Bihar Legislature (Pay, Allowances and Pension of Members) Act, 2006
Bihar Legislature (Pay, Allowances and Pension of Members) Act, 2006
1. संक्षिप्त नाम एवं प्रारम्भ ।
- (1) यह अधिनियम बिहार विधान मण्डल (पदाधिकारियों के वेतन एवं भत्ते) अधिनियम, 2006 कहा जा सकेगा।
- (2) यह उस तारीख से प्रवृत्त होगा जो राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, राजपत्र में, इस निमित्त, नियत करें।
2. परिभाषाएं।
जब तक कोई बात विषय या संदर्भ के विरुद्ध न हो, इस अधिनियम में :- (क) "अध्यक्ष" से अभिप्रेत है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद-178 के अनुसार निर्वाचित बिहार विधान सभा का अध्यक्ष। (ख) "उपाध्यक्ष" से अभिप्रेत है, भारत के संविधान के अनुच्छेद-178 के अनुसार निर्वाचित बिहार विधान सभा का उपाध्यक्ष। (ग) "सभापति" से अभिप्रेत है, भारत के संविधान के अनुच्छेद 182 के अनुसार निर्वाचित बिहार विधान परिषद का सभापति। (घ) "उप सभापति" से अभिप्रेत है, भारत के संविधान के अनुच्छेद 182 के अनुसार निर्वाचित बिहार विधान परिषद का उप सभापति।
3. वेतन, भत्ते एवं अन्य सुविधायें ।
इस अधिनियम के नियम -2 में विनिर्दिष्ट पदधारकों को सरकार द्वारा समय-समय पर अवधारित नियमावली के द्वारा तय पैमाने एवं शर्तों के अनुसार वेतन, भत्ते एवं अन्य सुविधायें देय होंगी।
4. नियम बनाने की शक्ति ।
- (1) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए नियमावली बना सकेगी :
- (2) विशेष रूप से पूर्ववर्ती शक्तियों की व्यापकता पर प्रभाव डाले बिना, ऐसी नियमावली निम्नलिखित समस्त या किसी विषय के लिए उपबंध कर सकेगी, यथा :- वेतन, भत्ते एवं अन्य सुविधायें।
- (3) इस अधिनियम के तहत बनाया जानेवाला प्रत्येक नियम उसके बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र विधान मण्डल के दोनों सदनों के समक्ष जब वे सत्र में हो कुल 14 दिनों की अवधि के लिए रखा जाएगा। यह अवधि एक सत्र या दो या उससे अधिक लगातार सत्रों को मिलाकर हो सकती है। यदि उपर्युक्त सत्र या उपर्युक्त उत्तरवर्ती सत्रों के ठीक बाद वाले सत्रवसान से पहले, सदन नियम में कोई उपान्तरण करने के लिए सहमत हो अथवा सदन इस बात के लिए सहमत हों कि यह नियम न बनाया जाए तो तत्पश्चात् नियम यथास्थिति उस उपान्तरित रूप में ही प्रभावी होगा या उसका कोई प्रभाव नहीं होगा, ऐसा कोई उपान्तरण इस नियम के अधीन पूर्व में की गयी किसी बात की विधि मान्यता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।
5. निरसन एवं व्यावृत्ति।
बिहार विधान मण्डल पदाधिकारीयों के वेतन भत्ता अधिनियम, 1953 एवं उसमें समय-समय पर किया गया संशोधन अधिनियम इस अधिनियम के अन्तर्गत नियमावली के प्रवृत्त होने की तिथि से निरसित समझे जायेगें : परन्तु, ऐसे निरसन के होते हुए भी उक्त अधिनियम के द्वारा या उसके अधीन प्रदत्त शक्ति के प्रयोग में किया गया कोई कार्य या की गई कोई कार्रवाई इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में दिया गया या की गयी समझी जाएगी, मानों यह अधिनियम उस दिन प्रवृत्त था, जिस दिन ऐसा कार्य किया गया था या ऐसी कार्रवाई की गयी थी : परन्तु यह भी कि, इस अधिनियम के प्रभावी होने के बाद भी जबतक इसके प्रावधानों को कार्यान्वित करने हेतु नियमावली नहीं बनायी जाती है, तबतक पूर्ववर्ती अधिनियम के प्रावधानों को कार्यान्वित करने के लिए बनायी गई नियमावली प्रभावी रहेगी।
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