Bare Act
The Chhattisgarh Rajya Alpsankhayak Ayog Adhiniyam, 1996
Chapter 1 Chapter 1
1. Short title, extent and commencement
प्रारंभिक
इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1996 है।
- (2) इसका विस्तार संपूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य पर है।
- (3) यह ऐसी तारीख को प्रवृत्त होगा जो राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे।
Chapter 1 Chapter 1
2. Definitions
इस अधिनियम में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, (क) "आयोग" से अभिप्रेत है धारा 3 के अधीन गठित छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग ;
(ख) "सदस्य" से अभिप्रेत है आयोग का सदस्य ; (ग) इस अधिनियम के प्रयोजन के लिये अल्पसंख्यक से अभिप्रेत है केन्द्रीय सरकार द्वारा राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 (1992 का सं. 19) के प्रयोजन के लिए इस रूप में अधिसूचित किया गया समुदाय।
Chapter 2 Chapter 2
3. Constitution of Chhattisgarh Rajya Alpsankhayak Ayog
छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग
- (1) राज्य सरकार एक निकाय का गठन करेगी जो छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग के नाम से ज्ञात होगा, और जो इस अधिनियम के अधीन उसे प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करेगा और उसे समनुदिष्ट कृत्यों का पालन करेगा।
- (2) आयोग एक अध्यक्ष (चेयर पर्सन) और दो सदस्यों से मिलकर बनेगा जिन्हें राज्य सरकार द्वारा विख्यात, योग्य और सत्यनिष्ठ व्यक्तियों में से नामनिर्दिष्ट किया जाएगा : परन्तु अध्यक्ष तथा एक सदस्य अल्पसंख्यक समुदायों में से होंगे।
Chapter 2 Chapter 2
4. Term of office and conditions of service of Chairperson and members
- (1) अध्यक्ष और प्रत्येक सदस्य, उस तारीख से, जिसको कि वह पद ग्रहण करता है, तीन वर्ष की अवधि के लिये पद धारण करेगा।
- (2) अध्यक्ष या सदस्य किसी भी समय स्वहस्ताक्षरित लेख द्वारा राज्य सरकार को संबोधित करते हुए यथास्थिति, अध्यक्ष या सदस्य के पद को त्याग सकेगा।
- (3) राज्य सरकार उपधारा
- (2) में निर्दिष्ट अध्यक्ष या सदस्य के पद से किसी व्यक्ति को हटा देगी, यदि वह व्यक्ति, (क) अनुन्मोचित दिवालिया हो जाता है ; (ख) किसी ऐसे अपराध के लिये, जिसमें राज्य सरकार की राय में नैतिक अधमता अन्तर्वलित है, दोष सिद्ध हो जाता है और कारावास से दंडादिष्ट किया जाता है ; (ग) विकृतचित्त हो जाता है और किसी सक्षम न्यायालय द्वारा ऐसा घोषित किया जाता है ; (घ) कार्य करने से इंकार करता है या कार्य करने में असमर्थ हो जाता है ; (ङ) आयोग से अनुपस्थित रहने की अनुमति अभिप्राप्त किये बिना आयोग के लगातार तीन सम्मेलनों से अनुपस्थित रहता है; या (च) राज्य सरकार की राय में अध्यक्ष या सदस्य के पद का ऐसा दुरुपयोग करता है जिससे उस व्यक्ति का पद पर बना रहना अल्पसंख्यकों के हितों या लोकहित में अपायकर हो गया है : परन्तु इस खण्ड के अधीन कोई व्यक्ति तब तक नहीं हटाया जाएगा जब तक उसे उस मामले में सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर नहीं दिया गया है।
- (4) उपधारा
- (2) के अधीन या अन्यथा होने वाली रिक्ति नये नामनिर्देशन द्वारा भरी जाएगी।
- (5) अध्यक्ष और सदस्यों को संदेय वेतन और भत्ते और उनकी सेवा के अन्य निबंधंन और शर्तें ऐसी होंगी जैसी कि विहित की जाएं।
Chapter 2 Chapter 2
5. Officers and other employees of the Commission
राज्य सरकार आयोग के लिए एक सचिव और ऐसे अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की व्यवस्था करेगी जैसी कि इस अधिनियम के अधीन आयोग के कृत्यों का दक्षतापूर्ण पालन करने के लिये आवश्यक है।
Chapter 2 Chapter 2
6. Payment of salaries and allowances from grants
