section 2
म.ू. कां ठ िचरान (िविनयमन) संशोधन अिधिनयम, 1984 द्वारा लुप् त तथा धारा 9
The Chhattisgarh Kashtha Chiran (Viniyaman) Adhiniyam, 1984धारा 9. आरा िमल तथा (........) में के कां ठ के ःटाक के लेखाओं का रखा जाना - (I) ऐसा कां ठ का चाहे वह िचरा ह ु आ हो, जो आरा िमल (........) में या िचरान ः थल पर पाया जावे या िचरान के ूयोजन के िलए या इसी अन् य ूयोजन के िलए िकसी व् यिक्त द्वारा िकसी भी समय या िकसी कालाविध के दौरान िकसी भी रीित में या िकन् हीं भी साधनों द्वारा वहाँ लाया जाये, ले खाजोखा समुिचत रूप से रखा जावेगा तथा ऐसे सुसंगत साआ य दः तावेज, रसीदें, आदेश तथा ूमाण-पऽ जो यह दिशर्त करने के िलए आवँ यक हों िक वह कां ठ वैध रूप से अिभूाप् त िकया गया है, रखे जावेंगे और िनरीक्षण के समय उपलब् ध कराये जावेंगे। कां ठ के ऐसे ः टॉक के बारे में िजसका समाधानूद रूप में लेखा जोखा नहीं रखा गया है, यह उपधारणा की जावेगी िक वह िविध - िवरुद्ध (Un-lawfully) अिभूाय िकया गया है और कां ठ का वह ः टॉक अिध हृत िकये जाने के दाियत् वाधीन होगा। धारा 10. िबना अनुमित (Unlicensed) आरा िमल में िवद्युत संयोजना आिद का ूितषेध - (1) िनयम िदन से ही और िवद्युत से सम् बिन् धत तत् समय ूवृत् त िकसी अिधिनयम में अन् तिवर्ं ट िकसी बात क े होते ह ु ए भी, िकसी आरा िमल के ूयोजन के िलए कोई िवद्युत ऊजार् तब तक उपयोग नहीं की जावेगी और कोई िवद्युत संयोजन (Electric Connection) तब तक नहीं लगाया जावेगा या उस ूयोजन के िलए तब तक चालू नहीं रखा जावेगा, जब तक िक ऐसी आरा िमल इस अिधिनयम के उपबन् धों के अनुसार सम् यक ् रूप से अनुज्ञप् त न हो या अनुज्ञप् त न समझी जाती हो और ऐसे िवद्युत संयोजन को तब तक चालू रखा जावेगा जब तक िक ऐसी आरा िमल, इस अिधिनयम के अधीन मंजूर की गई या मंजूर की गई समझी गई, िविधमान् य अनुज्ञिप्त के अधीन चालू रहती है।
- (2) राज् य सरकार इस धारा के ूयोजन को कायार्िन्वत करने के िलए िनयम बना सकेगी। नोट - उपरोक् त धारा 9 एवं 10 क े अन् तगर्त लेखा रखा जाना वैध है। िम.िप. ब. 2992/1984 िनणर्य िद. 8-9-87 जबलपुर उच् च न् यायालय। धारा 11. अपील - (1) अनुज्ञिप्त मंजूर करने या अनुज्ञिप्त नवीनीकृत करने से अनुज्ञापन अिधकारी द्वारा इन् कार िकये जाने से या िकसी अनुज्ञिप्त के िनलम् बन या ूितसंहरण से व् यिथत कोई व् यिक्त ऐसे इंकार या िनलंबन या ूितसंहरण के आदेश की, उस पर तािमल की जाने से तीस िदन के भीतर, िविहत ूािधकारी को अपील कर सकेगा जो अपीलाथीर् को और अनुज्ञापन अिधकारी को सुने जान े का अवसर देने के पँ चात ् अपील का िविनँ चय करेगा तथा वह आदेश अनुज्ञापन अिधकारी के िलए आबद्धकर होगा।
- (2) अनुज्ञापन अिधकारी का आदेश, जब तक िक िविहत ूािधकारी सशतर् या िबना शतर् या अन् यथा िनदेर्श न दें, उपधारा
