section 8
इस भाग में शब्द "स्थावर संपत्ति" का वही अर्थ होगा, जो संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 (क्र. 4 सन् 1882) में उसके लिए समनुदेशित किया गया है ।
Chhattisgarh Upkar (Sanshodhan) Act, 2022General19813 sections
Statutory text
9.
- (1) विक्रय, दान, भोग बंधक या तीस वर्ष या अधिक कालावधि के पट्टे के माध्यम से स्थावर संपत्ति के अंतरण पर इस अधिनियम के साथ संलग्न अनुसूची के अनुसार उपकर प्रभारित किया जाएगा, उद्गृहीत किया जाएगा तथा संदत्त किया जाएगा: परन्तु भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 (1899 का सं. 2) के अधीन छूट, यथाआवश्यक परिवर्तन सहित, इस अधिनियम के अधीन उपकर के संबंध में उसी सीमा तक लागू होंगी, जिस सीमा तक कि वे, उस अधिनियम के अधीन प्रभार्य शुल्क को इस प्रकार लागू होती हो, मानो कि उपकर, उस अधिनियम के अधीन प्रभार्य शुल्क हो ।
- (2) उप-धारा
- (1) के अधीन प्रभारित और उद्गृहीत उपकर, स्थावर संपत्ति के अंतरण की लिखत के रजिस्ट्रीकरण के साथ चुकाया जाएगा और वसूल किया जाएगा। उपकर के भुगतान को, अंतरण के विलेख पर, भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 (1899 का सं. 2) के अधीन जारी किये गये स्टाम्प चिपकाकर दर्शाया जायेगा।
- (3) उपकर, उस व्यक्ति के द्वारा देय होगा, जिसके द्वारा भारतीय स्टॉम्प अधिनियम, 1899 (1899 का सं. 2) के अधीन स्टाम्प शुल्क देय है।
- (4) रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का सं. 16) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, उसके अधीन कोई अधिकारी, किसी दस्तोज को रजिस्ट्रीकरण के लिए तब तक ग्रहण नहीं करेगा, जब तक कि उप-धारा
- (1) के अधीन प्रभारित और उद्गृहीत उपकर पूर्णतः चुका न दिया गया हो।
- (5) भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 (1899 का सं. 2) की धारा 48 के उपबंध, इस भाग के अधीन उपकर की वसूली पर उसी प्रकार लागू होंगे, जिस प्रकार कि वे, इस अधिनियम के अधीन शुल्क एवं शास्तियों की वसूली पर लागू होते हैं।
- (6) उपकर के आगम, ग्रामीण विकास निधि एवं छत्तीसगढ़ रोजगार मिशन तथा राजीव मितान क्लब योजना से संबंधित प्रयोजन के लिए उपयोजित किये जायेंगे। उपकर से प्राप्त राजस्व का विभाजन विहित रीति से किया जायेगा।" 3. अनुसूची का जोड़ा जाना मूल अधिनियम की धारा 11 के पश्चात्, निम्नलिखित अनुसूची जोड़ा जाये, अर्थात् :- "अनुसूची लिखतों पर उपकर (धारा 9
- (1) देखिये)
स.क्र. लिखतों का विवरण संपत्ति का विवरण उपकर
(1) (2)
- (3) (4)
1. विक्रय, दान भोग बंधक या तीस वर्ष या अधिक की कालावधि के लिए पट्टा स्थावर संपत्ति के अंतरण पर . स्टाम्प शुल्क की उस रकम के, जिससे कि ऐसे अंतरण की लिखत भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 (1899 का सं. 2) की अनुसूची 1-क के सुसंगत अनुच्छेद के अनुसार प्रभार्य है, 12 प्रतिशत की दर से।"
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