अध्यक्ष और सदस्यों को संदेय वेतन और भत्ते और प्रशासनिक व्यय, जिसके अंतर्गत अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को संदेय वेतन और भत्ते भी हैं, धारा 10 की उपधारा
- (1) में निर्दिष्ट अनुदानों में से संदत्त किए जाएंगे।
Chapter 2 Chapter 2
7. Vacancies, etc. not to invalidate proceedings of the Commission
आयोग के किसी कार्य या कार्यवाही को आयोग में केवल किसी रिक्ति के होने या उसके गठन में किसी त्रुटि के आधार पर प्रश्नगत नहीं किया जाएगा और न ही वह अविधिमान्य होगा।
Chapter 2 Chapter 2
8. Procedure to be regulated by the Commission
- (1) आयोग का मुख्यालय भोपाल में होगा।
- (2) आयोग स्वयं अपनी प्रक्रिया विनियमित करेगा।
- (3) आयोग के समस्त आदेश और विनिश्चय सचिव द्वारा या सचिव द्वारा इस निमित्त सम्यक् रूप से प्राधिकृत आयोग के किसी अन्य अधिकारी द्वारा अधिप्रमाणित किए जाएंगे।
Chapter 3 Chapter 3
9. Functions of the Commission
आयोग के कृत्य
- (1) आयोग निम्नलिखित समस्त या किन्हीं कृत्यों का पालन करेगा, अर्थात् :, (क) राज्य के अधीन अल्पसंख्यकों के विकास की प्रगति का मूल्यांकन करना ; (ख) संविधान में और संसद तथा राज्य विधान मंडल द्वारा अधिनियमित विधियों में उपबंधित रक्षोपायों के कार्य को मानिटर करना ; (ग) राज्य सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों के हितों की संरक्षा के लिए रक्षोपायों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सिफारिशें करना ; (घ) अल्पसंख्यकों की उनके अधिकारों और रक्षोपायों से वंचित करने के बारे में विनिर्दिष्ट शिकायतों की जांच पड़ताल करना और ऐसे मामलों को राज्य सरकार के नियंत्रणाधीन समुचित प्राधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करना ; (ङ) अल्पसंख्यकों के विरुद्ध किसी विभेद के कारण उत्पन्न होने वाली समस्याओं का अध्ययन करवाना और उनको दूर करने के लिए अध्युपायों की सिफारिश करना ; (च) अल्पसंख्यकों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक विकास से संबंधित विषयों का अध्ययन, अनुसंधान और विश्लेषण करना ; (छ) किसी अल्पसंख्यक समुदाय के संबंध में ऐसे समुचित अध्युपाय का सुझाव देना जो राज्य सरकार द्वारा किए जाने चाहिएं ; (ज) अल्पसंख्यकों से संबंधित किसी विषय पर, और विशिष्टतया उन कठिनाइयों पर, जिनका उन्हें सामना करना पड़ता है राज्य सरकार को नियतकालिक या विशेष रिपोर्ट देना ; और (झ) कोई अन्य विषय जो राज्य सरकार द्वारा उसे निर्दिष्ट किया जाए : परन्तु यदि आयोग द्वारा की गई कोई सिफारिश राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य से संबंधित किसी मामले पर की गई सिफारिश के विरुद्ध है तो उस दशा में राज्य आयोग द्वारा की गई सिफारिश अभिभावी होगी।
- (2) आयोग को उपधारा
- (1) के उपखण्ड (ख) और (घ) में वर्णित कृत्यों में से किसी का पालन करते समय, और विशिष्टतया निम्नलिखित विषयों की बाबत् किसी वाद का विचारण करने वाले सिविल न्यायालय की सभी शक्तियां होंगी, अर्थात् :, (क) राज्य के किसी भी भाग से किसी व्यक्ति को समन करना और हाजिर कराना तथा शपथ पर उसकी परीक्षा करना ; (ख) किसी दस्तावेज को प्रकट और पेश करने की अपेक्षा करना ; (ग) शपथपत्रों पर साक्ष्य ग्रहण करना ; (घ) किसी कार्यालय से किसी लोक अभिलेख या उसकी प्रतिलिपि की अध्यपेक्षा करना ; (ङ)
Chapter 4 Chapter 4
10. Grants by the State Government
वित्त, लेखा और संपरीक्षा
10. राज्य सरकार द्वारा अनुदान.,
- (1) राज्य सरकार, राज्य विधान मंडल द्वारा विधि द्वारा इस निमित्त सम्यक् विनियोग किये जाने के पश्चात्, आयोग को अनुदानों के रूप में उतनी धनराशि का संदाय करेगी जितनी राज्य सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिये उपयोग किए जाने के लिये ठीक समझे।
- (2) आयोग उतनी धनराशि खर्च कर सकेगा जितनी वह इस अधिनियम के अधीन कृत्यों का पालन करने के लिये ठीक समझे और वह धनराशि उपधारा