- (1) के अधीन की अपील का िनपटारा होने तक ूवृत् त बना रहेगा। धारा 12. कां ठ, संयंऽों, मशीनरी आिद के िविध िवरुद्ध ः टॉक का अिधहरण - (1) धारा (4) खण् ड (ख) में उपबिन्धत से िसवाय- (क) जहाँ कोई आरा िमल (........) िकसी ऐसे क्षेऽ में िजसे धारा 5 की उपधारा (1) के अधीन
ूितिसद्ध क्षेऽ (Prohibited Area) घोिषत िकया है, ः थािपत िकया जाता है या चलाया जाता
है, या (ख) जहाँ कोई आरा िमल या (........) धारा 6 की उपधारा बमश: 2 तथा 4 के अधीन अनुज्ञिप्त के िबना या अनुज्ञिप्त के नवीनीकरण के िबना ः थािपत िकया जाता है या चलाया जाता है। ____________________________________________________________________________________________
.ू. कां ठ िचरान (िविनयमन) संशोधन अिधिनयम, 2003 द्वारा िवलुप् त। (ग) जहाँ कोई आरा िमल (........) धारा 6 की उपधारा (5) के अधीन अनुज्ञिप्त के िनलिम्बत या ूितसंहृत कर िलये जाने के पँ चात ् चलाया जाता है; या
(घ) जहाँ कोई आरा िमल (........) धारा 10 की उपधारा (1) का उल् लंघन करते िवद्युत ऊजार् या िवद्युत संः थापन की सहायता से चलाया जाता है; या (ङ) जहाँ िकसी आरा िमल (........) में ऐसा कां ठ भण् डािरत िकया जाता है िजसका लेखा-जोखा नहीं रखा गया है। वहाँ अनुज्ञापन अिधकारी िविध िवरूद्धतया (Unlawfully) भण् डािरत कां ठ के ः टॉक को यथािःथित उन समः त संयंऽों, मशीनरी, उपकरणों और उपः करों को, की या उनके िकसी भाग को अिधहृत (Confiscation) िकये जाने का आदेश दे सकेगा।
- (2) उपधारा (1) के अधीन िकसी सम् पित्त को अिधहृत करने वाला कोई आदेश तब तक नहीं िकया जावेगा जब तक िक उस व् यिक्त को, िसकी सम्पित्त अिभमिहत (Seize) की गई है, और उस दशा में जबिक ऐसी सम् पित्त का ः वामी ज्ञात हो, ऐसे व् यिक्त को- (क) वे आधार िजन पर ऐसी सम् पित्त को अिधहृत िकया जाना ूः तािवत है, सूिचत करते ह ु ए िलिखत सूचना नहीं दे दी जाती। (ख) अिधहरण के आधारों के िवरूद्ध िलिखत अभ् यावेदन उतने युिक्तयुक् त समय के भीतर िजतना सूचना में िवनिदर्ं ट िकया जाए करने का अवसर नहीं दे िदया जाता और (ग) इस मामले में सुनने की युिक्तयुक् त अवसर नहीं दे िदया जाता।
- (3) वन संराक्षक की ौेणी से अिनम् न पद ौेणी का कोई वन अिधकारी िजसे राज् य सरकार ने अिधसूचना द्वारा इस
िनिमत् त सशक् त िकया हो। अनुज्ञापन अिधकारी द्वारा उपधारा (1) के अधीन िकये गये
अिधहरण के आदेश की तारीख से तीस िदन के भीतर या तो ः वूेरणा से या आवेदन िकया जाने पर उस आदेा से सम् बिन्धत अिभलेख मंगा सकेगा और उसकी परीक्षा कर सकेगा और ऐसी जाँच करवा सकेगा तथा ऐसे आदेश पािरत कर सकेगा जैसा िक वह ठीक समझे, परन् तु िकसी व् यिक्त पर ूितकूल ूभाव डालने वाला कोई आदेश उसे सुने जाने का अवसर िदये िबना पािरत नहीं िकया जायेगा।
- (4) उपधारा (3) के अधीन पािरत िकसी आदेश से व् यिथत कोई व् यिक्त, ऐसा आदेश उसे संसूिचत िकया जाने की तारीख से तीस िदन के भीतर, िजला न् यायालय को अपील कर सकेगा जो उस क्षेऽ पर अिधकािरता रखता है, िजसमें वह सम् पित्त अिभगृहीत की गई और वह िजला न् यायालय पक्षकरों को सुने जाने का अवसर देने के पँ चात ् ऐसा आदेश पािरत करेगा, जैसा वह ठीक समझे और िजला न् यायालय द्वारा इस ूकार पािरत िकया गया आदेश अिन्तम होगा। जहाँ उपधारा
