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कां ठ िचरान (िविनयमन) संशोधन अध् यादेश (17 वषर् 1984) की धारा 3 से ूितः थािपत। अध् यादेश का
The Chhattisgarh Kashtha Chiran (Viniyaman) Adhiniyam, 1984ः थान म. ू. अिधिनयम ब. 13 (वषर् 1984) ने िलया।
(च) ''आरा-िमल'' से अिभूेत है ऐसे संयंऽ और मशीनरी िजससे, और ऐसा पिरसर िजसके
अन् तगर्त उसकी ूसीमाएँ भी जाती हैं िजसमें या िजसके िकसी भाग में कां ठ की िचराई िवद्युत या यांिऽक शिक्त के सहायता से की जाती हैं, िकन् तु इसमें वमार् (िसल), टिनर्ंग मशीन, रूंदा (प् लेनर), छोटा आरा मशीन (िजग सा मशीन) तथा बोिडंग ट ू ल् स सिम्मिलत नहीं हैं।'' (छ) (िवलोिपत)।
(ज) ''िचरान'' से उसके व् याक रिणक रूप भेदों तथा सजातीय पदों सिहत, अिभूेत है या तो िवद्युत
या यािन्ऽक शिक्त की सहायता से यािन्ऽक ूिबया द्वारा या हः तचािलत, आरों से कां ठ की िचराई करने, कटाई करने, उसे रूपान् तिरत करने, उसे गढ़ने या उसका संशोषण (Seasoning) करने की संिबया और उसके अन् तगर्त उसका पिररिक्षत (Preservation) और उसे सािधत (Treatment) िकया जाना आता है। (ज-ज) ''लकड़ी-टाल'' से अिभूेत है िकसी आरा-िमल की ः थापना के िलए राज् य सरकार द्वारा लकड़ी-टाल के रूप में अिधसूिचत िकया गया कोई िविनिदर्ं ट ः थान,''
(झ) ''यान'' (Vehicle) के अन् तगर्त शक, शैक् टर-
शाली, मोटर-यान, नाव तथा छकड़ा (Cart) आते हैं।
(ञ) ''कां ठ'' के अन् तगर्त वृक्ष आते हैं जबिक वे िगर गये हों, िगराये गये हों और िकसी भी
ूजाित का समः त कां ठ, चाहे वह िकसी भी ूयोजन के िलये काटा गया, रूपा न् तिरत िकया गया, गढ़ा गया, चीरा गया या खोखला िकया गया हो या न िकया गया हो। (ट) उन शब् दों तथा अिभव् यिक्तयों के, जो इस अिधिनयम में ूयुक् त हैं, िकन् तु पिरभािषत नहीं है और जो भातीय वन अिधिनयम, 1927 (1927 का 16) में पिरभािषत हैं, तो वे ही अथर् होंगे जो उस अिधिनयम में उसके िलए िदये गये हैं। धारा 3. अनुज्ञापन अिधकारी की िनयुिक्त - राज् य शासन- (क) खण् ड वन पदािधकारी की पद ौेणी से अिनम् न पद ौेणी के िकसी अिधकारी को इस िनयम को ूयोजन के िलए अनुज्ञापन अिधकारी के रूप में िनयुक् त कर सकेगी। (ख) उस ः थानीय सामाओं को पिरिनिँ चत कर सकेगी िजनके भीतर कोई अनुज्ञापन अिधकारी उन शिक्तयों का ूयोग तथा उन कतर्व् यों का पालन करेगा जो इस अिधिनयम द्वारा या उसके अधीन अनुज्ञापन अिधकारी को ूदत् त की गई है तथा उस पर अिधरोिपत िकये गये हैं। धारा 4. अनुज्ञिप्त के िलये आवेदन - िनयत िदन से- (क) कोई भी व् यिक्त िकसी आरा िमल (........) की ः थापना इस अिधिनयम के अधीन उस िनिमत् त मन् जूर की गई अनुज्ञिप्त के ूािधकार के अधीन तथा उसकी शतोर्ं के अधीन रहते ह ु ए ही करेगा अन् यथा नहीं। ''परन् तु राज् य सरकार ऐसी कालाविध अिधसूिचत कर कसेगी िजसके दौरान िकसी नई आरा- िमल की ः थापा के िलए कोई अनुज्ञिप्त मंजूर नहीं की जाएगी'' (ख) कोई भी व् यिक्त िकसी ऐसे आरा िमल (........), जो उक् त तारीख के अिःतत् व में हो तब तक नहीं चलायेगा, जब तक िक ऐसे व् यिक्त को, उसके द्वारा ऐसी तारीख से तीस िदन के भीतर, िकये गये आवेदन पर, इस अिधिनयम के अधीन उस िनिमत् त अनुमित मंजूर न कर दी गई हो : ____________________________________________________________________________________________