- (1) में निर्दिष्ट अनुदानों में से संदेय व्यय माना जाएगा।
Chapter 4 Chapter 4
11. Accounts and audit
11. लेखे और संपरीक्षा.,
- (1) आयोग समुचित लेखे और अन्य सुसंगत अभिलेख रखेगा और लेखाओं का वार्षिक विवरण ऐसे प्ररूप में तैयार करेगा जो राज्य सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के महालेखाकार के परामर्श से विहित किया जाए।
- (2) आयोग के लेखाओं की संपरीक्षा महालेखाकार द्वारा ऐसे अंतरालों पर की जाएगी जो उसके द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं और ऐसी संपरीक्षा से संबंधित कोई व्यय आयोग द्वारा महालेखाकार को संदेय होगा।
- (3) महालेखाकार तथा उसके द्वारा इस अधिनियम के अधीन आयोग के लेखाओं की संपरीक्षा के संबंध में नियुक्त किसी व्यक्ति को ऐसी संपरीक्षा के संबंध में वही अधिकार और विशेषाधिकार तथा प्राधिकार होंगे जो साधारणतया महालेखाकार को सरकारी लेखाओं की संपरीक्षा के संबंध में होते हैं और विशिष्टतया बहियों, खातों, संबंधित वाउचरों तथा अन्य दस्तावेजों और कागज-पत्रों को पेश किए जाने की मांग करने और आयोग के किसी भी कार्यालय का निरीक्षण करने का अधिकार होगा।
Chapter 4 Chapter 4
12. Annual report
12. वार्षिक रिपोर्ट., आयोग प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिये अपनी वार्षिक रिपोर्ट, जिसमें पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान उसके क्रियाकलापों का पूर्ण विवरण होगा, ऐसे प्ररूप में और ऐसी तारीख तक जैसा कि विहित किया जाए, तैयार करेगा और उसकी एक प्रति राज्य राज्य सरकार को भेजेगा।
Chapter 4 Chapter 4
13. Annual report to be laid before Legislative Assembly
13. वार्षिक रिपोर्ट का विधान सभा के समक्ष रखा जाना., राज्य सरकार वार्षिक रिपोर्ट और उसके साथ उसमें अन्तर्विष्ट सिफारिशों पर की गई कार्रवाई के ज्ञापन और ऐसी सिफारिशों में से किसी के अस्वीकार करने के कारण, यदि कोई हों, और संपरीक्षा रिपोर्ट, रिपोर्ट के प्राप्त होने के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र विधान सभा के समक्ष रखवाएगी।
Chapter 5 Chapter 5
14. Chairperson, members and staff of the Commission to be public servants
प्रकीर्ण
14. आयोग के अध्यक्ष, सदस्यों और कर्मचारीवृन्द का लोक सेवक होना., आयोग का अध्यक्ष, सदस्य और कर्मचारी भारतीय दण्ड संहिता 1860 (1860 का सं. 45) की धारा 21 के अर्थ में लोक सेवक समझे जाएंगे।
Chapter 5 Chapter 5
15. Power to make rules
- (1) राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के उपबंधों को क्रियान्वित करने के लिये नियम बना सकेगी।
- (2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित समस्त या किन्हीं विषयों के लिये उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात् :, (क) धारा 4 की उपधारा
- (5) के अधीन अध्यक्ष और सदस्यों को संदेय वेतन और भत्ते तथा उनकी सेवा के अन्य निबंधन और शर्तें ; (ख) धारा 9 की उपधारा
- (2) के खण्ड (च) के अधीन कोई अन्य विषय ; (ग) वह प्ररूप जिसमें धारा 11 की उपधारा
- (1) के अधीन लेखा रखा जाएगा और लेखाओं का वार्षिक विवरण तैयार किया जाएगा ; (घ) वह प्ररूप जिसमें और वह तारीख जिस तक वार्षिक रिपोर्ट धारा 12 के अधीन तैयार की जाएगी; (ङ) कोई अन्य विषय जिसे विहित किया जाना अपेक्षित है या किया जाए।
- (3) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, विधान सभा के समक्ष रखा जाएगा।
Chapter 5 Chapter 5
16. Power to remove difficulties
यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उद्भूत होती है तो राज्य सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, ऐसे उपबंध कर सकेगी जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हों और जो उस कठिनाई को दूर करने के लिए उसे आवश्यक या समीचीन प्रतीत हों।
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