- (1) या उपधारा (3) या उपधारा (4) के अधीन पािरत िकसी सम् पित्त केा अिधहृत िकये जाने का कोई आदेश ऐसी सम् पूणर् सम् पित्त या उसके भाग के सम् बन् ध में अिन्तम हो गया हो, वहाँ यथािःथित एैसी सम् पित्त या उसका ऐसा भाग सभी िवल् लगमों (Encumberances ) से मुक् त रूप में, राज् य सरकार में िनिहत हो जायेगा।
- (5) उपधारा (1) या उपधारा (3) या उपधारा (4) के अधीन अिधहरण के आदेश के सम् बन् ध में यह नहीं समझा जायेगा िक वह िकसी ऐसी अन् य शािःत का अिधरोिपत िकया जाना विजर्त करता है िजसके िलये वह व् यिक्त, िजससे वह सम् पित्त अिभगृहीत की गई है, इस अिधिनयम के अधीन दायी है। ____________________________________________________________________________________________
1. म.ू. कां ठ िचरान (िविनयमन) संशोधन अिधिनयम, 2003 द्वारा िवलुप् त।
2. म.ू. कां ठ िचरान (िविनयमन) संशोधन अिधिनयम, 2005 (ब. 9 वषर् 2005) द्वारा संशोिधत (म.ू. राजपऽ िद. 27.4.05 पृं ठ 372 पर ूकािशत) नोट - अिधसूचना ब. 18-3-85-दस 3 (अिध. तीन) के द्वारा धारा 12 की उपधारा (3) के अन् तगर्त वन संरक्षक, जो क्षेऽीय वन वृत् त के ूभार में हो, इस उपधारा के अधीन शिक्त का ूयोग करने को सशक् त करती है। धारा 13. शािःतयाँ - (1) यिद कोई व् यिक्त इस अिधिनयम के या उसके अधीन बनाये गये िनयमों एवं उपबन् धों में से िकसी उपबन् ध का उल् लंघन करेगा या करने का ूयत् न करेगा या उसके उल् लंघन का द ु ं ूेरणा करे गा, तो वह कारावास से िजसकी अविध एक वषर् तक की हो सकेगी या जुमार्ने से जो बीस हजार रुपये तक का हो सकेगा या दोनों से, और चालू रहने वाले उल् लंघन की दशा में अितरिक्त जुमार्ने से जो ऐसे ूत् येक िदन के
िलए िजसके दौरान ऐसा उल् लंघन, ऐसे ूथम उल् लंघन के िलए दोषिसिद्ध के पँ चात ् चालू रहता है, चार सौ रु. तक का हो सकेगा, दण् डनीय होगा: परन् तु - (एक) जहाँ ऐसा उल् लंघन, ूयत् न या द ु ं ूेरणा धारा (4) से सम् बिन्धत है या (दो) जब उस उल् लंघन में अन् तमर्ः त िविध िवरूद्ध (Unlawful) कां ठ का पिरमाण, पाँच घन मीटर से अिधक है, वहाँ िद्वतीय या पँ चात् वतीर् अपराध के िलये, दोनों में से ूत् येक दशा में न् यूनतम कारावास तीन मास
का तथा दोनों में से ूत् येक दशा में न् यूनतम जुमार्ना छ: हजार रुपये होगा।
- (2) यिद कोई व् यिक्त- (एक) जब उसे इस अिधिनयम द्वारा या इस अिधिनयम के अधीन के िकसी आदेश द्वारा कोई कथन करने या ऐसी जानकारी देने के िलये अपेिक्षत िकया गया हो, ऐसा कथन करेगा या ऐसी जानकारी देगा जो िकसी ताित्वक (Material) िविशं ट के सम् बन् ध में िमथ् या है और िजसके बारे में वह यह जानता है िक उसके पास िवँ वास करने का कारण है िक वह िमथ् या है अथवा िजसके बारे में उसे यह िवँ वास नहीं है िक वह सत् य है; या (दो) िकसी बही, लेखा, अिभलेख, घोषणा, िववरणी