section 2
िारा 16 का प्रवतस्र्ापनैः- न्यायालय िुल्क अविवनयि, 1870 (1870 का 07) िें राष्ट्रीय राजिानी क्षेत्र दिल्ली िें इसके प्रितयन िें िारा 16 को वनम्नवलवित रूप िें प्रवतस्र्ावपत दकया जाएगाैः
The Court Fees (Delhi Amendment) Act, 1956Part IV Part IV
राष्ट्रीय रािधानी राज्य क्षेत्र दिल्ली सरकार
GOVERNMENT OF THE NATIONAL CAPITAL TERRITORY OF DELHI
विवि, न्याय एिं वििायी कायय विभाग अजधसूचना दिल्ली, 6 माचच, 2026
F. 14 (105)/LA-2026/ jtsecylaw /359-368—भारत के राष्ट्रपवत द्वारा दिनांक 19 फरिरी, 2026 को विली सहिवत के पश्चात् राष्ट्रीय राजिानी क्षेत्र दिल्ली की वििानसभा का वनम्नवलवित अविवनयि जनसािारण की सूचनार्य प्रकावित दकया जाता ह ैः-
न्यायालय िुल्क (दिल्ली संिोिन) अविवनयि, 2026 (2026 का दिल्ली अविवनयि 01) (9 जनिरी 2026 को राष्ट्रीय राजिानी क्षेत्र दिल्ली की वििानसभा द्वारा यर्ा पाररत)
{06th March, 2026}
एक अविवनयि न्यायालय िुल्क अविवनयि, 1870 (1870 का 07) िें राष्ट्रीय राजिानी क्षेत्र दिल्ली िें प्रितयन के वलए आगे संिोिन करने हेतु अविवनयि।
भारत गणराज्य के सतहत्तरिां िर्य िें राष्ट्रीय राजिानी क्षेत्र दिल्ली की वििान सभा द्वारा वनम्नवलवित “रूप से अविवनयवित होैः
1644 DG/2026 (1)
2 DELHI GAZETTE : EXTRAORDINARY PART IV]
1. संवक्षप्त िीर्यक और प्रारंभ:- (1) इस अविवनयि को “न्यायालय िुल्क (दिल्ली संिोिन) अविवनयि, 2026” कहा जाएगा।
- (2) यह अविवनयि दिल्ली राजपत्र िें इसके प्रकािन की वतवर् से प्रभािी होगा।
“िारा 16- िुल्क की िापसीैः- यदि दकसी िाि या अपील के पक्षकार दकसी भी अिस्र्ा िें आपसी सहिवत से अपना वििाि सुलझा लेते हैं , चाहे न्यायालय के हस्तक्षेप से या विना हस्तक्षेप के, तर्ा चाहे िीिानी प्रदिया संवहता, 1908 (1908 का अविवनयि सं. 5) की िारा 89 िें उवल्लवित दकसी भी वििाि वनपटान विवि को अपनाकर या विना अपनाए, और उक्त िाि (वजसिें प्रत्यािेिन, यदि कोई हो, सवमिवलत ह ) या अपील को न्यायालय द्वारा सुलह / सिझौते के रूप िें वनपटाया जाता ह , तो िािी/ प्रत्यािेिक को न्यायालय से एक प्रिाणपत्र प्राप्त करने का अविकार होगा, वजसके आिार पर िह कलक्टर / संिंवित अविकारी से उक्त िािपत्र/प्रत्यािेिन पर अिा दकया गया पूरा िुल्क िापस प्राप्त कर सकेगा।”
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