The Chhattisgarh Adim Jan Jatiyon Ka Sanrakshan (Vrakshon me Hit) Adhiniyam, 1999
The Chhattisgarh Adim Jan Jatiyon Ka Sanrakshan (Vrakshon me Hit) Adhiniyam, 1999
0. Preamble
भाग चार : खण् ड एक मध् य ूदेश, आिदम जनजाितयों का संरक्षण (वृक्षों में िहत) अिधिनयम 1999 (िदनांक 21 अूैल, 1999 को राज् यपाल की अनुमित ूाप् त ह ु ई, अनुमित ''मध् यूदेश राजपऽ असाधारण'' में िदनांक 24 अूैल, 1999 को ूथम बार ूकािशत की गई। आिदम जनजाितयों को शोषण से बचाने की दृिष्ट से, उसके खातों पर खड़े ह ु ए वृक्षों में उनके िहतों का संरक्षण करने से संबंिधत िविध को समेिकत तथा संशोिधत करने और अन् य िविधयों तथा क्षेऽ में की पिरवितर्त पिरिःथितयों में सामन् जः य ः थािपत करने के िलए िविध बनाने हेतु अिधिनयम। भारत के गणराज् य के उनचासवें वषर् में मध् यूदेश िवधान-मंडल द्वारा िनम् निलिखत रूप से यह अिधिनयिमत हो :
1. संिक्षप् त नाम, िवः तार तथा ूारम् भ
- (1) इस अिधिनयम का संिक्षप् त नाम 'मध् यूदेश आिदम जनजाितयों का संरक्षण (वृक्षों में िहत) अिधिनयम, 1999' है।
- (2) यह ऐसी तारीख को ूवृत् त होगा िजसे राज् य सरकार, अिधसूचना द्वारा, िनयत करें।
- (3) इसका िवः तार सम् पूणर् मध् यूदेश पर है।
2. पिरभाषाएँ - इस अिधिनयम में, जब तक संदभर् से अन् यथा अपेिक्षत न हो,
(क) ''आिदम जनजाित'' से अिभूेत है
वे जनजाितयाँ जो राज् य सरकार द्वारा मध् यूदेश भू-राजः व संिहता, 1959 (बमांक 20 सन ् 1959) की धारा 65 की उपधारा (6) के अधीन आिदम जनजाित के रूप में घोिषत की गई हों और उसके अन् तगर्त भारत के संिवधान के अनुच् छेद 342 के अधीन
् 1959);
(ग) ''कलेक् टर'' से अिभूेत
है संबंिधत िजले का कलेक् टर तथा उसके अन् तगर्त ऐसे िजले का अपर कलेक् टर भी आता है िजसे राज् य सरकार द्वारा अिधसूचना द्वारा, इस अिधिनयम के अधीन कलेक् टर की शिक्तयों का ूयोग करने तथा कृत् यों का पालन करने के िलए िवशेष रूप से सशक् त िकया गया हो;
(घ) ''खाता'' से अिभूेत है भूिम का ट
ु कड़ा िजसका भू-राजः व के िलए पृथक ् से िनधार्रण िकया गया है तथा जो िकसी आिदम जनजाित के भूिमः वामी द्वारा धािरत है;
(ङ) ''िविनिदर्ं ट वृक्ष'' से अिभूेत है अनुसूची में िविनिदर्ं ट वृक्षों की ूजाितयाँ;
(च) अिभव् यिक्त ''भूिमः वामी'' का वही अथर् होगा जो उसके िलये संिहता में िदया गया है।
3. आिदम जनजाित के भूिमः
वामी हम के उसके खाते पर खड़े िविनिदर्ं ट वृक्षों में िहत का संरक्षण -
- (1) ऐसा भूिम ः वामी, जो आिदम जनजाित का हो, के खाते पर खड़े ह ु ए िविनिदर्ं ट जाित के कोई भी वृक्ष इसमें इसके पँ चात ् उपबंिधत के िसवाय काटे नहीं जायेंगे, उनका पिरतक्षण नहीं िकया जाएगा या
- (2) इस अिधिनयम के ूारम् भ होने के पँ चात ् या उसके पूवर् आिदम जनजाित के वतर्मान भूिम ः वामी द्वारा या उसके पूवर्वतीर् द्वारा, उसके खाते म ें के िविनिदर्ं ट वृक्षों की लकड़ी के िवबय के िलए की गई कोई संिवदा, चाहे वह कैसी भी हो, शून् य होगी, िजसमें उसकी उस भूिम, िजस पर ऐसे वृक्ष खड़े ह ु ए हों, सिहत या उसके िबना की, दोनों ही संिवदाएँ सिम्मिलत हैं। _________________________________________________________________________________________