या अन् य दः तावेज में, िजसे रखने या देने के िलये वह इस अिधिनयम के अधीन अपेिक्षत है, यथापूवोर्क् त कोई कथन करेगा, वह कारावास से िजसकी अविध छह मास तक की हो सकेगी या जुमार्ने से जो छ: हजार रुपये तक का हो सकेगा या दोनों से दण् डनीय होगा। धारा 14. कम् पिनयों द्वारा अपराध - (1) जहाँ इस अिधिनयम के अधीन कोई अपराध, िकसी कम् पनी द्वारा िकया गया है, वहाँ ूत् येक ऐसा व् यिक्त जो उस अपराध के िकये जाने के समय उस कम् पनी के कारबार के संचालन के िलये, उस कम् पनी का भारसाधक और उस कम् पनी के ूित उत् तरदायी था और साथ ही वह कम् पनी भी ऐसे अपराध के दोषी समझे जावेंगे और तदनुसार अपने िवरुद्ध कायर्वाही िकये जाने और दिण्डत िकये जाने के भागी होंगे। परन् तु इस अपराध में अन् तिवर्ं ट कोई भी बात ऐसे िकसी व् यिक्त को इस अिधिनयम में उपबिन्धत िकसी दण् ड का भागी नहीं बनाएगी, यिद वह सािबत कर देता है िक अपराध उसकी जानकारी के िबना िकया गया था या यह िक उसने ऐसे अपराध के िकये जाने का िनवारण करने के िलये सम् यक ् तत् परता बरती थी :
- (2) उपधारा (1) में अन् तिवर्ं ट िकसी बात के होतु ह ु ए भी जहाँ इस अिधिनयम के अधीन कोई अपराध िकसी कम् पनी द्वारा िकया गया है और यह सािबत हो जाता है िक वह अपराध कम् पनी के िकसी िनदेशक, ूबन् धक, सिचव या अन् य अिधकारी की सम् पित्त या मौनानुकूलता से िकया गया है या उस अपराध का िकया जाना उसकी िकसी उपेक्षा के कारण ह ु आ माना जा सकता है, वहाँ ऐसा िनदेशक, ूबन् धक, सिचव या अन् य अिधकारी भी उस अपराध का दोषी माना जायेगा और तदनुसार अपने िवरुद्ध कायर्वाही की जाने और दिण्डत िकये जाने का भागी होगा। ः पं टीकरण - इस धारा के ूयोजन के िलये-
(क) 'कम् पनी' से कोई िनयिमत िनकाय अिभूेत है और उसके अन् तगर्त कोई फमर् या व् यिक्तयों
की अन् य सं ः था आती है। (ख) फमर् के सम् बन् ध में िनदेशक से फमर् का भागीदार अिभूेत है।
धारा 15. सबूत का भार (Burden of proof) - (1) जहाँ कोई कां ठ, चाहे वह िचरा ह
ु आ हो या िबना िचरा हो, ऐसी आरा िमल [***] से बरामद होता है, िजसके िलये इस अिधिनयम के या उसके अधीन बनाये गये िनयमों के उपबन् धों के अधीन कोई िविधमान् य अनुज्ञिप्त मौजूद नहीं है, वहाँ जब तक िक तत् ूितकूल सािबत नहीं कर िदया जाता है िजसके िक सािबत करने की भार अिभयुक् त पर होगा, तब तक यह उपधारणा की जायेगी िक वह आरा िमल या आरा गड्ढा चालू था।
- (2) जहाँ इस अिधिनयम के या उसके अधीन बनाये गये िनयमों के िवरुद्ध िकसी अपराध के िलये, िकसी अिभयोजन में यह िसद्ध होता है िक िविध िवरुद्ध घोिषत िकया गया कोई कां ठ िकसी व् यिक्त का आरा िमल के पिरसर में या िकसी ऐसे ः थल पर जहाँ िचराई की जा रही थी, अिभमहीत िकया गया था, वहाँ जब तक िक ूितकूल सािबत नहीं कर िदया जाता है, िजसके िक सािबत करने का भार अिभयुक् त पर होगा, यह उपधारणा की जायेगी िक ऐसे व् यिक्त ने इस अिधिनयम के या उसके अधीन बनाये गये िनयमों के उपबन् धों का उल् लंघन िकया है। धारा 16. अपराध का संज्ञान - कोई भी न् यायालय, इस अिधिनयम के अधीन दण् डनीय िकसी अपराध का संज्ञान, ऐसा अपराध
