Bare Act
The Madhya Pradesh Prevention of Damage to Public and Private Property and Recovery of Damage Act, 2021
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ
१. (१) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश लोक एवं निजी संपत्ति को नुकसान का निवारण एवं नुकसानी की वसूली अधिनियम, २०२१ है.
(२) इसका विस्तार संपूर्ण मध्यप्रदेश राज्य पर होगा.
(३) यह मध्यप्रदेश राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होगा.
2. परिभाषाएं
२. इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,—
(क) "दावा आयुक्त" से अभिप्रेत है, धारा ५ की उपधारा (२) के अधीन इस प्रकार नियुक्त कोई व्यक्ति;
(ख) "दावा अधिकरण" से अभिप्रेत है, धारा ४ के अधीन गठित कोई दावा अधिकरण;
(ग) "नुकसान पहुंचाने वाला कार्य" से अभिप्रेत है, किसी व्यक्ति अथवा व्यक्तियों के समूह, जो कि उक्त जमाव के भाग थे, द्वारा सांप्रदायिक दंगा, हड़ताल, बंद, प्रदर्शन, जुलूस, यातायात का घेराव या कोई ऐसा जमाव जो किसी भी नाम से जाना जाता हो, के कारण किसी संपत्ति को कोई हानि या नुकसान पहुंचाने का कोई कार्य;
(घ) "रिष्टि" का वही अर्थ है, जैसा कि भारतीय दण्ड संहिता (१८६० का ४५) की धारा ४२५ में उसे समनुदेशित किया गया है;
(ङ) "संपत्ति" से अभिप्रेत है, किसी व्यक्ति, जिसमें सम्मिलित हैं,—
(एक) केन्द्र सरकार; या
(दो) राज्य सरकार; या
(तीन) कोई स्थानीय प्राधिकरण; या
(चार) मध्यप्रदेश सहकारी सोसाइटी अधिनियम, १९६० (क्रमांक १७ सन् १९६१) के अधीन रजिस्ट्रीकृत या रजिस्ट्रीकृत समझी गई कोई सहकारी सोसाइटी; या
(पांच) कोई कम्पनी; या
(छह) किसी केन्द्रीय अथवा राज्य अधिनियम के अधीन गठित कोई कानूनी निकाय; या
(सात) कोई संस्था या उपक्रम;
के स्वामित्व की, अथवा कब्जे में की या उसके नियंत्रण में की कोई जंगम या स्थावर संपत्ति.
3. दावा याचिका प्रस्तूत करना
३. (१) जहां सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान कारित किया गया है, वहां जिला मजिस्ट्रेट या सार्वजनिक संपत्ति का भारसाधक अधिकारी उस तारीख से ३० दिवस के भीतर, जिसको कि दावा अधिकरण गठित किया गया है, दावा अधिकरण के समक्ष, प्रतिकर अधिनिर्णीत करने के लिए ऐसी रीति में जैसी कि विहित की जाए, दावा याचिका प्रस्तुत करेगा.
(२) जहां निजी संपत्ति को नुकसान कारित किया गया है, वहां वह व्यक्ति जो उक्त क्षतिग्रस्त संपत्ति का स्वामी है या उसके कब्जे में थी या उसके नियंत्रणाधीन थी, उस तारीख से ३० दिवस के भीतर, जिसको कि दावा अधिकरण गठित किया गया है, दावा अधिकरण के समक्ष प्रतिकर अधिनिर्णीत करने के लिए अपनी दावा याचिका, ऐसी रीति में, जैसी कि विहित की जाए, प्रस्तुत कर सकेगा.
4. दावा अधिकरण का गठन
४. (१) राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, संपत्ति को नुकसान के संबंध में, प्रतिकर हेतु दावों के न्यायनिर्णयन के प्रयोजन के लिए, ऐसी कालावधि तथा ऐसे क्षेत्र के लिए, जैसी कि अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए तथा इस अधिनियम के अधीन सौंपे गए कृत्यों के निर्वहन हेतु, एक या अधिक दावा अधिकरण गठित करेगी.
(२) दावा अधिकरण एक या अधिक सदस्यों से मिलकर गठित होगा जैसा कि राज्य सरकार नियुक्त करना उचित समझे और जहां इसके दो या अधिक सदस्य हों, वहां उनमें से एक को उसके अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया जाएगा.
(३) कोई व्यक्ति दावा अधिकरण में नियुक्त होने के लिए तब तक अर्हित नहीं होगा, जब तक कि वह,—
(क) सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश, जिसने जिला न्यायाधीश के रूप में ५ वर्ष या अधिक की सेवा न की हो; या
(ख) अधिकारी जिसने राज्य सरकार के सचिव से अनिम्न श्रेणी का पद धारण न किया हो या समकक्ष अधिकारी.