1. म.ू. कां ठ िचरान (िविनयमन) संशोधन अिधिनयम, 2003 (ब. 13 वषर् 2003) द्वारा िवलोिपत। एवं
5/2011 िद. 11.1.2011 परन् तु तीस िदन की कलाविध तक, तथा उसके पँ चात ् उतनी काला विध के दौरान, िजसमें आवेदन िवचाराथर् लिम्बत रहता है, यह समझा जायेगा मानो िक ऐसे व् यिक्त को इस अिधिनयम के अधीन अनुज्ञिप्त मंजूर कर दी गई थी और वह तद्न ु सार आरा िमल (........) को चला रहा था।
धारा 5. ूितिषद्ध क्षेऽ की घोषणा - (1) राज् य सरकार अिधसूना द्वारा, उन कारणों से, जो उस
अिधसूचना में िविनिदर्ं ट िकये जावेंगे, िकसी क्षेऽ को, एक बार में तीन वषर् से अ निधक ऐसी कालाविध के िलए जो उसमें िविनिदर्ं ट की जावे, ूितिषद्ध क्षेऽ (Prohibited Area) घोिषत कर सकेगी।
- (2) उन कालाविध के दौरान, िजसके िलए िकसी क्षेऽ को उपधारा (1) के अधीन ूितिषद्ध क्षेऽ घोिषत िकया गया है िनम् निलिखत पिरणाम होंगे, अथार्त ् - (क) उस क्षे ऽ में कोई आरा िमल (........) ः थािपत करने के िलये अनुज्ञिप्त मंजूर नहीं की जावेगी। (ख) उस कालाविध के दौरान कोई अनुज्ञिप्त नवीनीकृत (Renewed) नहीं की जावेगी। (ग) उस क्षेऽ में िःथत आरा िमल (........), चलना बन् द हो जायेगी और वह िचरान की संिबयाएँ (Sawing Operations) बन् द रखेगा; िकन् तु अनुज्ञापन अिधकारी, आरा िमल या आरा गड्ढे में जमा कां ठ की िचराई की जाने की अनुज्ञा ऐसी शतोर्ं एवं िनबन् धों के अधीन, दे सकेगा, िजन् हें अिधरोिपत करना वह ठीक समझे। (घ) बन् द रहने के कारण ह ु ई नुकसानी के मद्दे कोइर् दावा न तो महण िकया जायेगा न ही कोई नुकसानी संदेय होगी। ''5-क. लकड़ी-टाल की घोषणा -
- (1) राज् य सरकार, अिधसूचना द्वारा, ऐसी तारीख से तथा उन कारणों से, उस अिधसूचना में िविनिदर्ं ट िकए जाएं, िकसी क्षेऽ को लकड़ी-टाल के रूप में घोिषत कर सकेगी।
- (2) उपधारा (1) के अधीन लकड़ी-टाल की घोषणा की तारीख से िकसी नई आरा-िमल के िलए ऐसी द ू री के भीतर जैसी िक िविहत की जाए कोई भी अनुज्ञिप्त तब तक मंजूर नहीं की जाएगी जब तक िक लकड़ी-टाल के भीतर आरा-िमल का ः थािपत िकया जाना ूः तािवत नहीं हो जाता है।
- (3) उपधारा (1) के अधीन लकड़ी-टाल की घोषणा की तारीख के पूवर् मंजूर की गई अनुज्ञिपत उपधारा
- (2) के अधीन िविहत की गई द ू री के भीतर तब ही नवीकृत की जाएगी यिद अनुज्ञिप्तधारी नवीकरण की तारीख से दो वषर् की कालाविध के भीतर आरा-िमल को लकड़ी -टाल में ले जाने का वचन देता है'' धारा 6. अनुज्ञिप्त की मन् जूरी, उसका नवीनीकरण, ूितसंहरण या िनलम् बन -
- (1) धारा 4 के अधीन अनुज्ञिप्त के िलए आवेदन ऐसे ूारूप में होगा और उसके साथ ऐसी आवेदन फीस तथा अनुज्ञिप्त की शतोर्ं के सम्यक ् अनुपालन के िलए ऐसा ूितभूत िनक्षेप ूः तुत करेगा जैस िविहत िकया जाये। ____________________________________________________________________________________________
1. म.ू. कां ठ िचरान (िविनयमन) संशोधन अिधिनयम, 2003 (ब. 13 वषर् 2003) द्वारा संशोिधत/िवलोिपत।