गिठत करने वाले तत् व के बारे में अनुज्ञापन अिधकारी (Licensing Officer) द्वारा या
िकसी ऐसे व् यिक्त द्वारा, िजसे राज् य सरकार ने या अनुज्ञापन अिधकारी ने इस िनिमत् त सम् यक रूप से ूािधकृत िकया हो, की गई िलिखत िरपोटर् पर ही करेगा अन् यथा नहीं । नोट- राज् य सरकार ने अिधिनयम ब. 18-3-85-x-III (नोट 4) िद. 4-10-85 से धारा 16 के अन् तगर्त कायर्वाही करने हेतु समः त उपवन मण् डलािधकािरयों तथा सहायक वन संरक्षकों को अपनी-अपनी अिधकािरता के भीतर उक् त धारा के ूयोजन के िलये अिधकृ त िकया है।
धारा 17. न् यायालय की अिधकािरता - ूथम वगर् न् याियक मिजःशेट के न् यायालय के अवर कोई
न् यायालय, इस अिधिनयम के अधीन दण् डनीय िकसी अपराध का िवचारण नहीं करेगा। धारा 18. अपराध का ूशमन (Composition of offences) (1) राज् य सरकार द्वारा इस िनिमत् त सशक् त िकया गया वन अिधकारी-
(क) िकसी ऐसे व् यिक्त से, िजसकी अनुज्ञिप्त धारा (6) की उपधारा 5 के अधीन ूितसंहृत
(Revoke) कर िलये जाने या िनलिम्बत कर िलये जाने के दाियत् वधीन है या िजसके सम् बन् ध में युिक्तयुक् त रूप से यह सन् देह है िक उसने धारा 8 के अधीन िववरणी ूः तुत न करने का
धारा 9 के अधीन कं ठ का लेखा-जोखा न रखने, या िविध-िवरुद्धतया (Un-lawfully)
अिभूाप् त िकये गये कां ट की, िजसका पिरमाण (Volume) आधे घन मीटर से कम हो, िचराई करने का अपराध ूथम बार िकया है, दस हजार रुपये से अनािधक धनरािश, यथा िःथित ऐसे ूितसंहरण या िनलम् बन के बदले या ऐसे अपराध के शमन के रूप में ूितमिहत कर सकेगा और शािःत के रूप में दस हजार रुपये से अनिधक रािश अिधरोिपत कर सकेगा और िविध-िवरूद्ध अिभूाप् त िकये गये कां ठ को, िजसका अिभमहण िकया गया था, अिधहृत िकये जाने का आदेश करेगा। ____________________________________________________________________________________________
1. म.ू. राजपऽ िद. 26.4.2003 द्वारा िवलोिपत।
(ख) िकसी ऐसे मामले में, िजसमें कोई सम् पित्त इस अिधिनयम के अधीन िकये जाने के
दाियत् वधीन अिभमहीत (Seize) कर ली गई है समुिचत ूािधकारी द्वारा इस अिधिनयम के अधीन अिधहरण (Confisestion) का आदेश पािरत िकये जाने के पूवर्, उस सम् पित्त को, वन अिधकारी द्वारा ूाक् किलत उसके मूल् य का संदाय कर िदये जाने पर िनमु र्क् त कर सकेगा।
- (2) वन अिधकारी को यथा-िःथित ऐसी धनरािश का या ऐसे मूल् य का या दोनों का संदाय कर िदया जो पर, अिभयुक् त वयिक्त को, यिद वह अिभरक्षा (Custody) में है तो उसे छोड़ िदया जायेगा (Discharged), अिभमिहत सम् पित्त िनमुर्क् त कर दी जावेगी, और ऐसे व् यिक्त के िवरूद्ध या ऐसी सम् पित्त के िवरूद्ध कोई कायर्वाही नहीं की जायेगी। नोट - मध् यूदेश शासन ने अिधसूचना ब. 18-3-85-दस-3- (अिध. पाँच) िद. 4 अक् ट ू बर 1985 के
द्वारा इस अिध िनयम की धारा 18 की उपधारा (1) के
