section 9
Copies of books printed after commencement of Act to be delivered gratis to Government
The Press or Pustak Ragistrikaran Adhiniyam, 1867[Content as per original Act to be inserted] प्रत्येक सम्पूर्ण पुस्तक की मुद्रित प्रतियां, जो इस अधिनियम के प्रवृत्त होने के पश्चात भारत में मुद्रित की जाती है, उनके सभी मानचित्रों, मुद्रणों या अन्य उत्कीर्णों सहित, जो उस पुस्तक की सर्वोत्तम कृतियों की भांति परिरक्षित और रंजित की गई हों, उनके मुद्रक या प्रकाशक के बीच (यदि पुस्तक प्रकाशित की जाए तो) किसी करार के होते हुए भी, मुद्रक द्वारा सरकार को मुफ्त ऐसे स्थान पर तथा ऐसे अधिकारी को, जिसके लिए राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा समय-समय पर निर्देश दे, निम्नलिखित प्रकार से दी जाएंगी, अर्थात:- (क) किसी भी दशा में, उस तारीख के पश्चात एक कलैंडर माह के भीतर, जिसको ऐसी पुस्तक मुद्रणालय से पहली बार बाहर निकाली जाए, ऐसी एक प्रति, और (ण) यदि उस तारीख से एक कलैंडर वर्ष के भीतर राज्य सरकार मुद्रक से ऐसी दो से अधिक अन्य प्रतियां देने की अपेक्षा करती है तो, उस तारीख जिसको राज्य सरकार द्वारा मुद्रक से ऐसी अपेक्षा करने के दिन के पश्चात एक कलैंडर माह के भीतर, ऐसी अन्य एक या दो प्रतियां, जैसा भी राज्य सरकार निर्देश दे, और इस प्रकार दी गई प्रतियां जिल्दबंदी, सिली हुई या पंक्कों से सिली हुई और ऐसे सर्वोत्तम कागज पर होंगी जिस पर उस पुस्तक की प्रतियां मुद्रित की गई हों। प्रकाशक या कोई अन्य व्यक्ति जो मुद्रक को नियोजित करे पूर्वोक्त परिरक्षित तथा रंजित सभी मानचित्रों, मुद्रणों और उत्कीर्णों को जो मुद्रक को पूर्वोक्त अपेक्षाओं को अनुपालन करने के समर्थ बनाने के लिए आवश्यक हों, उक्त माह की समाप्ति के पूर्व उचित समय पर देगा। इस धारा के पूर्वोक्त भाग की कोई भी बात निम्नलिखित को लागू नहीं होगी- (i) किसी पुस्तक का द्वितीय या पश्चातवर्ती संस्करण, जिस संस्करण में पुस्तक के लेयर प्रेस में या मानचित्रों, मुद्रणों या अन्य उत्कीर्णों में कोई परिवर्तन या परिवर्तनों नहीं किए गए हैं, और जिस पुस्तक के प्राय: किसी पूर्ववर्ती संस्करण की प्रति इस अधिनियम के अधीन दी जा चुकी है, या (ii) इस अधिनियम की धारा 5 में अधिकथित नियमों के अनुरूप प्रकाशित कोई समाचारपत्र।
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