधश्रत हो और उसके साथ नििास करता हो ।
10. म
सांर्हता की िारा 354 की उपिारा (3) में अन्तविष्ट क्रकसी बात के होते हुये भी, जब दोषलसद्धि एक से अधिक व्यम्ततयों की हत्या या क्रकसी िोक सेिक की या उसके कुटुभब के क्रकसी सदस्य की हत्या के लिये हो और जहां मृत्यु का दांडादेश िहीां र्दया जाता है, िहाँ निणिय में िे विशेष कारण कधथत क्रकये जायेंगे म्जिके आिार पर मृत्यु का दांडादेश िहीां र्दया गया है ।
11. विनिर्दिष्ट अपरािों के लिये सािारणत: दण् ड
कोई डाकू, जो कोई विनिर्दिष्ट अपराि करेगा िह, यर्द उस कायि के लिये भारतीय दांड सांर्हता (1860 का 45) में कोई विनिर्दिष्ट दांड उपबम्न्ित िहीां है और यर्द िह कायि िारा 9 के अिीि भी दांडिीय िहीां है, कारािास से, जो दस िषि तक का हो सकेगा, और जुमाििे से दम्ण्डत क्रकया जायेगा ।
12. ऐसी सभपवि को म्जसके बारे में समािाि कारक रूप में िेिा-जोिा ि र्दया जा सकता हो,
कोई ऐसा व्यम्तत, जो क्रकसी डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र में रहता है और उस क्षेत्र में या अन्यत्र ऐसी सभपवि अपिे कब्जे में रिता है म्जसके लिए िह समािािकारक रूप में िेिा-जोिा िहीां दे सकता है अपराि का दोषी होगा और कारािास से, जो सात िषि का हो सकेगा, और जुमाििे से दम्ण्डत क्रकया जायेगा : परन्तु यर्द और जब विशेष न्यायािय व्दारा िारा 17 के अिीि निमुिम्तत का आदेश पाररत क्रकया जाता है, तो अलभयुतत को, चाहे विचारण का प्रक्रम कुछ भी हो, उन्मोधचत कर र्दया जायगा और यर्द िह अलभरक्षा में है तो उसे तत्काि छोड़ र्दया जायगा और उसकी दोष- लसद्ि यर्र कोई हो, के सभबन्ि में यह समझा जायगा क्रक बह उसकी अम्स्तत्ि में िहीां है ।
13. कारािास की न्य
िारा 11 और 12 में या तत्समय प्रिृि क्रकमी अन्य विधि में अन्तविष्ट क्रकसी बात के होते हुये भी, क्रकसी विनिर्दिष्ट अपराि के लिये जो न्यूितम दण्ड र्दया जायगा िह तीि िषि का कारािास होगा ।
14. सभपवि की क
(1) यर्द म्जिा मम्जस्रेट के पास िह समझिे का कारण हो क्रक क्रकसी डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र में रहिे िािा कोई व्यम्तत उस क्षेत्र में-या अन्यत्र ऐसी सभपवि िारण करता है या यह क्रक डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र के बाहर रहिे िािा कोई व्यम्तत डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र में ऐसी सभपवि िारण करता है, म्जसके बारे में िह समािािकर रूप में िेिा-जोिा िहीां दे सकता है, तो िह उस प्रभाि की घोषणा कर सकेगा और उतत सभपवि की कुकी का आदेश दे सकेगा । (2) उपिारा (1) के अिीि सभपवि की कुकी कर िी जािे पर सांर्हता के उपबन्ि उसे िागू होंगे । (3) सांर्हता के उपबन्िों के होते हुये भी, म्जिा मम्जस्रेट, प्रनतभू के बदिे, एक प्रशासक नियुतत कर सकेगा म्जसे उस सभपवि का प्रशासि करिे के लिये ऐसी समस्त शम्ततयां होगी म्जन्हें िह सभपवि के सिोिम र्हत में उधचत समझे । (4) म्जिा मम्जस् रेट, सभपवि के उधचत और प्रभािी प्रशासि के हेतु, प्रशासक के लिये पुलिस सहायता की व्यिस्था कर सकेगा । (5) सभपवि के प्रशासि पर उपगत व्यय, म्जिके अन्तगित पुलिस सहायता पर उपगत व्यय भी आते हैं. सभपवि पर भार होंगे ।
15. सभपनत की निम
(1) सभपवि के िारा 14 के अिीि कुकि कर लिए जािे पर, उसका स्िामी, कुकी की जािकारी की तारीि से तीि मास के भीतर, म्जिा मम्जस् रेट को अभ्यािेदि कर सकेगा म्जसमें िे पररम्स्थनियां तथा सािि, म्जिमें म्जिके व्दारा िह सभपवि उसके व्दारा अम्जित की गई थी, दलशित क्रकए जायेंगे । (2) यर्द म्जिा मम्जस्रेट का अभ्यािेदि से समािाि हो जाता है, तो िह उस सभपवि को कुकी से तत्काि निमुतत कर सकेगा, और तदुपरर िह सभपवि तथा अन्त: कािीि िाभ उस सभपवि पर भाररत समस्त व्ययों की कटौती कर िी जािे के पश्चात् उस सभपवि के स्िामी में निर्हत हो जायेंगे ।