अन् तगर्त ूदत् त शिक्तयों का उपयोग करते ह ु ए वन मण् डलािधकारी, जो क्षेऽीय वन मण् डल के ूभार में हो, उक् त धारा के ूयोजन के िलये संसक् त िकया है। (देंखे राजपऽ (असाधारण) िद. 7-10-85 पृष्ठ 2001) धारा 19. अनुज्ञापन अिधकारी आिद लोक सेवक होंगे - अनुज्ञापन अिधकारी और ूत् येक ऐसे व् यिक्त को िजसे इस अिधिनयम द्वारा या उसके अधीन, उस पर रोिपत िकन् हीं कत् तर्व् यों का िनवर्हन करने के िलये सम् यक ्
रूप से ूािधकृत िकया जाता है, भारतीय दण् ड सं िहत 1860 (1860 का 45) की धारा 21 के अथर् के अन् तगर्त लोक सेवक समझा जायेगा।
धारा 20. सद्भावपूवर्क की गई कायर्वाही का संरक्षण - इस अिधिनयम या उसके अधीन बनाये गये
िकन् हीं िनयमों या आदेशों के अनुसरण में, सद्भावपूवर्क की गई या की जाने के िलये आशियत िकसी भी बात के
िलये कोई बाद, अिभयोजन या अन् य िविधक कायर्वािहयाँ, राज् य सरकार या िकसी अिधकारी या िकसी व् यिक्त या ूािधकारी के िवरूद्ध नहीं होंगी।
धारा 21. पुरः कार - न् यायालय या यथा-िःथित अनुज्ञापन अिधकारी ऐसे व् यिक्तयों को, िजसकी या
िजनकी जानकारी के पिरणामः वरूप इस, अिधिनयम के, या उसके अधीन बनाये गये िनयमों के उपबन् धों में से िकसी उपबन् ध के उल् लंघन का िनिवर्वाद रूप से पता लगा हो, उतनी रकम का, जो जुमार्ने, की रकम के और/या समपहृत और/या अिधहृत सम् पित्त के मूल् य क े एक-चौथाई के अिधक नहीं होगी, पुरः कार िदये जाने की अनुज्ञा या आदेश दे सकेगा। धारा 22. िनयम बनाने की शिक्त - (1) राज् य सरकार इस अिधिनयम के ूयोजनों को कायार्िन्वत करने के िलये िनयम, अिधसूचना द्वारा और पूणर् ूकाशन की शतर् के अध् यधीन रहते ह ु ए बना सकेगी।
- (2) िविशं टतया और पूवर्गामी शिक्त की व् यापकता पर ूितकूल ूभाव डाले िबना, ऐसे िनयमों में िनम् निलिखत समः त िवषयों या उसमें से िकसी िवषय के िलये उपबन् ध हो सकेंगे अथार्त ् -
(क) धारा (6) की उपधारा (1) के अधीन ूारूप िजसमें आवेदन िकया जायेगा और वह फीस तथा
ूितभूित िनक्षेप जो ऐसे आवेदन के सा थ होगा। (ख) धारा (6) की उपधारा (3) के अधीन वे शतेर्ं िजनके अन् तगर्त अनुज्ञिप्त मन् जूर की जायेगी। (ग) धारा (6) की उपधारा (4) के अधीन वह कालाविध िजसके िलये, वह फीस, िजसका संदाय िकया जाने पर, और शतर् िजसके अध् यधीन अनुज्ञिप्त नवीकृत की जा सकेगी। (घ) धारा (8) के अधीन के ूारूप िजसमें, तथा वे तारीखें िजन पर िववरिणयाँ ूःतुत की जायेंगी और वह अिधकारी िजसका िववरणी दी जावेगी। (ङ) धारा (10) की उपधारा (2) के अधीन िवद्युत संयोजन आिद लगाये जाने के िलये। (च) धारा (11) के अधीन वह ूािधकारी िजसको अपील की जायेगी। (छ) कोई अन् य िवषय जो िविहत िकया जाना अपेिक्षत हो या जो िविहत िकया जाये।
- (3) इस अिधिनयम के अधीन बनाये गये समः त िनयम िवधानसभा के पटल पर रखे जावेंगे।