1. म. ू. राजपऽ (असाधारण) िदनांक 24.4.99 पृं ठ 565-566 पर ूकािशत।
4. िविनिदर्ं ट वृक्षों को काटने की अनुज्ञा
- (1) आिदम जनजाित का कोई भूिम ः वामी, जो अपने खाते पर खड़े ह ु ए िकसी िविनिदर्ं ट वृक्ष को काटने का आशय रखता है, कलेक् टर को, िविहत ूारूप में, उसके िलये पूरे और संपूणर् कारणों को देते ह ु ए, ऐसी रीित में, जैसी िक िविहत की जाए, अनुज्ञा के िलए आवेदन करेगा।
- (2) कलेक् टर, ऐसे िनयमों के अनुसार जो िविहत िकए जाएँ, आवेदन की जाँच करवाएगा उस क्षेऽ पर अिधकािरता रखने वाले तहसीलदार, उपखण् ड अिधकारी (राजः व) तथा ूभागीय अिधकारी की िरपोटर् पर िवचार िकए िबना, आवेदन को मंजूर या नामंजूर नही ं करेगा : परन् तु ऐसी कोई अनुज्ञा, उस दशा में, उत्तरािधकारी के िसवाय, मंजूर नहीं की जाएगी जहाँ िकसी भी रीित में, हक के अजर्न की तारीख के पँ चात ् , पांच वषर् की कालाविध व् यतीत नहीं हो गई हो। ः पं टीकरण - संिहता के अधीन हक के अजर्न की तारीख नामांतरण के ूमाणीकरण की तारीख होंगी।
- (3) िकसी एक वषर् में, वृक्ष काटने की अनुज्ञा िविनिदर्ं ट वृक्षों, की उतनी संख् या तक ही सीिमत होगी िजससे भूिमः वामी, धन के रूप में ऐसी रकम ूाप् त कर सके जो िकसी एक वषर् में पचास हजार रुपये से अिधक न हो या जैसा िक कलेक् टर द्वारा आवेदन में िविनिदर्ं ट िकए गए ूयोजन को पूरा करने के िलए पयार्प् त समझा जाए : परन् तु िवशेष पिरिःथितयों के अधीन कलेक् टर, सम् यक ् िवचार करने के पँ चात ् िकसी एक वषर् में एक लाख रुपये से अनिधक मूल् य या एक वृक्ष के िलए इनमें से जो भी उच् चतर हो अनुज्ञा दे सकेगा।
5. वृक्ष
काटना, तथा िविनिदर्ं ट वृक्षों का िवबय मूल् यांकन
- (1) ऐसे िविनिदर्ं ट वृक्षों का, िजनका काटा जाना अनुज्ञात िकया गया है, मूल् यांकन ूभागीय वन अिधकारी द्वारा, ऐसी रीित में जैसी िक िविहत की जाये, तैयार की गई िरपोटर् पर आधािरत होगा।
- (2) कलेक् टर, धारा 4 के अधीन ूदत् त अनुज्ञा की एक ूित ूभागीय वन अिधकारी को पृं ठांिकत करेगा। जो वृक्षों की कटाई करने, थप् पी लगाने, उनके पिरवहन तथा िवबय के िलये उत् तरदायी होगा, और उनका ूितफल भूिमः वामी तथा कलेक् टर के संयुक् त खाते में िविहत रीित में िवूेिषत करेगा।
6. भूिमः वामी को ूितफल का भुगतान -
- (1) भूिमः वामी को देय ूितफल की रकम रां शीकृत बैंक की िकसी शाखा में या िजले के केन् िीय सहकारी बैंक में, कलेक् टर तथा भूिमः वामी के संयुक् त खाते में िनिक्षप् त की जाएगी, िजसका ूचालन उनके दोनों के द्वारा संयुक् त रूप से िकया जाएगा।
- (2) कलेक् टर, संयुक् त खाते में आहरण करने में यह सु िनिश्चत करते ह ु ए सवार्िधक सावधानी तथा सतकर्ता बरतेगा िक आहरण भूिमः वामी के सवोर्त् तम िहत में और उसकी वाः तिवक तथा असली आवँ यकता को पूरा करने के ूयोजन के िलये ही िकया जाए।
7. ूिबया - धारा 9 के अधीन की कायर्वािहयों स
े िभन् न इस अिधिनयम के अधीन कायर्वािहयों के संबंध में यह समझा जायेगा िक समः त ूयोजन के िलये वह संिहता के अधीन कायर्वािहयाँ है और संिहता में अिधकिथत ूिबया का अनुसरण िकया जाएगा।
8. अपील, पुनरीक्षण, पुनिवर्लोकन - अपील,
पुनरीक्षण तथा पुनिवर्लोकन के उपबंध, जैसे िक वे संिहता में िविहत िकए गए हैं, कलेक् टर द्वारा इस अिधिनयम के अधीन पािरत िकए गए िकसी आदेश को भी लागू होंगे।