- (2) उपधारा (1) के अधीन आवेदन ूाप् त होने पर अनुज्ञापन अिधकारी, ऐसी जाँच करने के पँ चात ् जैसी वह ठीक समझे- (एक) अनुज्ञिप्त मंजूर कर सकेगा। (दो) िलिखत आदेश द्वारा, उन कारणों से, जो उस आदेश में संिक्षप् त में किथत िकये जावेंगे, अनुज्ञिप्त मंजूर करने से इंकार करेगा; परन् तु अनुज्ञिप्त मंजूर करेन से इंकार करने वाला कोई आदेश तब तक पािरत नहीं िकया जायेगा जब तक िक आवेदक को सुनवाई का अवसर न दे िदया गया हो।
- (3) उपधारा (2) के अधीन मंजूर की गई अनुज्ञिप्त, इस अिधिनयम के उपबन् धों तथा ऐसी शतोर्ं के, जो िविहत की जावें, अध् यधीन होगी।
- (4) इस धारा के उपबन् ध, अनुज्ञिप्त के नवीनीकरण को, उसी ूकार लागू होंगे िजस ूकार अनुज्ञिप्त के मंजूर िकये जाने या अनुज्ञिप्त मंजूर करने से इन् कार करने के िलए लागू होते हैं।
- (5) यिद अनुज्ञापन अिधकारी का, या तो उसे इस िनिमत् त िकये गये िनदेर्श पर से या अन् यथा या समाधान हो जाता है िक- अिधसूचना - अिध. ब. एफ 30.4.2002-दस-3 िदनांक 22.7.2009 म.ू. शासन कां ठ िचरान (िविनयमन) अिधिनयम 1984 (ब. 13 वषर् 1984) की धारा 5 की उपधारा
- (1) के द्वारा ूदत् त शिक्तयों को ूयोग में लाते ह ु ए, तथा इस िवभाग की अधसूचना ब. एफ 30.4.2002-दस-3 िदनांक 8 अगः त, 2006 को जो म.ू. राज् य पऽ में िदनांक 18.8.2006 को ूकािशत ह ु ई के तारतम् य में राज् य सरकार, एतद् द्वारा, लोकिहत तथा वन पयार्वरण को संरिक्षत करने तथा उनकी सुरक्षा करने की दृिष्ट से नगरपािलका िनगम, नगर पंचायत तथा िवशेष क्षेऽ िवकास ूािधकरण क्षेऽ को छोड़कर आरिक्षत या संरिक्षत वन की सीमाओं के बाहर 20 िकलोमीटर के भीतर के क्षेऽों को 8 अगः त, 2009 से 3 वषर् की कालाविध के िलए, उक् त अिधिनयम के ूयोजन के िलए ूितिषद्ध क्ष ेऽ घोिषत करता है। परन् तु माननीय सवोर्च् च न् यायालय द्वार गिठत आिधकार द्वारा मुक् त िकये क्षेऽ - (1) बालाघाट िजले के िकरनापुर, िहरीर्, लांजी, खेरलांजी दल् हापुर, लालबरार्, मानपुर, अमला िझरी तथा को सभी और ऐसे समः त क्षेऽ िजन् हें केन् िीय सािधकार सिमित ने मुक् त िकया है या ऐसी आरा मशीनें िजन् हें केन् िीय सािधकार सिमित ने उनके िनरन् तर ूचालन के िलए अनुज्ञात िकया है, उक् त घोषणा िकये गये ूितिषद्ध क्षेऽ से मुक् त रहेंगे। अिध.ब. म.ू. राजपऽ भाग 1 िदनांक 31.7.09 पृष्ठ 1893 पर ूकािशत। (क) अनुज्ञिप्त आरा िमल (........) पर अपने िनयन् ऽण से सम् पूणर्: या भागत: अलग हो गया है, या यह िक उसने ऐसी आरा िमल (........) को चलाया या उस पर ः वािमत् व रखना अन् यथा बन् द कर िदया है, या (ख) अनुज्ञिप्तदारी ने, युिक्तयुिक्त हेतु िबना, अनुज्ञिप्त की शतोर्ं में से िकसी शतर् का या अनुज्ञापन अिधकारी द्वारा िविधपूवर्क िदये गये िकसी िनदेर्श का अनुपालन नहीं िकया है, या इस अिधिनयम के, या उसके अधीन बनाये गये िनयमों के उपबन् धों में से िकसी उपबन् ध का उल् लंघन िकया है, या ____________________________________________________________________________________________
1. म.ू. कां ठ िचरान (िविनयमन) संशोधन अिधिनयम, 2003 द्वारा िवलोिपत।