अिधिनयम या िविध, िनयम या आदेश में अन् तिवर्ं ट कोई भी बात या राज् य के िकन् हीं क्षेऽों में िविध का बल रखने वाली कोई भी बात आरा िमल (........) को तथा िचरान को उन िवषयों का बाबत लागू नहीं होगी िजसके िलये इस अिधिनयम में उपबन् ध अन् तिवर्ं ट है। धारा 24. व् यावृित्त (Saving) इस अिधिनयम के या उसके अधीन बनाये गये िनयमों के उपबन् ध - (क) बड़ईिगरी की उन सामान् य ूिबयाओं को िजसमें आरा िमल (........) का कायर् न ही है, को लागू नहीं होंगे। (ख) राज् य शासन के ः वािमत् व की आरा िमल। धारा 25. किठनाई द ू र करने की शिक्त - यिद इस अिधिनयम के उपबन् धों को ूभावशील करने में कोई किठनाई उद्भ ू त होती है, तो राज् य सरकार, ऐसी उपबन् धों से असंगत न होने वाली, कोई भी बात कर सकेगी, जो उस किठनाई को द ू र करने के ूयोजन के िलये उसे आवँ यक या समीचीन ूतीत होती है। परन् तु ऐसा कोई आदेश, इस अिधिनयम के ूारम् भ की तारीख से दो वषर् की कालाविध का अवसान हो जाने के पँ चात ् नहीं िकया जायेगा। धारा 26. िनरसन - मध् य ूदेश कां ट िचरान (िविनयमन) अध् यादेश िद. 1983 (बमांक 11 वषर् 1983) एतद्द्वारा िनरः त िकया जाता है। नोट- (1) अिधसूचना ब. 3415/X/83 िदनांक 15-12-83 जो असाधारण राज-पऽ िद. 15-12-83 के ूकािशत ह ु आ है। (1) कां ठ िचरान (िविनयमन) अध् यादेश िद. 15-12-83 से पूरे मध् य ूदेश राज् य में लागू ह ु आ।
- (2) धारा 3(a) के तहत वन मण् डलािधकारी को अनुज्ञापन अिधकारी िनयुक् त िकया गया।
- (3) धारा 11(1) के तहत वन संरक्षक को अपील अिधकारी िनयुक् त िकया।
- (4) म.ू. कां ठ िचरान (िविनयमन) अिधिनयम को 15-12-83 से लागू करना अिनयिमत नहीं है। िम. िपटीशन ब. 2992/1984 जबलपु र उच् च न् यायालय िनणर्य िद. 8-9-87 अिधसूचना ब. 18-3-85/दस/3 (अ-1) (अनुज्ञिप्तधारी 1) के द्वारा उक् त अिधसूचना में िनम् न संशोधन िकया। संशोधन - उक् त अिधसूचना में अनुबमांक 2 तथा 3 और उससे सम् बिन्धत ूिविष्टयों को लोप िकया जावे। म.ू. शासन, वन िवभाग, भोपाल का पऽ ब. एफ-30-56-93-पाँच-3, िदनांक 23-2-94 जो ूधान वन
संरक्षक एवं अन् य अिधकािरयों को संबोिधत है के अनुसार : (1) छोटी आरा मशीन और खराब मशीन जहाँ पर
िक केवल िफनीँ ड ूोडक्ट्स बनाये जाते हैं और िचराई का कायर् नहीं िकया जाता ह ै के िनयिमतीकरण एवं ः वीकृत हेतु संबंिधत वन मण् डलािधकारी, जो िक अिधिनयम में अनुज्ञापन अिधकारी घोिषत है को अिधकृत िकया जाता है। ____________________________________________________________________________________________
1. म.ू. कां ठ िचरान (संशोधन) अिधिनयम 2003 द्वारा िवलोिपत।
2. कोई भी व् यिक्त िजसके पास आरा मशीन चलान े की अनुज्ञिप्त हो, अपनी आरा मशीन अन् य व् यिक्त को बेच सकता है और ऐसी िःथित में वह अनुज्ञिप्त उस एक कैलेण् डर वषर् के िलये बेता/संबंिधत व् यिक्त को हः तांतिरत की जायेगी परन् तु उन ूकरणों में जहाँ िकसी आरा मशीन के िवरुद्ध दािण्डक कायर्वाही ूः तािवत हो, अथवा ूगित पर हो, की अनुज्ञिप्त हः तांतिरत नहीं की जायेगी।
Study data processing for this section.
PDF: pending for this language.