9. उल् लंघन के िलये दंड -
- (1) इस अिधिनयम या उसके अधीन बनाए गए िनयमों व उपबंधों के उल् लंघन में कोई व् यिक्त जो आिदम जनजाितयों के खातों में खड़े ह ु ए िविनिदर्ं ट िकन् हीं वृक्षों को काटता है, उनका पिरतक्षण करता है, उनमें कांट-छांट करता है या उनको अन् यथा नुकसान पहँचाता है या उनके िकसी भाग को हटाता है तो दो षिसिद्ध होने पर ऐसे कठोर कारावास का जो तीन वषर् तक का हो सकेगा और ऐसे जुमार्ने का, जो दस हजार रुपये तक का हो सकेगा, दायी होगा।
- (2) उपधारा (1) के अधीन कारर्वाई करने का आधार गिठत करने वाले िकन् हीं िविनिदर्ं ट वृक्षों की लकड़ी का अिभमहण कर िलया जायेगा और वह राज् य सरकार को राजसात हो जाएगी। परन् तु यिद भूिमः वामी के ूित कोई षड़यंऽ, कपट और छल िकया जाता है तो इस ूकार राजसात लकड़ी के िवबय आगम उस आपरािधक मामले के िनपटारे के पँ चात ् कलेक् टर के आदेश के अधीन पचास हजार रुपये की अिधकतम सीमा के अध् यधीन रहते ह ु ए पचास ूितशत तक की सीमा तक भूिमः वामी को िदये जायेंगे।
- (3) कोई सरकारी सेवक या कोई अन् य व् यिक्त, जो इस अिधिनयम या उसके अधीन बनाए गए िनयमों के िकन् हीं उपबंधों के उल् लंघन में असद्भावनापूवर्क आशय से कायर् करता हैं या सम् यक ् सावधानी के िबना िनयमों में यथा उपबंिधत कोई आदेश पािरत करता है या कोई अः तय िरपोटर् ूः तुत करता है, िविध के अिभव् यक् त उपबंधों का उल् लंघन करता है, तो वह दो षिसिद्ध पर ऐसे कठोर कारावास से जो तीन वषर् तक का हो सकेगा और ऐसे जुमार्ने से जो दस हजार रुपये तक का हो सकेगा, दण् डनीय होगा।
- (4) उपधारा (3) के अधीन कायर्वािहयों या दंड पर ूितकूल ूभाव डाले िबना, उक् त सरकारी सेवक, उसको लागू सेवा िनयमों के अधीन अनुशासिनक कारर्वाई के िलये भी दाियत् वाधीन होगा।
10. अपराध संज्ञ
ेय होंगे - धारा 9 के अधीन समः त अपराध संज्ञेय होंगे।
11. िनयम बनाने की शिक्त -
- (1) राज् य सरकार, इस अिधिनयम के उपबंधों को कायार्िन्वत करने के िलये, अिधसूचना द्वारा, िनयम बना सकेगी।
- (2) इस अिधिनयम के अधीन बनाए गए समः त िनयम िवधानसभा के पटल पर रखे जायेंगे।
12. िनरसन तथा व् याÁित्त - मध् यूदेश ूोटेक् शन ऑफ एबओिरिजनल शायब् स (इन् शेः ट इन शीज) एक् ट,
1959 (बमांक 11 सन ् 1956) इस अिधिनयम के ूारम् भ होने से िनरिसत हो जाएगा : परन् तु िनरिसत अिधिनयम या िनयमों के अधीन की गयी कोई कारर्वाई, जारी की गयी कोई अिधसूचना, ूः तुत की गयी कोई िरपोटर् या पािरत िकए गए िकसी आदेश के संबंध में यह समझा जाएगा िक वह इस अिधिनयम के अधीन, यथािःथित, की गई है, ूःतुत की गई है या पािरत की गई/गया है। अनुसूची (धारा 2 (ङ) देिखये) िविनिदर्ं ट जाित के वृक्षों की सूची
खैर (अकोिसया केटेचू)
ू (एडाईना कािडर्फोिलया) 7. मह ु
आ (मधुका इंिडका) 17. आम (मेंजीफेरा-इंिडका)
8. िभरार् (
10. तेन् द ू
(डाययोः पायरस मेलानॉक् सलॉन) 20. अजुर्न (टिमर्नेिलया अजुर्ना)
C O N T E N T S
S e c s .
S c h e d u l e
j u r i s d i c t i o n :
m a n n e r .
t h e m.
r e q u i r e me n t .
c o g n i z a b l e .
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