(ग) अनुज्ञिप्तधारी के आरा िमल (........) के पिरसर में ऐसा कां ठ रखा है िजसके सम् बन् ध में
वह समाधानूद रूप से लेखा-जोखा नहीं दे सकता है और पिरणामः वरूप जो धारा 9 के
अधीन अिधहृत िकये जाने के दाियत् वाधीन है, तो िकसी ऐसी अन् य शािःत के िलए िजसके िलए अनुज्ञिप्तधारी इस अिधिनयम के अधीन उत् तदायी हो सकता है ूितकूल ूभाव डाले िबना, अनुज्ञापन अिधकारी हेतुक दशार्ने का अवसर अनुज्ञिप्तधारी को देने के पँ चात ् अनुज्ञिप्त ूितसंहृत (Revoke) या िनलिम्बत (Suspend) कर सकेगा, और वह धनरािश, यिद कोई हो, जो उन शतोर्ं के िजनके अध् यधीन अनुज्ञिप्त मंजूर की गई है, सम् यक ् पालन के िलए ूितभूत के रूप में जमा की गई है, उसको अथवा उसके िकसी भाग को समपहृत (Forfeit) कर सकेगा।
- (6) उपधारा ( 5) के अधीन जारी िकये गये ूत् येक आदेश की एक ूित अनुज्ञिप्तधारी को दी जायेगी।
धारा 7. ूवेश, िनरीक्षण, तलाशी, अिभमहण आिद की शिक्त - (1) िकसी आरा िमल
(........) की िःथित का अिभिनँ चयन (Ascertaining) करने या उसके संचालन की परीक्षा कायर् करने के ूयोजन से, या इस अिधिनयम के या उसके अधीन बनाये गये िनयमों के उपबन् धों का अनुपालन सुिनिश्चत करने की दृिष्ट से, अनुज्ञापन अिधकारी या कोई ऐसा अन् य व् यिक्त, जो अनुज्ञापन अिधकारी द्वारा इस िनिमत् त ूािधकृत िकया गया हो- (क) िकसी आरा िमल (........) में ूवेश कर सकेगा और उसका िनरीक्षण कर सकेगा। (ख) िकन् ही दः तावेजों, बिहयों, रिजः टरों, या अिभलेखों को, जो िकसी आरा िमल (........) पर िनयन् ऽण रखने वाले, िकसी व् यिक्त के अथवा, उसके सम् बन् ध में िनयोिजत िकसी के कब् जे या अिधकार में है, परीक्षा कर सकेगा और इस ूयोजन के िलए उन् हें पेश िकये जाने का आदेश दे सकेगा। ( ग) िकसी व् यिक्त की तलाशी ले सकेगा, या इस अिधिनयम के तथा उसके बनाये गये िनयमों के उपबन् धेां के उल् लंघन में उपयोग में लाये गये या उपयोग में लाये जाने के आशियत, िकसी पिरसर, यान, मशीन, औजारों और उपः करों की तलाशी ले सकेगा और उस ूयोजन के िलये िकसी यान या व् यिक्त को रोक सकेगा। (घ) ऐसे कां ठ, संयंऽों और मशीनरी, औजार, यान और िकसी अन् य वः तु को, िजसके िक बारे में उसे सन् देह है िक वह इस अिधिनयम के या, उसके अधीन बनाये गये िनयमों के उपबन् धों का उल् लंघन िकये जाने में पहले से ही अन् तमर्ः त है, या उपयोग में लाई जाने वाली है, अिभमिहत (Seize) कर सकेगा।
- (2) दण् ड ूिबया संिहता, 1973 (1974 का 2) की धारा 100 क े उपबन् ध, जे तलाशी और अिभमहण से सम् बिन्धत हैं, जहाँ तक हो सके, इस धारा के अधीन की तलािशयों और अिभमहणों को लागू होंगे। धारा 8. िववरिणयों का ूः तुत िकया जाना - ूत् येक अनुज्ञिप्तधरी, यथािःथत आरा िमल (........) के कामकाज के सम् बन् ध में ऐसी िववरिणयाँ, ऐसे ूारूप में, और ऐसे अिधकारी को, तथा ऐसी तारीखों पर ूः तुत करेगा, जैसे िविहत िकया जावे। ____________________________________________________________________________________________
1. म.ू. कां ठ िचरान (िविनयमन) संशोधन अिधिनयम, 2003 द्वारा िवलोिपत।
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