(४) जहां किसी क्षेत्र के लिए दो या अधिक दावा अधिकरण गठित किए गए हैं, वहां राज्य सरकार सामान्य या विशेष आदेश द्वारा उनके बीच कारबार का वितरण अवधारित कर सकेगी.
5. दावा अधिकरण के कर्तव्य
५. (१) दावा अधिकरण का यह कर्तव्य होगा कि संपत्ति को कारित नुकसान अवधारित करे तथा उसका उचित प्रतिकर अधिनिर्णीत करे.
(२) दावा अधिकरण, यदि वह ठीक समझे, जांच करने में उसकी सहायता के लिए, कोई दावा आयुक्त को ऐसी रीति में जैसी कि विहित की जाए, नियुक्त कर सकेगा.
(३) दावा अधिकरण, ऐसी प्रक्रिया का पालन करेगा, जैसी कि विहित की जाए.
6. अपनाई जाने वाली प्रक्रिया
६. (१) दावा अधिकरण प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत तथा इस अधिनियम तथा उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों का अनुपालन करेगा. दावा अधिकरण को अपनी कार्यवाहीयों को विनियमित करने जिसमें स्थान और अपनी बैठकों का समय नियत करना सम्मिलित है, की शक्ति होगी.
(२) दावा अधिकरण प्रत्येक दावा आवेदन का, ऐसा आवेदन प्रस्तुत किए जाने की तारीख से यथा संभव तीन मास के भीतर विनिश्चय करेगा.
(३) इस अधिनियम के अधीन दावा अधिकरण की कार्यवाहीयां यथासंभव दिन प्रतिदिन के आधार पर अपने निष्कर्ष तक जारी रहेंगी.
7. सिविल न्यायालय की शक्ति
७. दावा अधिकरण को सिविल प्रक्रिया संहिता, १९०८ (१९०८ का ५) के अधीन समन करने, शपथ पर साक्ष्य लेने के प्रयोजन हेतु, साक्षियों की हाजिरी को सुनिश्चित करने, दस्तावेजों तथा सारवान वस्तुओं के प्रकटीकरण तथा पेश कराने हेतु बाध्य करने और ऐसे अन्य प्रयोजन के लिए जैसा कि विहित किया जाए, सिविल न्यायालय की समस्त शक्तियां होंगी और दावा अधिकरण दण्ड प्रक्रिया संहिता, १९७३ (१९७४ का २) की धारा १९५ और अध्याय XXVI के समस्त प्रयोजनों के लिए सिविल न्यायालय समझा जाएगा.
8. दावा याचिका प्रस्तुत करने हेतु समय-सीमा और शुल्क
८. प्रतिकर के लिए प्रत्येक दावा याचिका दावा अधिकरण के गठन से ३० दिवस के भीतर प्रस्तुत की जाएगी, जब तक कि विस्तार के कारण लिखित में कथित न किए जाएं और दावा अधिकरण द्वारा अनुमति न दी जाए.
9. दावा याचिका में अंतर्विष्ट होगा
९. दावा याचिका प्रस्तुत करने वाला व्यक्ति उन व्यक्तियों को, जिन्होंने उसकी जानकारी में अधिनियम के अधीन नुकसान पहुंचाने वाले कार्य का उद्दापन किया है, उकसाया है या कारित किया है, प्रत्यर्थी के रूप में सम्मिलित कर सकेगा.
10. दावा अधिकरण के समक्ष उपस्थिति
१०. दावा अधिकरण मामले की सुनवाई के दौरान किसी पक्षकार को किसी विधि व्यवसायी के माध्यम से उपस्थित होने हेतु अनुज्ञात कर सकेगा.
11. दावा अधिकरण द्वारा आदेश
११. (१) दावा अधिकरण आदेश पारित करते समय, विरचित विवाद्यक के लिए निष्कर्ष और ऐसे निष्कर्ष के लिए कारणों को अभिलिखित करेगा और भुगतान किए जाने वाले प्रतिकर की राशि को विनिर्दिष्ट करते हुए अधिनिर्णय तैयार करेगा और ऐसा प्रतिकर उन व्यक्तियों द्वारा, संयुक्त रूप से अथवा अलग-अलग देय होगा, जिन्होंने धारा २ के खण्ड (ग) में उल्लिखित समूह में नुकसान पहुंचाने वाले कार्य का उद्दापन किया है, उकसाया है या कारित किया है :
परन्तु राज्य सरकार प्रतिकर की राशि को अवधारित करने के लिए नियम विहित कर सकेगी :
परन्तु यह और कि दावा अधिकरण ऐसे कारणों से जो अभिलिखित किए जाएं, अधिनिर्णय कर सकेगा, जिसमें संदत्त किए जाने योग्य प्रतिकर दुगना तक हो.
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