16. सभपवि के अजिि के स्िरूप के बारे में विशेष न्यायाियों व्दारा जााँच
(1) यर्द म्जिा मम्जस्रेट की िारा 15 की उपिारा (1) के अिीि क्रकये गए अभ्यािेदि से समािाि िहीां होता तो िह उस मामिे को, अपिी ररपोटि के साथ उस विशेष न्यायािय के पास, जो आधिकाररता रिता हो, यह विनिश्चय करिे के लिये भेजेगा क्रक तया िह सभपवि या उसका कोई भाग कोई विनिर्दिष्ट अपराि करके अम्जित क्रकया गया था या िहीां । (2) विशेष न्यायािय को, उपिारा (1) के अिीि उसे निर्दिष्ट क्रकये गये क्रकसी मामिे का विनिश्चय करते समय, लसविि न्यायािय की िे समस्त शम्ततयाँ होंगी जो लसविि प्रक्रक्रया सांर्हता, 1908 (1908 का सां० 5) के अिीि क्रकसी िाद का विचारण करते समस लसविि न्यायािय को होती है । (3) इस िारा के अिीि क्रकन्हीां कायििार्हयों में, यह साबबत करिे का भार क्रक अभ्या- बेदि में िखणित
17. विशेष न्यायािय का विनिश्चय और पररणाम
यर्द विशेष न्यायािय, इस निष्कषि पर पहुाँचता है क्रक सभपवि का अजिि विनिर्दिष्ट अपराि करके क्रकया गया था, तो िह उतत सभपवि के अधिहरण का आदेश करेगा और अलभिेिों को, अपिे आदेश के निष्पा- दि के लिये, म्जिा मम्जस्रेट के पास भेजेगा, और क्रकसी अन्य दशा में, उस सांपवि को तत्काि निमुतत कर र्दये जािे का आदेश क्रकया जायेगा ।
18. अपीि
विशेष न्यायािय के प्रत्येक ऐसे विनिश्चय के, जो िारा 17 के अिीि क्रकया गया हो, विरुद्ि अपीि उच्च न्यायािय को होगी ।
19. अधिकाररता का िजिि
इस अधिनियम के अिीि पाररत कोई आदेश या क्रकया गया कोई विनिश्चय, उसमें यथा उप-बम्स्ित के लसिाय, अपीििीय िहीां होगा, और क्रकसी भी लसविि न्यायािय को क्रकसी भी ऐसे मामिे के सभबन्घ में कोई अधिकाररता िहीां होगी म्जसे अििाररत करिे के लिये विशेष न्यायािय इस अधिनियम व्दारा या उसके अिीि सशतत है, और क्रकसी न्यायािय या अन्य प्राधिकारी व्दारा, सभपवि की कुकी या अधिहरण में हस्तक्षेप करिे िािा कोई आदेश या अन्तिती आदेश, इस अध्याय व्दारा या उसके अिीि प्रदि क्रकसी शम्तत के अिुसरण में की गई या की जािे िािी क्रकसी कायििाई के सभबन्ि में िहीां र्दया जयेगा ।
20. सद् भािप
(1) राज्य सरकार या राज्य सरकार के क्रकसी अधिकारी के विरुद्ि, क्रकसी भी ऐसी बात के सभबन्ि में जो इस अधिनियम या उसके अिीि बिाये गये नियमों के अिुसरण में सद् भाि पूिक की गई हो या म्जसका उसके अिीि सदभािपूिक क्रकया जािा आशनयत रहा हो, कोई िाद अलभयोजि या अन्य विधिक कायििाही िहीां होगी । (2) िारा 14 की उपिारा (3) के अिीि नियुतत क्रकए गए क्रकसी प्रशासक के विरुद्ि कोई िाद या अलभयोजि तब तक सांम्स्थत िहीां क्रकया जायेगा जब तक क्रक उसके लिये म्जिा मम्जस्रेट की पूि मांजूरी अलभप्रास ि कर िी गई हो ।
21. अधिनियम का अध्यारोही प्रभाि
इस अधिनियम के उपबन्ि प्रभािी होंगे, भिे ही तत्समय प्रिृि क्रकसी विधि में उिसे असांगत कोई बात अन्तविष्ट तयों ि हो ।
22. नियम बिािे की शम्तत
(1) राज्य सरकार इस अधिनियम के उपबन्िों को कायािम्न्ित करिे के लिए नियम, अधिसूचिा व्दारा बिा सकेगी । (2) इस िारा के अिीि बिाये गये समस्त नियम वििाि सभा के पटि पर रिे जायेंगे ।
23. निरसि
मध्य प्रदेश डकैती-प्रभावित क्षेत्र आध्यादेश, 1981 (क्रमांक 5 सि् 1981) एतदव्दारा निरस्त क्रकया जाता है ।
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