section I
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The Madhya Pradesh Ashaskiya Shikshan Sanstha (Anudan ka Pradaya) Adhiniyam 1978( धारा 12 देखिये) मध्यप्रदेश सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1973 के उपान्तरण. (1) सातवां अध्याय- जांच तथा अन्विषण में, धारा 32 के पूर्व, निम्नलिखित धारा अन्तःस्थापित की गई समझी जाय, अर्थात्:- "31- क. इस अध्याय में "रजिस्ट्रार" से अभिप्रेत होगा मध्यप्रदेश अशासकीय शिक्षण संस्था ( अध्यापकों तथा अन्य कर्मचारियों के वेतनों का संदाय) अधिनियम, 1978 की धारा 2 के खंड ( ग) के अर्थ के अंतर्गत शिक्षा अधिकारी." (2) धारा 33 की उपधारा ( 1) के खण्ड ( क) के स्थान पर निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया गया समझा जायगा, अर्थात्:- "( क) उन कर्तव्यों का, जो कि इस अधिनियम के द्वारा या अधीन या सोसाइटी के विनियमों या उपविधियों के द्वारा या अधीन या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियमिति के द्वारा या अधीन या ऐसे किसी विधिपूर्ण आदेश द्वारा, जो कि राज्य सरकार या रजिस्ट्रार द्वारा पारित किया गया हो, उस पर अधिरोपित किये गये हैं, पालन करने में बार-बार व्यतिक्रम करता है, या उनका पालन करने में उपेक्षा करता है या ऐसे कर्तव्यों का पालन करने के लिये रजामन्द नहीं है; या." (3) धारा 37 की उपधारा ( 2) में निम्नलिखित परन्तुक जोड़ा गया समझा जाय, अर्थात्:- "परन्तु कोई भी न्यायालय धारा 38 की उपधारा ( 1), जैसी कि वह मध्यप्रदेश अशासकीय शिक्षण संस्था ( अध्यापकों तथा अन्य कर्मचारियों के वेतनों का संदाय) अधिनियम, 1978 की धारा 12 द्वारा प्रतिस्थापित की गई है, के अधीन दंडनीय किसी अपराध का संज्ञान ऐसे अधिकारी द्वारा, जिसे कि राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस संबंध में विनिर्दिष्ट करे, किये गये परिवाद पर ही करेगा अन्यथा नहीं।" (4) धारा 38 की उपधारा ( 1) के स्थान पर निम्नलिखित उपधारा स्थापित की गई समझी जायगी, अर्थात्:- ( 1) यदि अध्यक्ष, सचिव या ऐसा कोई अन्य व्यक्ति, जो सोसाइटी के शासी निकाय के संकल्प द्वारा इस संबंध में प्राधिकृत किया गया हो,– ( क) धारा 27 के उपबंधों का अनुपालन न करें; या ( ख) मध्यप्रदेश अशासकीय शिक्षण संस्था ( अध्यापकों तथा अन्य कर्मचारियों के वेतनों का संदाय) अधिनियम, 1978 की धारा 4 के अधीन दिये गये किसी निदेश का या धारा 3 या धारा 5 या धारा 6 के उपबंधों का पालन न करे, तो वह दोषसिद्धि पर,– ( एक) जुर्माने से, जो पाँच सौ रुपये तक का हो सकेगा, तथा चालू रहने वाले भंग की दशा में अतिरिक्त जुर्माने से, जो प्रथम भंग के पश्चात्, प्रत्येक ऐसे दिन के लिये जिसके कि दौरान भंग चालू रहे, पचास रुपये तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा; ( दो) विलोपित......
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